
India Growth Forecast: ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने देश की 2026 वाली ग्रोथ रेट का अनुमान काफी घटा दिया है. ईरान वॉर और तेल की बढ़ती कीमत के कारण अब बैंक का मानना है कि देश की इकोनॉमी 2026 में महज 5.9 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी. इजरायल और ईरान जंग से पहले ग्रोथ रेट को लेकर अनुमान 7 प्रतिशत था. गोल्डमैन सैक्स की तरफ से मंगलवार को जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया कि 13 मार्च को भी उसने अनुमान को 6.5 प्रतिशत किया था. लेकिन अब तेल की सप्लाई में रुकावट और दाम के नए अनुमान के बाद ग्रोथ रेट नीचे आ गई है.
ईरान वॉर के चलते होर्मुज स्ट्रेट में तेल सप्लाई लगभग बंद होने जैसी स्थिति अप्रैल के मिड तक रह सकती है. बैंक ने अनुमान जताया कि मार्च में ब्रेंट क्रूड तेल के एवरेज दाम 105 डॉलर प्रति बैरल रहेगी, अप्रैल में यह 115 डॉलर तक पहुंच सकती है. हालांकि, बाद में इसमें सुधार देखा जाएगा और साल के अंत तक दाम गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल तक आ सकते हैं. आपको बता दें भारत की तरफ से अपनी जरूरी का करीअब 85 प्रतिशत तेल आयात किया जाता है. ऐसे में भारत के लिए महंगे तेल पर खर्च किया जाना विदेशी मुद्रा, महंगाई और सरकारी खर्च पर बड़ा खतरा है.
RBI को ब्याज दर बढ़ानी पड़ सकती है
गोल्डमैन सैक्स की तरफ से यह भी कहा गया कि 2026 के लिए देश की महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत कर दिया गया है. पहले यही 4 प्रतिशत से नीचे 3.9 प्रतिशत पर था. हालांकि महंगाई दर का आंकड़ा आरबीआई (RBI) के 2 से 6 प्रतिशत के दायरे में रहेगा. लेकिन रुपये के कमजोर होने से महंगाई दर बढ़ सकती है. इसलिए बैंक की तरफ से चेतावनी दी गई है कि आरबीआई (RBI) को रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट (0.5 प्रतिशत) की बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है.
रुपया में लगातार गिरावट
साल 2026 में अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 4 प्रतिशत गिर चुका है. पिछले साल यह 4.7 प्रतिशत कमजोर हुआ था. बैंक का कहना है कि रुपये के दबाव से रिटेल प्राइस पर विदेशी मुद्रा का असर काफी ज्यादा होगा. रिपोर्ट में कहा गया कि साल 2026 में भारत का चालू खाता घाटा GDP का 2 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. दिसंबर 2025 तिमाही में यह 1.3 प्रतिशत था.





