
करनाल। प्रॉपर्टी बाजार एक बार फिर हलचल की ओर बढ़ रहा है। प्रशासन की ओर से एक अप्रैल से कलेक्टर रेट में बढ़ोतरी की तैयारी की जा रही है। इससे ज़मीन और मकानों की रजिस्ट्री महंगी होना तय माना जा रहा है। यह संकेत मिल रहे हैं कि इस बार बढ़ोतरी सीमित दायरे में रखी जाएगी।
इस बार पांच से 10 प्रतिशत तक कलेक्टर रेट में बढ़ोत्तरी की संभावना जाहिर की जा रही है। दरअसल कलेक्टर रेट वह न्यूनतम दर होती है, जिस पर किसी संपत्ति की रजिस्ट्री की जाती है। जैसे ही इसमें वृद्धि होती है, रजिस्ट्री शुल्क अपने आप बढ़ जाता है। हर बार कलेक्टर रेट बढ़ने के साथ ही प्रॉपर्टी बाजार में हलचल तेज हो जाती है। पिछले साल कलेक्टर रेट में 20 से 50 प्रतिशत से ज्यादा तक की बढ़ोत्तरी हुई थी। लोगों ने अपनी आपत्ति भी दर्ज करवाई थी। इसके चलते संशोधित कलेक्टर रेट की लिस्ट भी जारी की गई थी।
इस बार प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर स्थिति उतनी तेज नहीं मानी जा रही, लेकिन पिछले वर्ष की वृद्धि का असर अभी तक पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। 2025 में कलेक्टर रेट में लागू की गई वृद्धि ने जिले के प्रॉपर्टी बाजार की तस्वीर ही बदल दी थी। कई इलाकों में अचानक रेट बढ़ने से रजिस्ट्री करवाना महंगा हो गया था और खरीदारों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ा था। पिछले साल की वृद्धि में शहर के प्रमुख और विकसित सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए थे। इन क्षेत्रों में रेट में तेज उछाल देखने को मिला, जिससे यहां संपत्ति खरीदना आम आदमी की पहुंच से बाहर होता नजर आया।
राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास के क्षेत्रों में भी ज़मीन के दाम तेजी से बढ़े थे, क्योंकि इन इलाकों को निवेश के लिहाज से बेहतर माना जाता है। डीड राइटर दिनेश बंसल का कहना है कि संभावित यह माना जा रहा है कि पांच से 10 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी होगी। इससे ज्यादा बढ़ोत्तरी की संभावना नजर नहीं आ रही है। हालांकि पिछले साल इससे कहीं ज्यादा बढ़ोत्तरी हुई थी।
50 से भी ज्यादा बढ़ गए थे कलेक्टर रेट
कमर्शियल क्षेत्रों में तो स्थिति और भी अलग रही। प्रमुख बाजारों और व्यावसायिक सड़कों पर कलेक्टर रेट में भारी वृद्धि दर्ज की गई थी। शहर के बाहरी हिस्सों में विकसित हो रही कालोनियों और आसपास के गांवों में भी कलेक्टर रेट में उल्लेखनीय बढ़ोत्तरी हुई थी। इन क्षेत्रों में पहले जहां अपेक्षाकृत सस्ती ज़मीन उपलब्ध थी।
वहीं, रेट बढ़ने के बाद यहां भी खरीदारी करना आसान नहीं रहा। यही कारण रहा कि कुछ समय के लिए प्रॉपर्टी बाजार में सुस्ती भी देखने को मिली थी। अब एक बार फिर कलेक्टर रेट बढ़ाने की तैयारी ने लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। भले ही इस बार वृद्धि सीमित हो, लेकिन पहले से बढ़े हुए रेट पर ही नई वृद्धि लागू होने से कुल लागत में इजाफा होगा। ऐसे में जो लोग घर खरीदने या ज़मीन में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें पहले के मुकाबले ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। कई क्षेत्रों में 50 से प्रतिशत से भी ज्यादा कलेक्टर रेट बढ़ गए थे। कई जगह पर 70 प्रतिशत तक बढ़ोत्तरी की बात भी सामने आई थी।





