
नईदुनिया प्रतिनिधि, महासमुंद। जिले के खल्लारी माता मंदिर क्षेत्र में रविवार को हुए दर्दनाक रोप-वे हादसे की प्रारंभिक जांच ने सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है। केबल टूटने से हुए इस हादसे में रायपुर की एक महिला की मौत और 16 लोगों के घायल होने के बाद प्रशासन अब हरकत में आया है। पुलिस ने इस मामले में दो कर्मचारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कर ली है।
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि जिस ‘रोप-वे एंड रिसार्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ (कोलकाता) को इसका जिम्मा सौंपा गया था, उसे बिहार सरकार पहले ही ब्लैक लिस्टेड कर चुकी है। नियमित परीक्षण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस बड़े हादसे का मुख्य कारण मानी जा रही है।
जांच दल ने खंगाले दस्तावेज, तकनीकी खामियां आईं सामने
हादसे के अगले दिन सोमवार को लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने मौका मुआयना किया। कार्यपालन अभियंता चंद्रशेखर चंद्राकर, एसडीएम नमिता मारकोले और ईएंडएम विभाग के एसडीओ सहित अन्य अधिकारियों ने रोपवे की संरचना, केबल की स्थिति और सुरक्षा उपकरणों की बारीकी से जांच की।
जांच के दौरान कंपनी के इंजीनियर अमित पाइक से तकनीकी पहलुओं और सुरक्षा आडिट के संबंध में जानकारी ली गई। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक तौर पर नियमित रखरखाव और तकनीकी परीक्षण में बड़ी लापरवाही के संकेत मिले हैं। विभाग ने कंपनी से सभी आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण पत्र तलब किए हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
बिहार में काली सूची में है कंपनी, डोंगरगढ़ में भी हुए थे हादसे
हादसे की जांच में कंपनी का विवादित इतिहास भी सामने आया है। रोहतास (बिहार) में 26 दिसंबर 2025 को हुए एक हादसे के बाद बिहार सरकार ने इस कंपनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया था। इतना ही नहीं, राजनांदगांव के डोंगरगढ़ में भी जब यह कंपनी कार्यरत थी, तब 2016 और 2021 में हुए हादसों में दो लोगों की जान गई थी।
इसके बावजूद खल्लारी मंदिर ट्रस्ट ने इस कंपनी के साथ 30 वर्षों का लंबा अनुबंध किया है। समझौते के तहत कंपनी संचालन और प्रबंधन संभालती है, जबकि मंदिर समिति को प्रत्येक टिकट की बिक्री पर महज पांच प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होता है।
राजनीतिक दखल और प्रशासनिक अनदेखी
ट्रस्ट कमेटी के अनुसार, साल 2021 में क्षेत्रीय विधायक द्वारिकाधीश यादव की पहल पर इस कंपनी को खल्लारी लाया गया था। विधायक ने स्वीकार किया कि उन्होंने डोंगरगढ़ मंदिर समिति से संपर्क कर इस कंपनी को यहां काम दिलाया था और बिजली सहित बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई थीं।
हालांकि, अब हादसे के बाद उन्होंने जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है। दूसरी ओर, जिला प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मार्च 2024 से रोप-वे संचालित होने के बावजूद किसी भी सरकारी विभाग को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई थी। मंदिर ट्रस्ट में पदेन सदस्य के रूप में शामिल तहसीलदारों ने भी सुरक्षा ऑडिट को लेकर कभी कोई ठोस पहल नहीं की।
टिकट की कमाई से ही कर्मचारियों का वेतन
खल्लारी रोप-वे में तैनात छह कर्मचारियों की स्थिति भी हैरान करने वाली है। कंपनी उन्हें सीधे वेतन नहीं देती और न ही उनका ईपीएफ काटा जाता है। कर्मचारियों ने बताया कि टिकट काउंटर से होने वाली दैनिक कमाई से ही वे अपना वेतन काटते हैं और शेष राशि कंपनी के खाते में जमा की जाती है।
इंचार्ज बीरबल जंघेल (65 वर्ष) सहित अधिकांश कर्मचारी डोंगरगढ़ के निवासी हैं, जो पहले भी इसी कंपनी के साथ काम कर चुके हैं।
बीमा क्लेम से हर्जाने का भरोसा
कंपनी के इंजीनियर अमित पाइक ने बताया कि रोपवे का बीमा कराया गया है। दुर्घटना में हताहत हुए लोगों और घायलों के परिजनों को बीमा कंपनी के माध्यम से हर्जाना दिलाया जाएगा। फिलहाल प्रशासन ने रोपवे सेवा को पूरी तरह बंद कर दिया है, जिससे दर्शनार्थियों में भी भय का माहौल व्याप्त है।
स्थानीय लोगों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त सुरक्षा प्रोटोकाल और नियमित तकनीकी जांच की मांग की है।





