
Nitish Kumar Jdu President : जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष पद के चुनाव में अब मुकाबला पूरी तरह खत्म हो चुका है. वैसे भी जेडीयू में नीतीश कुमार से मुकाबले जैसी कोई बात नहीं थी. जो संगठन की मजबूती और नीतीश कुमार की जेडीयू पर पकड़ को दर्शता है. अब नामांकन वापस लेने की अंतिम समय-सीमा भी खत्म हो गई है. इस सीमा के खत्म होते ही साफ हो गया कि अब नीतीश कुमार जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे.
निर्विरोध अध्यक्ष बनना तय
मंगलवार, 24 मार्च को सुबह 11 बजे तक नामांकन वापस लेने का समय था. ऐसे में चुनाव अधिकारी के पास केवल नीतीश कुमार का नामांकन ही है. अब उनका निर्विरोध अध्यक्ष बनना तय हो गया है. अब दोपहर 2:30 बजे चुनाव अधिकारी Ajit Prasad Hegde आधिकारिक रूप से नीतीश कुमार को निर्वाचित घोषित करेंगे. और उन्हें प्रमाण पत्र सौंपेंगे.
निर्विरोध अध्यक्ष बनना तय
मिली जानकारी के मुताबिक इस मौके पर पार्टी के तमाम बड़े नेता और नीतीश कुमार के करीबी मौजूद रहेंगे. इनमें कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा में संसदीय दल के नेता Sanjay Kumar Jha, केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh, बिहार सरकार के मंत्री Shravan Kumar सहित अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे.
क्या हैं राजनीतिक मायने, क्यों है ये फैसला खास?
नीतीश कुमार का निर्विरोध अध्यक्ष बनना महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके कई गहरे राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा भले ही नीतीश कुमार बिहार की राजनीति से अलग हो रहे हैं. मगर उनकी पूरी पकड़ अपनी पार्टी और बिहार की राजनीति पर बनी रहेगी.
पार्टी पर मजबूत पकड़ : नीतीश कुमार के कार्यकाल के लगभग 20 सालों के बाद भी JDU में अभी तक कोई ऐसा नेता नहीं दिखता जो नीतीश कुमार के बराबर हो या संगठन में उन्हें चुनौती दे सकें.
नीतीश की रणनीति और जेडीयू का भविष्य
माना जा रहा है कि नीतीश कुमार आने वाले चुनावों को देखते हुए संगठन और सरकार दोनों पर अपनी पकड़ और मजबूत करेंगे. उनके सामने पार्टी के लिए नया नेतृत्व और बीजेपी की अगले कदम दोनों की तैयारी करना है.
विरासत की चर्चा पर विराम?: हाल के दिनों में पार्टी में नए नेतृत्व को लेकर जो अटकलें थीं, उन पर नीतीश कुमार ने फिलहाल विराम लगा दिया है. निशांत अब उनकी विरासत संभालने कोशिश करते नजर आ रहे है. बावजूद उन पर वंशवाद का आरोप नहीं लगा है. गौर करने वाली बात ये है कि निशांत की मांग पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से ही उठी है.
एनडीए और विपक्ष को संदेश : यह फैसला सहयोगियों और विपक्ष दोनों के लिए एक साफ संदेश भी है. इससे यह स्पष्ट है कि JDU में अंतिम फैसला नीतीश कुमार का ही चलेगा. भले ही नीतीश कुमार राज्यसभा जा रहे हों. मगर पार्टी के लिए अंतिम फैसला नीतीश कुमार का होगा.





