
Rupee vs Dollar : शुक्रवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.7 के पार फिसल गया था. ये अब तक का इसका सबसे कमजोर लेवल है. ये आंकड़ा भले ही बहुत बड़ा न लगे. लेकिन ये उन दबावों को दिखाता है जो पिछले कई हफ्तों से बन रहे थे और अब इसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया है. रुपया अब चुपचाप अर्थव्यवस्था में बढ़ते तनाव का एक अहम संकेतक बन गया है.
तेल की कीमतें बनीं सबसे बड़ी वजह
इस समय सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं. पश्चिम एशिया में तनाव के चलते तेल की कीमतें फिर से बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई हैं. वहीं, भारत का क्रूड बास्केट करीब 157 डॉलर तक पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का 85-90% तेल आयात करता है. इसलिए ये बढ़ोतरी सीधे अर्थव्यवस्था पर असर डालती है.
महंगा तेल बढ़ा रहा रुपये पर दबाव
तेल महंगा होने का मतलब है कि भारत को समान आयात के लिए ज्यादा डॉलर चुकाने पड़ते हैं. इससे रुपये पर दबाव बढ़ता है. इसके साथ ही वैश्विक निवेश भी भारत से बाहर जा रहा है.
विदेशी निवेशकों की निकासी
रॉयटर्स के अनुमान के मुताबिक, हाल के हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग 9.5 अरब डॉलर निकाल लिए हैं. अनिश्चित माहौल में निवेशक सुरक्षित बाजारों जैसे अमेरिका की ओर रुख करते हैं. जब निवेशक बाहर निकलते हैं, तो वे भारतीय संपत्तियां बेचकर रुपये को डॉलर में बदलते हैं. इससे रुपये पर और दबाव पड़ता है.
मजबूत डॉलर भी बना कारण
अमेरिकी डॉलर भी मजबूत हुआ है. इसके हाई बॉन्ड यील्ड और सुरक्षित निवेश की डिमांड का समर्थन मिला है. इससे रुपये जैसी करेंसी के लिए स्थिर रहना और मुश्किल हो जाता है.
समय के साथ गिरावट हुई तेज
अगर पिछले कुछ वर्षों को देखें तो गिरावट और साफ नजर आती है. 2022 की शुरुआत में रुपया लगभग 74 प्रति डॉलर था. ये अब 95 के करीब पहुंच गया है. यानी चार साल में करीब 20 रुपये की गिरावट देखने को मिली है. पिछले एक साल में ही रुपये की वैल्यू 10% से ज्यादा गिर चुकी है. कुछ अनुमानों के मुताबिक, अगर दबाव जारी रहा तो रुपया 98 तक भी जा सकता है.
भारत की अर्थव्यवस्था पर असर
रुपये की कमजोरी का असर सिर्फ एक्सचेंज रेट तक सीमित नहीं है. भारत का आयात बिल FY27 में बढ़कर लगभग 911 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है. ये पहले करीब 814 अरब डॉलर था. वहीं, चालू खाता घाटा GDP के 2.6% तक बढ़ने का अनुमान है. इसका मतलब है कि देश से ज्यादा डॉलर बाहर जा रहे हैं. ये रुपये पर और दबाव डालता है.
आम आदमी पर क्या असर होगा?
कमजोर रुपया आयात को महंगा बना देता है. इसमें तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद और अन्य जरूरी चीजें शामिल हैं. इसका असर धीरे-धीरे दिखता है. ईंधन महंगा होता है. परिवहन लागत बढ़ती है. खाने-पीने की चीजें भी महंगी हो जाती हैं विदेश में पढ़ने वाले स्टूडेंट को ज्यादा रकम चुकानी होती है.





