
गुरुग्राम: हरियाणा में अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम के तहत फ्लैट्स की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में नई दरों पर मुहर सकती है। गुरुग्राम व फरीदाबाद जैसे मेट्रो सिटी में फ्लैट की कीमत में 3 से 4 लाख रुपये तक बढ़ोतरी संभव है। जमीन की बढ़ती कीमतों व निर्माण लागत में बढ़ोतरी के चलते सरकार नई दरों पर विचार कर रही है।
जमीन की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते बड़ी संख्या में बिल्डर गुरुग्राम व फरीदाबाद जैसे शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम से मुंह मोड़ चुके हैं। इसका मुख्य कारण लगातार बढ़ती भूमि कीमतें, निर्माण सामग्री और श्रम लागत है, जिसने योजना को आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण बना दिया है। इस कदम के बाद शहरों में अफोर्डेबल फ्लैट्स की कीमतों में वृद्धि होगी, लेकिन बिल्डर्स के लिए यह योजना में निवेश करना आसान बनाएगा।
यहां बता दें कि अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम की शुरूआत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के समय हुई थी। योजना का उद्देश्य मध्यम वर्ग के परिवारों को किफायती फ्लैट्स उपलब्ध कराना था। मल्टी-स्टोरी फ्लैट्स के निर्माण के लिए पांच एकड़ तक की भूमि पर मंजूरी दी गई थी। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने इसे जारी रखा। अब मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार इसे आगे बढ़ा रही है।
वर्तमान दरें (2021 और 2023 नीति अनुसार)
गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला : 5,000 प्रति वर्ग फुट
अन्य हाई और मीडियम पोटेंशियल टाउन: 4,500 प्रति वर्ग फुट
लो पोटेंशियल टाउन: 3,800 प्रति वर्ग फुट
प्रस्तावित नई दरें:
गुरुग्राम: 5,575
फरीदाबाद: 5,450
अन्य हाई और मीडियम पोटेंशियल टाउन: 5,050
लो पोटेंशियल टाउन: 4,250
सरकार यह बदलाव भूमि, निर्माण सामग्री और श्रम लागत में बढ़ोतरी के मद्देनजर कर सकती है।
बढ़ती लागत और बिल्डर्स की चुनौती
गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में जमीन की बढ़ती कीमतों और निर्माण खर्च के कारण बिल्डर्स ने अफोर्डेबल हाउसिंग योजना में रुचि कम कर दी थी। नई दरों के साथ योजना को वास्तविकता के करीब लाने का प्रयास है ताकि मध्यम वर्ग के लोग भी फ्लैट खरीद सकें और बिल्डर्स निवेश करें। गुरुग्राम में आर-जोन में एक एकड़ की कीमत 40 करोड़ को भी क्रॉस कर चुकी है।
अफोर्डेबल फ्लैट्स पर असर
बढ़ी हुई दरें फ्लैट्स की कीमतों में इजाफा करेंगी। सरकार का लक्ष्य मध्यम वर्ग के लिए किफायती आवास सुनिश्चित करना है। बिल्डर्स को अब लागत के अनुसार योजना में भागीदारी आसान होगी। माना जा रहा है कि वास्तविक लागत के अनुरूप दरें बढ़ने से योजना को और भी आगे बढ़ाया जा सकेगा। ऐसे में कह सकते हैं कि अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम अब एक नए चरण में प्रवेश कर रही है। दरों में संशोधन बिल्डर्स को योजना में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगा और मध्यम वर्ग के परिवारों को घर खरीदने का अवसर भी उपलब्ध रहेगा।
संस्थागत साइट्स पर 350 प्रतिशत तक हो सकता एफएआर
हरियाणा सरकार ट्रांजिट ओरंटिड डेवलेपमेंट (टीओडी) पॉलिसी में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इस पॉलिसी के तहत एफएआर (फ्लोर एरिया रेसो) में बढ़ोतरी संभव है। अभी तक टीओडी जोन में संस्थागत साइट्स के लिए 100 से 150 प्रतिशत तक एफएआर है। अब इसे बढ़ाकर 250% से 350% तक करने का प्रस्ताव है। सरल भाषा में कहें तो पहले 1,000 वर्ग मीटर जमीन पर 1,500 वर्ग मीटर तक भवन बन सकता था। अब उसी जमीन पर 2,500 से 3,500 वर्ग मीटर तक भवन बनाया जा सकेगा। यह बढ़ी हुई क्षमता सिर्फ संस्थागत साइट्स पर लागू होगी।
संस्थागत मंजूरी का मतलब
संस्थागत साइट्स का अर्थ है स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, ऑफिस, सरकारी संस्थान। घर, दुकान या मॉल जैसी वाणिज्यिक निर्माण गतिविधियों के लिए एफएआर बढ़ोतरी लागू नहीं होगी। इसका मतलब यह है कि मेट्रो या रेलवे स्टेशन के पास अब सिर्फ संस्थानिक उपयोग वाली जगह पर ज्यादा निर्माण संभव होगा। मौजूदा भवनों में बदलाव के लिए स्ट्रक्चर सेफ्टी सर्टिफिकेट जरूरी होगा। ग्राउंड कवरेज 40% तक ही सीमित रहेगा। न्यूनतम साइट का आकार 1 एकड़ होना चाहिए।
हरियाणा में मिक्स्ड लैंड यूज नीति में होगा बड़ा बदलाव
हरियाणा सरकार ने अपने विकास योजनाओं में मिक्स्ड लैंड यूज क्षेत्रों के लिए नीति में बदलाव संभव है। मिक्स्ड लैंड यूज का मतलब है कि किसी क्षेत्र में आवासीय), वाणिज्यिक और संस्थागत उपयोग एक साथ हो। पहले इस नीति में स्पष्ट अनुपात नहीं होने की वजह से नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिलने में देरी होती थी। प्रस्तावित नई नीति में अब सटीक एफएआर (फ्लोर एरिया रेशो) और ग्राउंड कवरेज तय किए जाएंगे।
प्रस्तावित नीति में हैं ये प्रस्ताव
रिहायशी + वाणिज्यिक : न्यूनतम 4 एकड़, एफएआर 1.75, ग्राउंड कवरेज 60%
वाणिज्यिक + रिहायशी : 2 एकड़, एफएआर 1.75, ग्राउंड कवरेज 60%
संस्थागत + रिहायशी: 5 एकड़, एफएआर 1.5, ग्राउंड कवरेज 40%
संस्थागत + वाणिज्यिक: 2 एकड़, एफएआर 1.5, ग्राउंड कवरेज 40%
इस बदलाव का उद्देश्य है कि आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्रों का संतुलन बना रहे और संस्थागत परियोजनाओं के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित हो। ग्राउंड कवरेज सीमित करने से अत्यधिक निर्माण और भीड़भाड़ से बचाव होगा। कहा जा रहा है कि ये बदलाव लागू होने के बाद नए प्रोजेक्ट्स की मंजूरी प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होगी।





