Tuesday, February 24, 2026
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बिहार में एनडीए का सुपर, स्ट्राइक रामनाथ ठाकुर की वापसी तय पांचों राज्‍यसभा सीटें कब्जे में

बिहार में एनडीए का सुपर, स्ट्राइक रामनाथ ठाकुर की वापसी तय पांचों राज्‍यसभा सीटें कब्जे में

पटना: जेडीयू नेता रामनाथ ठाकुर। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) एनडीए बिहार से फिर से रामनाथ ठाकुर को राज्‍यसभा उम्मीदवार बनाने की तैयारी में है। यह निर्णय खासकर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एनडीए 16 मार्च को होने वाले चुनावों में सभी पांच सीटों पर कब्जा करने की स्थिति में दिख रही है, वहीं विपक्ष बंटा हुआ है और कोई मजबूत साझा उम्मीदवार सामने नहीं आ रहा है।

रामनाथ ठाकुर, जो पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं, को फिर से नामित करने का मुख्य कारण उनकी अति पिछड़ा वर्ग (EBC) से जुड़ी मजबूत पैठ और उनके पिता की विरासत का राजनीतिक महत्व बताया जा रहा है। ठाकुर की अगली राज्‍यसभा अवधि शुरू होने वाली है, जबकि उनकी वर्तमान अवधि 9 अप्रैल, 2026 को समाप्त हो रही है। इसी तारीख को जेडीयू के डिप्टी चेयरमैन हरिवंश नारायण सिंह, राष्ट्रीय जनता दल के प्रेमचंद गुप्ता और अमरेंद्र धारी सिंह तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा की राज्‍यसभा सदस्यता भी खत्म हो रही है।

गठबंधन के पास 4 सीटों पर पक्का दावा

बिहार विधानसभा में कुल 243 सदस्य हैं, जिसमें NDA के पास 202 विधायक हैं। इससे गठबंधन को चार सीटों पर पक्का दावा है—दो बीजेपी और दो जेडीयू के। राज्‍यसभा में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 वोट चाहिए। अगर विपक्ष अपना कोई उम्मीदवार खड़ा भी करता है, तब भी NDA को केवल तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ेगी ताकि पांचवीं सीट भी सुरक्षित हो जाए।

वहीं, आरजेडी-नेतृत्व वाले महागठबंधन में 35 विधायक हैं। एआईएमआईएम के पांच और बीएसपी का एक विधायक भी शामिल है। संयुक्त उम्मीदवार पर सहमति बनना मुश्किल लगता है। आरजेडी के एक नेता ने कहा, “आदर्श रूप से हमें पांचवीं सीट पर चुनाव लड़ना चाहिए, लेकिन एआईएमआईएम हमारे साथ नहीं आएगा। कांग्रेस के साथ हमारे संबंध भी खास मजबूत नहीं हैं। देखना होगा कि विपक्ष एकजुट हो पाता है या नहीं। अन्यथा एनडीए के लिए यह आसान मामला है।”

जेडीयू की योजना है कि रामनाथ ठाकुर को बनाए रखा जाए, लेकिन उनके डिप्टी चेयरमैन हरिवंश को नामांकित नहीं किया जाएगा, क्योंकि उन्होंने पहले ही लगातार दो कार्यकाल पूरे कर लिए हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, “अब तक केवल महेंद्र प्रसाद, शरद यादव और वशिष्ठ नारायण सिंह ने दो से अधिक कार्यकाल निभाए हैं। ठाकुर के पिता की विरासत के चलते इस सूची में शामिल हो सकते हैं।” इसके अलावा जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व नौकरशाह मनीष वर्मा को दूसरे उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।

बीजेपी भी कई संभावित नामों पर विचार कर रही है। इसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और पूर्व सांसद रमा देवी शामिल हैं। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि संभवत: एक सामान्य वर्ग और एक ओबीसी/ईबीसी/एससी उम्मीदवार के मिलने की संभावना है। अन्य चर्चित नामों में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव, बिहार क्रिकेट संघ के कार्यकारी राकेश तिवारी और रितुराज सिन्हा शामिल हैं।

सबसे दिलचस्प मामला राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख उपेन्द्र कुशवाहा का है। वह अपने बेटे दीपक प्रकाश के लिए विधान परिषद का पद चाहते हैं, जिनका इस साल मई तक एमएलसी बनना जरूरी है। बीजेपी और उसके जूनियर सहयोगियों को मिलकर पांचवीं सीट का फैसला करना होगा। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास पासवान) ने दावा वापस ले लिया है, जिससे कुशवाहा को मोलभाव करने का अवसर मिल सकता है, हालांकि उनके चार में से तीन विधायक असहमति जता चुके हैं।

अभी तक कुशवाहा को फायदा यह है कि अन्य एनडीए सहयोगी—लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास पासवान) और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर)—पांचवीं सीट का दावा नहीं कर रहे हैं। ये छोटी पार्टियां अब विधान परिषद की 75 सीटों में से रिक्तियों के लिए मोलभाव कर रही हैं। इस स्थिति में एनडीए की पकड़ मजबूत है और रामनाथ ठाकुर की वापसी तय नजर आ रही है, जबकि विपक्ष के लिए चुनौती बड़ी बनी हुई है।

दस राज्यों में राज्यसभा की 37 सीट के लिए द्विवार्षिक चुनाव 16 मार्च को होंगे। निर्वाचन आयोग ने बुधवार को यह जानकारी दी। ये सीट महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और बिहार में अप्रैल में अलग-अलग तिथियों में खाली हो रहीं हैं। आयोग से जारी चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक नोटिफिकेशन की तिथि 26 फरवरी 2026 है। मतदान 16 मार्च 2026 को होगा। मतों की गिनती भी उसी दिन शाम पांच बजे से कराई जाएगी।

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