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हार्ट अटैक vs कार्डियक अरेस्ट या हार्ट फेलियर… इन्हें एक समझने की न करें गलती, डॉक्टर से जानें​

वर्ल्ड हार्ट डे हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है. दिल की सेहत के साथ लोग जानेअनजाने में खिलवाड़ कर रहे हैं. दिल की सेहत को लेकर लोगों में कई मिथक बने रहते हैं. इसमें वे हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर को एक समझने की भूल भी करते हैं. इनमें क्या फर्क […]

वर्ल्ड हार्ट डे हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है. दिल की सेहत के साथ लोग जानेअनजाने में खिलवाड़ कर रहे हैं. दिल की सेहत को लेकर लोगों में कई मिथक बने रहते हैं. इसमें वे हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर को एक समझने की भूल भी करते हैं. इनमें क्या फर्क है ये समझने के लिए टीवी9 ने डॉक्टर मोहित अरोड़ा से बातचीत की. वैसे दिल की सेहत का ख्याल रखने में लापरवाही की वजह से बीते कुछ सालों में हार्ट अटैक या दिल की दूसरी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

दिल और ब्लड वैसल्स से जुड़ी बीमारियों को कार्डियोवस्कुलर डिजीज कहा जाता है. इसमें हार्ट अटैक के अलावा, पैरों की धमनियों से जुड़ी बीमारी, बर्थ से दिल का रोग, नसों में खून के थक्के जैसी समस्याएं शामिल हैं.

कहती है कि साल 2016 में पूरी दुनिया के करीब 17.9 करोड़ लोगों की मौत का कारण CVDs बना. ये उस साल हुई कुल मौतों का करीब 31 फीसदी था. इसमें करीब 85 फीसदी डेथ हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह से हुईं. चलिए आपको बताते हैं इन दिल से जुड़ी इन तीनों बीमारियों में क्या फर्क है?

डॉक्टर मोहित का कहना है कि लोग अक्सर हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट और हार्ट फेलियर को एक ही समझ लेते हैं. हालांकि, ये तीनों अलगअलग स्थितियां हैं और इनके बीच का अंतर समझना बहुत जरूरी है.

हार्ट अटैक क्यों आता है?

हार्ट अटैक तब होता है जब दिल तक खून पहुंचाने वाली किसी नस में ब्लॉकेज हो जाता है. इससे दिल की मांसपेशियों के एक हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती. सीने में दर्द या दबाव, पसीना, सांस फूलना, मितली या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक जाना इसके लक्षण हो सकते हैं. इसमें दिल आमतौर पर धड़कता रहता है, लेकिन ब्लॉकेज का तुरंत इलाज जरूरी होता है.

कार्डियक अरेस्ट में क्या बनती हैं कंडीशन

कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक खून पंप करना बंद कर देता है. व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है, प्रतिक्रिया नहीं देता और सामान्य रूप से सांस नहीं लेता. इसलिए यह जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है. ऐसे में तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद के लिए कॉल करें, CPR शुरू करें और AED उपलब्ध हो तो उसका इस्तेमाल करें.

हार्ट फेलियर को भी समझें

हार्ट फेलियर का मतलब दिल का पूरी तरह बंद हो जाना नहीं है. इसमें दिल कमजोर या सख्त हो जाता है और शरीर की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त खून पंप नहीं कर पाता. इसके कारण सांस फूलना, जल्दी थकना और पैरों में सूजन हो सकती है.

इसलिए अचानक सीने में तेज दर्द, बेहोशी या सांस लेने में गंभीर परेशानी हो, तो इंतजार न करें. तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लें. इस कंडीशन में किसी भी तरह की लापरवाही से जानलेवा कंडीशन भी बन सकती है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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