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नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद इन नामों पर चर्चा तेज, कौन होगा बिहार का नया CM?


पटना. बिहार की राजनीति एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को एमएलसी के पद से इस्तीफा दे दिया है. अब वह राज्यसभा सांसद पद की शपथ लेंगे और इसी के साथ ही नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे. ऐसे में नीतीश कुमार के इस्तीफे की खबर के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बिहार की कमान किसके हाथों में जाएगी. करीब दो दशकों तक बिहार के सत्ता की कुर्सी संभालने वाले नीतीश कुमार के बाद नेतृत्व को लेकर सियासी गलियारों में कई नाम चर्चा में हैं. फिलहाल बिहार में एनडीए सरकार का मौजूदा ढांचा ऐसा है कि जेडीयू का मुख्यमंत्री है और भाजपा के दो डिप्टी सीएम हैं. लेकिन, अब नीतीश कुमार के राज्यसभा चले जाने के बाद बिहार में सत्ता का यह समीकरण पूरी तरह बदल सकता है. राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भविष्य में भाजपा का मुख्यमंत्री और जेडीयू के दो डिप्टी सीएम वाला नया फॉर्मूला सामने आ सकता है. हालांकि जेडीयू के कई नेता इस नए फॉर्मूले को नकार रहे हैं. जेडीयू नेता चाहते हैं कि बिहार में फिर से सीएम जेडीयू का ही बने.
किस फॉर्मूले पर होगा नई सरकार का गठन?

वहीं सियासी गलियारे में एक चर्चा यह भी है कि बिहार में बीजेपी का सीएम और जेडीयू का सिर्फ एक डिप्टी सीएम होगा. अगर ऐसा होता है तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जाएगा. पिछले कई वर्षों से बिहार में जेडीयू के नेतृत्व में सरकार चलती रही है, लेकिन अब भाजपा के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावना पर भी चर्चा तेज हो गई है. अब ऐसे में बिहार के अगले मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाओं का बाजार तेज है. ऐसे में आइये जानते हैं बिहार में अगले मुख्यमंत्री के लिए किन नामों पर चर्चा तेज है.

सम्राट चौधरी के नाम की खूब चर्चा, लेकिन…
बिहार के वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट का नाम सबसे आगे माना जा रहा है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके सम्राट चौधरी संगठन और सत्ता दोनों में मजबूत पकड़ रखते हैं. पार्टी के भीतर उनका कद बढ़ा है और वह गठबंधन का चेहरा भी बन सकते हैं. नीतीश कुमार ने भी समृद्धि यात्रा के दौरान सम्राट चौधरी के नाम पर कई बार इशारा किया. लेकिन, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी सीएम संगठन के किसी पुराने चेहरे को ही सीएम बनाने के फॉर्मूले पर काम करेगी. सम्राट चौधरी अपने राजनीति के शुरुआती दौर में आरजेडी में थे. वह बीजेपी में बाद में आए हैं. ऐसे में बीजेपी संगठन के किसी पुराने चेहरे पर भरोसा जता सकती है. हालांकि भाजपा अक्सर चौंकाने वाले फैसलों के लिए भी जानी जाती है, इसलिए अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में हो

निशांत कुमार: ‘विरासत’ का सवाल
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर हमेशा से ही निशांत कुमार की चर्चा होती रही है. ऐसे में बिहार के अगले सीएम के तौर पर निशांत कुमार का नाम भी चर्चा में है. दरअसल हाल के दिनों में जेडीयू की सदस्यता लेने के बाद जिस तरह निशांत कुमार एक्टिव नजर आ रहे हैं, उनको लेकर बड़ी संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता है. जेडीयू के कई नेताओं ने इशारा भी किया है कि आने वाले दिनों में जेडीयू और बिहार की कमान निशांत कुमार ही संभालेंगे.

नित्यानंद राय: संगठन और केंद्र का अनुभव
केंद्रीय मंत्री नित्यानंद भी संभावित दावेदारों में गिने जा रहे हैं. भाजपा के मजबूत ओबीसी चेहरे के रूप में उनकी पहचान है. संगठन में उनकी पकड़ और केंद्र सरकार में अनुभव उन्हें एक मजबूत विकल्प बनाता है. नित्यानंद राय गृह मंत्री अमित शाह के भी काफी करीबी माने जाते हैं और उन्हें पहले भी बिहार में कई बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. नित्यानंद राय बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं.

रामकृपाल यादव: अनुभवी चेहरा
बिहार सरकार में वर्तमान मंत्री रामकृपाल का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में है. रामकृपाल यादव लंबे समय से राजनीति में सक्रिय हैं और बिहार की सियासत को करीब से समझते हैं. वह भी एक ओबीसी चेहरे के तौर पर दावेदारों में आगे गिने जा रहे हैं. हालांकि उनकी दावेदारी उतनी मजबूत नहीं मानी जा रही, लेकिन समीकरण बदलने पर वह भी विकल्प बन सकते हैं.

क्या कोई महिला चेहरा या न्यू फेस होगा सरप्राइज?
बिहार की राजनीति में महिला नेतृत्व को आगे बढ़ाने की चर्चा भी तेज है. ऐसे में यह संभावना भी जताई जा रही है कि भाजपा या जेडीयू किसी महिला चेहरे को आगे कर सकती है। इससे सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की जा सकती है. वहीं बीजेपी ने जिस तरह से दिल्ली, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में सीएम फेस को लेकर क्यों नए चेहरों पर प्रयोग किया है, वैसा ही प्रयोग बिहार में भी किया जा सकता है, यानि बीजेपी किसी ऐसे चेहरे को भी मुख्यमंत्री बना सकती है, जिसकी कहीं से कोई चर्चा भी नहीं हो रही हो.

क्या कहते हैं सियासी संकेत?
बिहार में सरकार एनडीए गठबंधन के तहत चल रही है, ऐसे में मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम फैसला भाजपा और जेडीयू के शीर्ष नेतृत्व को मिलकर लेना होगा. जातीय समीकरण, राजनीतिक संतुलन और आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए ही नया चेहरा तय किया जाएगा. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगला मुख्यमंत्री ऐसा होगा जो न सिर्फ गठबंधन को संतुलित रख सके, बल्कि बिहार की राजनीति में स्थिरता भी बनाए रखे. नीतीश कुमार के जाने के बाद जो ‘सियासी खालीपन’ बना है, उसे भरना आसान नहीं होगा. फिलहाल बिहार की राजनीति में हलचल तेज है और हर दिन नए समीकरण बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि एनडीए नेतृत्व किस नाम पर मुहर लगाता है.

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