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धामी सरकार ने 4 साल में लिए ये 10 बड़े फैसले, जानें कब क्या किया


देहरादून: उत्तराखंड की बीजेपी सरकार के लिए आज सोमवार 23 मार्च का दिन खास है. आज पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली उत्तराखंड सरकार ने अपने कार्यकाल के चार साल पूरे कर लिए हैं. इन चार सालों में धामी सरकार ने कई ऐतिहासिक और साहसिक फैसले लिए हैं.

धामी सरकार के चार साल पूरे: धामी सरकार की मुख्य उपलब्धियों में यूसीसी (समान नागरिक संहिता) जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून, सख्त नकल विरोधी कानून शामिल रहे. इसके साथ ही धामी सरकार का दावा है कि उन्होंने 9,000 एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया है. सरकार की चार साल की उपलब्धियों में 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करना भी शामिल है.

1. समान नागरिक संहिता (UCC): धामी सरकार ने 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में यूसीसी यानी समान नागरिकता कानून लागू किया. देश की आजादी के बाद यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड पहला राज्य बन गया. यूसीसी लागू करते हुए सीएम धामी ने कहा था कि यह कानून विवाह, तलाक, संपत्ति और विरासत के मामलों में सभी धर्मों के लिए एक समान नियम सुनिश्चित करता है.

2. अतिक्रमण मुक्त अभियान: धामी सरकार ने बड़े पैमाने पर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने की मुहिम चलाई. सरकारी आंकड़े के अनुसार सरकारी भूमि से ‘लैंड जिहाद’ के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 9,000 एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराया गया है.

3. भ्रष्टाचार पर नकेल: उत्तराखंड की धामी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए. सीएम धामी समय-समय पर कहते रहते हैं कि उनकी सरकार ने करप्शन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. इसके तहत अब तक भ्रष्टाचार के मामलों में करीब 200 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. विजिलेंस ने 82 लोगों को रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है. इस दौरान आईएएस और आईपीएस समेत वरिष्ठ अफसरों पर भी कार्रवाई की गई है. भूमि घोटाले में 12 बड़े अधिकारी निलंबित किए गए.

4. सख्त नकल विरोधी कानून: उत्तराखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक बड़ी समस्या बन गए थे. नकल माफिया सिस्टम पर हावी हो गया था. इससे युवाओं में निराशा और आक्रोश पैदा हो रहा था. ऐसे में धामी सरकार ने 10 फरवरी 2023 को देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून (उत्तराखंड प्रतियोगी परीक्षा अध्यादेश, 2023) राज्यपाल की मंजूरी के बाद लागू कर दिया. यह कानून राज्य में पेपर लीक और नकल रोकने के लिए लाया गया. इस कानून के तहत नकल के दोषी को उम्रकैद और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान है.

5. धर्मांतरण विरोधी कानून: उत्तराखंड में धर्मांतरण विरोधी कानून हालांकि अप्रैल 2018 में त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार के दौरान पारित किया गया था. नवंबर 2022 में धामी सरकार के दौरान इसे अधिक सख्त बनाया गया. जिसके तहत जबरन धर्मांतरण कराने वाले की अधिकतम सजा 5 साल से बढ़ाकर 10 साल कर दी गई. 2025 में इसे और सख्त बनाने के लिए प्रावधान जोड़े गए.

6. खनन सुधार: धामी सरकार पर कई बार खनन को लेकर सवाल उठते रहे. खासकर राज्य के मैदानी इलाकों में खनन सामग्री ले जा रहे डंपरों की चपेट में आने से लोगों की मौत को लेकर आक्रोश देखा जाता रहा है. खनन का मामला संसद तक में उठा. इससे बावजूद धामी सरकार ने खनन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए. इनमें उत्तराखंड में ई-नीलामी, सैटेलाइट निगरानी और पारदर्शी नीतियों के जरिए खनन क्षेत्र में बड़े सुधार करने का दावा किया गया है. सरकार के अनुसार इन कदमों से अवैध खनन पर अंकुश लगा. खनन राजस्व ₹300 करोड़ से बढ़कर ₹1200 करोड़ से अधिक हो गया. राज्य को खनन सुधारों में देश में दूसरा स्थान मिलने के साथ ₹200 करोड़ की प्रोत्साहन राशि मिली.

7. रोजगार सृजन: उत्तराखंड की धामी सरकार का दावा है कि उहोंने पिछले चार साल में 26,000 से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं. सरकार का लक्ष्य अगले साल तक यह संख्या 36,000 से अधिक करने का है.

8. मूल निवास और सशक्त भू-कानून: उत्तराखंड की धामी सरकार ने मूल निवास और सशक्त भू कानून की मांग को लेकर हुए बड़े आंदोलनों का संज्ञान लेते हुए बड़ा कदम उठाया. उत्तराखंड के 11 पहाड़ी जिलों में बाहरी लोगों द्वारा कृषि और बागवानी भूमि की खरीद पर रोक लगा दी गई है. नगर निकाय क्षेत्रों के बाहर केवल 250 वर्ग मीटर भूमि ही खरीदी जा सकेगी. अवैध खरीद पर जमीन सरकार में निहित हो जाएगी.

9. महिला सशक्तिकरण: जैसे उत्तराखंड की इकोनॉमी को मनीऑर्डर इकोनॉमी कहा जाता है, ठीक उसी तरह उत्तराखंड में कामकाज का भार महिला शक्ति पर रहता है. पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने पिछले चार साल में महिला सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30% क्षैतिज आरक्षण लागू किया है. इसके साथ ही ‘लखपति दीदी’ योजना लागू की गई है. ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ भी महिलाओं के लिए गेम चेंजर साबित हो रही हैं. इसके साथ ही महिलाओं को सहकारी समितियों में 33% आरक्षण दिया जा रहा है.

10. हाउस ऑफ हिमालयास: धामी सरकार ने उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को बाजार दिलाने और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग करने की दिशा में भी कदम उठाए हैं. इसके तहत ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग और विपणन के लिए शुरू किया गया. ये स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों और किसानों को सशक्त बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आजीविका को बढ़ाने के लिए बनाया गया एक मंच है.

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