शेयर बाजार में लंबे समय के लिए निवेश करने वालों के बीच SIP को लेकर एक भरोसा रहता है कि हर महीने थोड़ाथोड़ा पैसा लगाने से बाजार के उतारचढ़ाव का असर कम हो जाता है. लेकिन हाल का डेटा इस सोच पर सवाल खड़े कर रहा है. Nifty50 में हर महीने की गई SIP ने पिछले 5 साल में सिर्फ 4.5% का XIRR रिटर्न दिया है. यह रिटर्न कई बैंक FD से भी कम रहा है.

ET की रिपोर्ट के मुताबिक, ACE MF के डेटा में Nifty50 की मंथली SIP का रिटर्न पिछले 2 साल में नेगेटिव 4.6% और 1 साल में नेगेटिव 10.5% रहा. यानी जिन निवेशकों ने इस अवधि में हर महीने Nifty50 में पैसा लगाया, उनके निवेश की वैल्यू घट गई. 7 साल में SIP रिटर्न 8.35% और 10 साल में 9.44% रहा.
SIP का मतलब हमेशा ज्यादा रिटर्न नहीं
SIP का फायदा यह है कि निवेशक बाजार ऊपर हो या नीचे, हर महीने एक तय रकम निवेश करता रहता है. इससे बाजार गिरने पर ज्यादा यूनिट और बढ़ने पर कम यूनिट मिलती हैं. इसे रुपये की औसत लागत यानी एवरेजिंग कहा जाता है.
लेकिन SIP कोई ऐसी तकनीक नहीं है जो शेयर बाजार के नुकसान को खत्म कर दे. अगर जिस इंडेक्स या फंड में पैसा लगाया गया है, उसका प्रदर्शन लंबे समय तक कमजोर रहता है, तो SIP का रिटर्न भी कमजोर रह सकता है.
ईटी की रिपोर्ट में ओमनीसाइंस कैपिटल के CEO और चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट विकास गुप्ता ने कहा कि SIP कोई जादू नहीं है. अगर अंडरलाइंग इंडेक्स ने रिटर्न नहीं दिया, तो SIP भी रिटर्न नहीं दे सकती.
Nifty50 से ज्यादा रिटर्न मिडकैपस्मॉलकैप में
इस दौरान बाजार के सभी हिस्सों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा. ACE MF के आंकड़ों के मुताबिक, Nifty Midcap 150 ने पिछले 5 साल में 14.89% रिटर्न दिया. वहीं Nifty Smallcap 250 TRI का रिटर्न 15.34% रहा.
7 साल की अवधि में भी दोनों इंडेक्स का प्रदर्शन Nifty50 से बेहतर रहा. Nifty Midcap 150 ने 19.22% और Nifty Smallcap 250 ने 20.64% रिटर्न दिया.
यानी समस्या पूरे इक्विटी मार्केट में एक जैसी नहीं रही. बड़े और स्थापित कंपनियों वाले Nifty50 की तुलना में मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट ने इस अवधि में ज्यादा रिटर्न दिया.
5 साल का आंकड़ा इतना कमजोर क्यों दिख रहा है?
एक बड़ी वजह यह भी है कि 5 साल की यह अवधि बाजार में कोविड के बाद आई तेज तेजी और उसके बाद आई कमजोरी को साथ लेकर चलती है. इसलिए शुरुआत और अंत की तारीख बदलने पर रिटर्न का आंकड़ा काफी बदल सकता है.
एक्सपर्ट मुताबिक, 17 सितंबर 2021 से 17 सितंबर 2024 के बीच Nifty50 का एकमुश्त निवेश करीब 14% CAGR रिटर्न दे रहा था, जबकि इसी दौरान मंथली SIP का रिटर्न करीब 21% था, लेकिन इसके बाद के दो साल में बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा, जिससे पूरे 5 साल का आंकड़ा नीचे आ गया.
उनके मुताबिक, इतिहास में ऐसे दौर पहले भी आए हैं जब Nifty50 ने कई साल तक बहुत कम या लगभग शून्य रिटर्न दिया है. हालांकि, कब बाजार फिर तेजी पकड़ेगा, इसका समय पहले से तय नहीं किया जा सकता.
क्या अब Nifty50 में SIP बंद कर देनी चाहिए?
सिर्फ इस डेटा के आधार पर SIP बंद करने का फैसला करना सही नहीं होगा. किसी निवेशक के लिए यह देखना जरूरी है कि उसका लक्ष्य क्या है, निवेश की अवधि कितनी है और वह कितना जोखिम ले सकता है.
Bajaj AMC के इक्विटी हेड सोर्भ गुप्ता के मुताबिक, इक्विटी का रिटर्न हर 5 साल में एक जैसा नहीं रहता. 1999 से Nifty50 TRI के 5 साल के रोलिंग रिटर्न का औसत करीब 15% रहा है और सिर्फ 0.07% मामलों में रिटर्न नेगेटिव रहा.
इसका मतलब यह नहीं है कि आगे Nifty50 जरूर बेहतर रिटर्न देगा. लेकिन यह जरूर दिखाता है कि इक्विटी में एक छोटी या किसी खास समय की अवधि को देखकर पूरे निवेश मॉडल पर फैसला करना ठीक नहीं है.
निवेशकों को क्या समझना चाहिए?
इस पूरे आंकड़े से सबसे बड़ी सीख यह है कि SIP बाजार के जोखिम को खत्म नहीं करती. यह निवेश का तरीका है, गारंटीड रिटर्न देने वाली रणनीति नहीं.
अगर निवेशक का पैसा सिर्फ Nifty50 में है, तो उसे अपने लक्ष्य, निवेश की अवधि और जोखिम क्षमता के हिसाब से पूरे पोर्टफोलियो को देखना चाहिए. सिर्फ पिछले 1 या 2 साल के खराब रिटर्न को देखकर SIP बंद करना या सिर्फ पिछले बेहतर प्रदर्शन वाले सेगमेंट में पैसा डालना दोनों ही फैसले सोचसमझकर लेने चाहिए.
लंबी अवधि में इक्विटी का रिटर्न कमाई, वैल्यूएशन, आर्थिक स्थिति और बाजार के उतारचढ़ाव पर निर्भर करता है. इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि SIP जारी रखनी है या नहीं, बल्कि यह भी है कि निवेश किस इंडेक्स या फंड में, कितने समय के लिए और किस लक्ष्य के लिए किया जा रहा है.