
आज के दौर में जहां लोग एआई (AI) को सिर्फ होमवर्क या ऑफिस के काम के लिए इस्तेमाल करते हैं, वहीं एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मेडिकल साइंस की दुनिया में खलबली मचा दी है. सोचिए, एक ऐसी बीमारी जो पिछले 25-30 सालों से शरीर को अंदर ही अंदर खोखला कर रही थी और बड़े-बड़े विशेषज्ञ उसे पकड़ नहीं पा रहे थे. उस बीमारी का राज एक एआई चैटबॉट ने चंद मिनटों की बातचीत में खोल दिया. रेडिट (Reddit) पर शेयर की गई यह कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं लगती, जहां मशीनी दिमाग ने वह बात पकड़ ली जिसे इंसानी आंखें सालों से नजरअंदाज कर रही थीं.
क्या 25 सालों का दर्द और…
दरअसल, यह कहानी देश के 62 साल के बुजुर्ग की है. वो पिछले ढाई दशक से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थे. जिन्हें किडनी फेलियर (हफ्ते में 3 बार डायलिसिस), डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और 6 साल पहले स्ट्रोक जैसी बीमारियां थीं. लेकिन सबसे अजीब था उनका सिरदर्द (माइग्रेन), जो सिर्फ रात में सोते समय यानी लेटते ही शुरू होता था. उनके भतीजे ने रेडिट पर बताया कि नेफ्रोलॉजिस्ट और न्यूरोलॉजिस्ट जैसे कई स्पेशलिस्ट्स से सलाह ली गई, एमआरआई (MRI) और खून की कई जांचें हुईं, लेकिन किसी को समझ नहीं आया कि आखिर यह सिरदर्द केवल लेटते ही क्यों होता है.
क्या एआई ने कर दिया कमाल?
थक-हारकर मरीज के भतीजे ने सारी रिपोर्ट्स और लक्षणों को क्लाउड (Claude AI) नाम के एआई टूल के सामने रख दिया. कई दिनों तक चली बातचीत के बाद, एआई ने उन डॉट्स को कनेक्ट किया जिन्हें विशेषज्ञ अलग-अलग देख रहे थे. एआई ने पहचाना कि सिरदर्द का सीधा संबंध ‘लेटने’ की स्थिति से है. एआई ने पुरानी रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि करीब 40-57 प्रतिशत डायलिसिस मरीजों को ‘स्लीप एपनिया’ (नींद में सांस रुकना) की समस्या होती है, जिसे अक्सर डॉक्टर भूल जाते हैं. एआई ने मरीज की पुरानी एमआरआई रिपोर्ट में भी उन संकेतों को पकड़ा जिन पर पहले ध्यान नहीं दिया गया था.
एआई के विश्लेषण के दौरान एक बेहद साधारण लेकिन निर्णायक सवाल सामने आया. “क्या मरीज खर्राटे लेते हैं?” भतीजे ने बताया कि उनके चाचा पिछले 25-30 सालों से बहुत तेज खर्राटे लेते थे और दिन में भी बहुत सोते थे, जिसे परिवार ने बुढ़ापे या डायलिसिस की थकान मानकर सामान्य मान लिया था. एआई की सलाह पर परिवार ने ‘स्लीप स्टडी’ करवाई और नतीजा चौंकाने वाला था. उन्हें ‘स्लीप एपनिया’ डायग्नोस हुआ और जैसे ही उन्हें CPAP मशीन पर रखा गया, 25 साल पुराना सिरदर्द अगले ही दिन गायब हो गया. यह वाकई हैरान करने वाला था कि इलाज इतना सीधा था.
क्या एआई भविष्य में डॉक्टरों की जगह ले लेगा
इस वायरल पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक डॉक्टर ने स्वीकार किया कि मेडिकल प्रैक्टिस में अक्सर मरीजों से खर्राटों के बारे में पूछना छूट जाता है. हालांकि, मरीज के भतीजे ने साफ किया कि एआई ने डॉक्टरों की जगह नहीं ली, बल्कि उसने नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और पल्मोनोलॉजी जैसे अलग-अलग विभागों के बीच की कड़ियों को जोड़ दिया, जो कोई एक स्पेशलिस्ट नहीं कर पा रहा था. सोशल मीडिया पर लोग इस बात से दंग हैं कि कैसे एक पुरानी बीमारी ‘नॉर्मल’ मान लिए गए लक्षणों के पीछे छिपी रहती है. यह घटना साबित करती है कि सही डेटा और एआई की मदद से नामुमकिन दिखने वाले इलाज भी संभव हैं.





