
हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल महंगे हो सकते हैं। राज्य विधानसभा ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश वैट (संशोधन) विधेयक 2026 पास कर दिया, जिससे सरकार को पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल पर अधिकतम ₹5 प्रति लीटर तक सेस लगाने का अधिकार मिल गया है। हालांकि, यह बिल विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच पारित हुआ। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि ₹5 अधिकतम सीमा है और सरकार अपनी जरूरत के हिसाब से कम दर भी तय कर सकती है। यानी फिलहाल यह तय नहीं है कि पूरा ₹5 ही लगाया जाएगा।
आज के पेट्रोल-डीजल के दाम
24 मार्च को देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, जबकि सोमवार को 11% की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया, क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्र्ंप ने ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमला करने की धमकी को पांच दिनों के लिए टाल दिया। ट्रंप ने ईरान से बातचीत का दावा किया, जबकि ईरान ने बातचीत होने से इनकार किया। दूसरी ओर इजरायल ने हमले जारी रखे। इस अपडेट के बाद अमेरिकी क्रूड बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट लगभग 4% चढ़ गया।
देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल और डीजल के दाम
दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67
मुंबई: पेट्रोल ₹103.49 | डीजल ₹90.03
चेन्नई: पेट्रोल ₹100.80 | डीजल ₹92.39
कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45 | डीजल ₹92.02
बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.90 | डीजल ~₹88-90
नोएडा: पेट्रोल ₹95.51 | डीजल ₹87.01
लखनऊ: पेट्रोल ₹95.28 | डीजल ₹86.80
जयपुर: पेट्रोल ₹107.06 | डीजल ₹90.70
अधिकांश महानगरों में पेट्रोल ₹100 प्रति लीटर से ऊपर बना हुआ है, जबकि डीजल अभी भी ₹100 से नीचे है।
क्यों नहीं बदल रहे दाम, जबकि कच्चा तेल महंगा है?
पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल के रेट स्थिर हैं। इसका कारण यह है कि कंपनियां वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद तुरंत कीमतों में बदलाव नहीं करतीं, बल्कि कुछ समय तक स्थिति को देखती हैं।
पेट्रोल-डीजल के दाम किन चीजों पर निर्भर करते हैं?
भारत में ईंधन की कीमतें कई कारकों से प्रभावित होती हैं। सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों का होता है, क्योंकि यही पेट्रोल और डीजल बनाने का मुख्य कच्चा माल है। इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी अहम होती है। अगर रुपया कमजोर होता है, तो तेल आयात महंगा पड़ता है और इसका असर कीमतों पर दिखता है।
इसके साथ ही केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। अलग-अलग राज्यों में वैट (VAT) और अन्य टैक्स अलग होने के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। इसके अलावा ट्रांसपोर्ट लागत और डिमांड और सप्लाई की स्थिति भी अंतिम कीमत तय करती है।
आगे क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
हिमाचल प्रदेश में सेस लगाने के फैसले के बाद यह संकेत मिल रहा है कि राज्यों द्वारा टैक्स बढ़ाने से आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं। अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ना तय है।





