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नेतन्याहू अब केयरटेकर PM… नई सरकार बनने तक कौन से फैसले ले सकते हैं, किस पर पाबंदी?​

Israel Election: इजराइल में आम चुनाव के शुरुआती नतीजों में कार्यवाहक पीएम नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को बढ़त मिलती हुई दिखाई दे रही है. उसे 53 सीटें मिलने की उम्मीद है. लेकिन मुख्य विपक्षी गठबंधन भी कमजोर नहीं दिखाई दे रहा है. उसे 48 सीटें मिलने का अनुमान है. अगर शुरुआती रुझान की तरह […]

Israel Election: इजराइल में आम चुनाव के शुरुआती नतीजों में कार्यवाहक पीएम नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को बढ़त मिलती हुई दिखाई दे रही है. उसे 53 सीटें मिलने की उम्मीद है. लेकिन मुख्य विपक्षी गठबंधन भी कमजोर नहीं दिखाई दे रहा है. उसे 48 सीटें मिलने का अनुमान है. अगर शुरुआती रुझान की तरह ही अंतिम परिणाम आए तो अरब दल ही किंग मेकर होंगे. अरब दलों को 19 सीटें मिल सकती हैं. जबकि सरकार बनाने के लिए 61 की जरूरत है. ऐसे में उम्मीद यह है कि इजराइल में सरकार बनने में कुछ वक्त लग सकता है. ऐसे में कुछ सवाल स्वाभाविक तौर पर उठते हुए दिखाई दे रहे हैं. मसलन, केयरटेकर सरकार के मुखिया के रूप में नेतन्याहू क्या कर सकते हैं और क्या नहीं?

इजराइल के चुनाव के बाद अगर किसी दल या गठबंधन को नेसेट में स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता, तो सत्ता तुरंत किसी दूसरे नेता के हाथ में नहीं जाती. नई सरकार बनने तक मौजूदा सरकार काम जारी रखती है. इस अवधि में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रह सकते हैं. कार्यवाहक सरकार का मतलब यह नहीं है कि सरकार के अधिकार खत्म हो जाते हैं. इजराइल के कानून के तहत उसे कई मामलों में नियमित सरकार जैसे अधिकार प्राप्त हैं. लेकिन अदालतों के फैसलों और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुसार, उसे बड़े और दूरगामी फैसलों में विशेष संयम बरतना चाहिए.

कार्यवाहक सरकार के पास कौन से अधिकार रहते हैं?

कानूनी रूप से कार्यवाहक सरकार के अधिकार बहुत सीमित नहीं होते. वह सरकारी कामकाज जारी रख सकती है और जरूरी फैसले ले सकती है. उसके फैसले कानूनी रूप से प्रभावी हो सकते हैं. सरकार का काम केवल रोजमर्रा की प्रशासनिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहता. सुरक्षा, विदेश नीति और कूटनीति से जुड़े मामले भी सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. गंभीर सुरक्षा संकट पैदा हो, तो कार्यवाहक सरकार तत्काल कदम उठा सकती है.

बेंजामिन नेतन्याहू.

इजराइल के विशेषज्ञों के अनुसार, औपचारिक अधिकारों के मामले में कार्यवाहक सरकार कई मामलों में नियमित सरकार जैसी होती है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री कोई बड़ा फैसला ले ही नहीं सकते. लेकिन अधिकार होना और हर फैसले का राजनीतिक या कानूनी रूप से उचित होना अलग बातें हैं. किसी भी महत्वपूर्ण कदम की जरूरत, प्रक्रिया और सार्वजनिक जवाबदेही पर सवाल उठ सकते हैं.

कार्यवाहक सरकार के लिए किन मामलों में संयम जरूरी?

कार्यवाहक सरकार के पास संसद से नया राजनीतिक जनादेश नहीं होता. इसलिए उससे अपेक्षा की जाती है कि वह ऐसे फैसलों से बचे जो लंबे समय तक देश की नीति या संस्थाओं को प्रभावित करें. अदालतों के पिछले फैसलों के अनुसार, कार्यवाहक सरकार को अपने विवेक का इस्तेमाल अधिक सावधानी से करना चाहिए. इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी बड़े फैसले अपने आप अवैध हो जाते हैं. जरूरी परिस्थिति में सरकार ऐसा कदम उठा सकती है. लेकिन उसे यह समझाना पड़ सकता है कि फैसला क्यों आवश्यक था और उसे नई सरकार के आने तक टालना क्यों संभव नहीं था. सरकारी नियुक्तियों, लंबे समय की नीतियों और ऐसे निर्णयों पर खास निगाह रह सकती है जिनका प्रभाव नई सरकार के कामकाज पर पड़े. किसी निर्णय की समीक्षा में यह देखा जा सकता है कि वह तत्काल जरूरत से जुड़ा था या नहीं, और क्या उसे नई सरकार बनने तक टाला जा सकता था.

क्या नेतन्याहू सैन्य कार्रवाई का फैसला ले सकते हैं?

कार्यवाहक प्रधानमंत्री होने से नेतन्याहू का राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा अधिकार अपने आप समाप्त नहीं होता. अगर सरकार किसी गंभीर और तत्काल सुरक्षा खतरे का सामना कर रही हो, तो कार्रवाई का फैसला लेने की कानूनी गुंजाइश बनी रह सकती है.

विशेषज्ञों ने कहा है कि कार्यवाहक सरकार सुरक्षा से जुड़े मामलों में निर्णय ले सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि प्रधानमंत्री बिना किसी प्रक्रिया या जवाबदेही के कोई भी सैन्य कदम उठा सकते हैं. फैसले की जरूरत, सुरक्षा स्थिति और सरकारी निर्णयप्रक्रिया महत्वपूर्ण होंगे. ऐसे कदम पर राजनीतिक विवाद और सार्वजनिक जांच भी हो सकती है. कार्यवाहक सरकार से यह अपेक्षा रहेगी कि वह किसी असाधारण फैसले के पीछे स्पष्ट और ठोस कारण बताए. इसलिए सही निष्कर्ष यह है कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री के पास सुरक्षा से जुड़े अधिकार बने रहते हैं, पर उन्हें इस्तेमाल करते समय संयम और जवाबदेही की कसौटी लागू होती है.

इजराइली संसद को ‘नेसेट’ कहते हैं, यह शब्द प्राचीन ‘नेसेट हगदोला’ यानी ‘ग्रेट असेंबली’ से निकला है. फोटो: Getty Images

नेसेट की भूमिका क्या हो सकती है?

सरकार गठन के दौरान संसद की भूमिका भी बदल सकती है. चुनाव के तुरंत बाद पुरानी नेसेट सीमित गतिविधियों के साथ काम कर सकती है. नई नेसेट के शपथ लेने के बाद उसकी समितियां गठित करने की प्रक्रिया शुरू होती है. समितियां बनने पर संसद में कानूनों और अन्य प्रस्तावों पर काम आगे बढ़ सकता है. इस दौरान विपक्ष को भी संसदीय बहुमत के आधार पर कुछ फैसलों को प्रभावित करने का अवसर मिल सकता है. उदाहरण के लिए, वह नेसेट के कामकाज या विधायी एजेंडे पर प्रभाव डालने की कोशिश कर सकता है. इसका मतलब यह है कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री के पास सरकार चलाने की जिम्मेदारी तो रहती है, लेकिन संसद में हर मामले पर उनका नियंत्रण सुनिश्चित नहीं होता.

सरकार बनाने की प्रक्रिया कैसे चलती है?

इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है. इसमें 120 सदस्य होते हैं. सरकार बनाने के लिए आम तौर पर 61 सदस्यों का समर्थन जरूरी है. चुनाव में सबसे अधिक सीटें पाने वाली पार्टी का नेता अपने आप प्रधानमंत्री नहीं बन जाता. असली सवाल यह है कि कौन संसद में सरकार बनाने और चलाने के लिए पर्याप्त समर्थन जुटा सकता है. चुनाव के बाद राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग सभी दलों के नेताओं से परामर्श करने के बाद फैसला ले सकते हैं कि किसे सरकार बनाने के लिए बुलाएं? राष्ट्रपति जिसे बुलाएंगे, उसे गठबंधन बनाने के लिए सामान्यतः 28 दिन मिलते हैं.

राष्ट्रपति जरूरत के आधार पर 14 दिन की अतिरिक्त अवधि भी दे सकते हैं. पहला उम्मीदवार सरकार बनाने में सफल न हो, तो राष्ट्रपति किसी दूसरे उम्मीदवार को मौका दे सकते हैं. यदि तय प्रक्रिया के बाद भी कोई सरकार नहीं बनती, तो नए चुनाव की नौबत आ सकती है. इस दौरान पुरानी सरकार कार्यवाहक सरकार के रूप में काम करती रहती है.

क्या कार्यवाहक सरकार का कार्यकाल अनिश्चित समय तक चल सकता है?

नई सरकार बनने तक कार्यवाहक सरकार जारी रहती है. यदि गठबंधन की बातचीत लंबी खिंचती है, तो यह अवधि भी बढ़ सकती है. सरकार गठन की संवैधानिक प्रक्रिया सफल न हो, तो अंततः नए चुनाव हो सकते हैं. तब तक मौजूदा सरकार अपना काम जारी रखती है. इस अवधि में नेतन्याहू प्रधानमंत्री पद पर बने रह सकते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्हें नई सरकार के समान नया चुनावी जनादेश मिल गया है. उनकी सरकार काम कर सकती है, पर बड़े नीतिगत फैसलों में संयम की अपेक्षा बनी रहती है.

इस तरह कहा जा सकता है कि इजराइल में कार्यवाहक प्रधानमंत्री की शक्ति को न तो पूरी तरह खत्म माना जाता है, न ही उसे असीमित कहा जा सकता है. नेतन्याहू नई सरकार बनने तक प्रशासन चला सकते हैं और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा से जुड़े कदम भी उठा सकते हैं. लेकिन दूरगामी फैसलों, नियुक्तियों और असाधारण कदमों पर उन्हें विशेष सावधानी बरतनी होगी.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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