Saturday, March 28, 2026
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शिमला में गैस संकट: होटलों में चूल्हे ठंडे, मेन्यू से चाइनीज गायब, समर सीजन से पहले पर्यटन पर मंडराया खतरा!


शिमला: गर्मियों की छुट्टियों की आहट के साथ ही ‘पहाड़ों की रानी’ शिमला पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार हो रही थी, लेकिन इस बीच एक बड़े संकट ने दस्तक दे दी है. शिमला में कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडरों की भारी किल्लत के कारण पर्यटन उद्योग में हड़कंप मच गया है. हालात इतने गंभीर हैं कि शहर के मशहूर होटलों और रेस्टोरेंट्स में चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं. पर्यटकों को खाना खिलाना तो दूर, अब होटल संचालक एडवांस बुकिंग रद्द कर पर्यटकों के पैसे वापस करने को मजबूर हैं. यह संकट तब गहराया है जब कुछ ही दिनों में पीक टूरिस्ट सीजन शुरू होने वाला है.

मेन्यू हुआ सीमित: गायब हुए लजीज व्यंजन
गैस की किल्लत ने होटलों के किचन का गणित बिगाड़ दिया है. गैस बचाने के लिए शहर के अधिकांश रेस्टोरेंट्स ने अपने ‘मेन्यू कार्ड’ छोटे कर दिए हैं. अब पर्यटकों को तंदूरी रोटी, चाइनीज फूड या तले हुए व्यंजनों के बजाय केवल साधारण दाल-चावल और सब्जी-रोटी परोसी जा रही है. शिमला के प्रसिद्ध मॉल रोड, मिडिल बाजार और लक्कड़ बाजार में स्थिति और भी खराब है. वहां कई छोटे ढाबे पूरी तरह बंद हो गए हैं. हैरानी की बात यह है कि हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी की कैंटीन भी इस संकट की चपेट में आ गई है. यहां तक कि पर्यटन निगम के अपने होटल ‘होलीडे होम’ में अब गैस के बजाय लकड़ियों पर खाना पकाया जा रहा है.

एडवांस बुकिंग कैंसिल, लाखों का रिफंड
शिमला में होटल कारोबारियों का कहना है कि जहां रोजाना 8 से 10 सिलेंडरों की जरूरत होती थी, वहां अब बमुश्किल 2 या 3 सिलेंडर मिल पा रहे हैं. होटल लैंडमार्क के संचालक ने बताया कि गैस न होने के कारण पिछले 15 दिनों में उन्हें लाखों रुपये का रिफंड करना पड़ा है. शादियों और पार्टियों की बुकिंग भी रद्द हो रही हैं. ट्रैवल एजेंट्स के पास देशभर से फोन आ रहे हैं, जिसमें पर्यटक सबसे पहले यही पूछ रहे हैं कि क्या शिमला आने पर उन्हें खाना मिलेगा या नहीं?

मेन्यू से चाइनीज गायब
वहीं, कई होटलों ने नई बुकिंग लेना भी बंद कर दिया है, जिससे पर्यटन कारोबार पर बड़ा असर पड़ रहा है. गैस बचाने के लिए होटलों ने अपने मेन्यू में बड़े बदलाव किए हैं. अब ज्यादातर जगहों पर केवल दाल, रोटी, सब्जी और चावल ही परोसे जा रहे हैं. तली हुई चीजें और चाइनीज फूड को मेन्यू से बाहर कर दिया गया है. कुछ होटलों में तो चाय भी इंडक्शन चूल्हों पर बनाई जा रही है. पर्यटन निगम के होटल होलीडे होम में लकड़ी पर खाना पकाया जा रहा है.

अप्रैल से जून तक रहता है पर्यटन का पीक सीजन
आपको बता दें कि अप्रैल से जून तक शिमला में पर्यटन का पीक सीजन रहता है, जब हजारों की संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं. सामान्य दिनों में शिमला में 3 हजार से 6 हजार कमर्शियल सिलेंडरों की मांग रहती है, जो सीजन में बढ़कर 7 से 8 हजार तक पहुंच जाती है. ऐसे में गैस संकट का सीधा असर पर्यटन कारोबार पर पड़ने की आशंका है. ट्रैवल एजेंट्स के पास लगातार फोन आ रहे हैं और पर्यटक पूछ रहे हैं कि शिमला में भोजन की व्यवस्था सुचारु है या नहीं.

इंडक्शन और बिजली के उपकरणों की बढ़ी मांग
जब गैस के चूल्हों ने जवाब दे दिया, तो व्यापारियों ने वैकल्पिक रास्तों की तलाश शुरू कर दी है. शिमला के बाजारों में इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक कुकिंग उपकरणों की मांग में अचानक भारी उछाल आया है. ढाबा संचालक अब चाय और नाश्ता बनाने के लिए बिजली के उपकरणों का सहारा ले रहे हैं. हालांकि, भारी खाना बनाने के लिए ये विकल्प भी नाकाफी साबित हो रहे हैं. ‘शिमला होटल एंड टूरिज्म स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन’ ने सरकार से गुहार लगाई है कि यदि जल्द ही सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो समर सीजन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा.

विधानसभा में गूंजी गूंज: क्या बोले मुख्यमंत्री?
यह मामला हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में भी प्रमुखता से उठा. विपक्ष और कुछ सत्ता पक्ष के विधायकों ने गैस आपूर्ति बाधित होने पर चिंता जताई. लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा ने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी दूसरा सिलेंडर बुक करने की समय सीमा में ढील दी जाए. मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में बयान दिया. सीएम सुक्खू ने कहा, प्रदेश में घरेलू गैस की कोई किल्लत नहीं है, समस्या केवल कमर्शियल सप्लाई में आई है. प्रदेश में पेट्रोल और डीजल का करीब 15 दिनों का स्टॉक सुरक्षित है. मुख्य सचिव स्वयं हर रोज एलपीजी सप्लाई की समीक्षा कर रहे हैं. राज्य सरकार केंद्र सरकार और तेल कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि आपूर्ति को तुरंत बहाल किया जा सके.

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