ADR Report: एसोसिएशन फॉर डेमोक्रैटिक रिफॉर्म्स और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट सामने आई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2022 से जुलाई 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद 111 मौजूदा सांसदों और विधायकों ने अपनी पार्टी बदल ली। इसमें लोकसभा के 26 सांसद, राज्यसभा के 7 सांसद और 78 विधायक शामिल हैं।
करीब 28.82 प्रतिशत सांसद और विधायक एनपीएफ और 26 प्रतिशत बीजेपी में शामिल हुए हैं।
17 राज्यों में चुनाव जीतकर बदली पार्टी
ADR की रिपोर्ट में पार्टी विलय, इस्तीफा देकर दूसरी पार्टी के टिकट पर उपचुनाव जीतने और अयोग्यता के बाद दूसरी पार्टी से चुनाव जीतने जैसे मामलों को भी शामिल किया गया है। ये मामले 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सामने आए हैं।
नागालैंडबंगाल में सबसे ज्यादा दलबदल
रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा मामले नागालैंड से सामने आए, जहां 32 जनप्रतिनिधि इस विश्लेषण का हिस्सा रहे। इसके बाद पश्चिम बंगाल में 20 और तेलंगाना में 9 मामले दर्ज किए गए। नागालैंड में NDPP और NPF के बीच राजनीतिक विलय के कारण आंकड़ा अधिक रहा।
कांग्रेस पार्टी में सिर्फ 8 फीसदी गए
दल बदलने वाले 111 नेताओं में सबसे ज्यादा 32 जनप्रतिनिधि NPF के साथ जुड़े। वहीं 29 नेता BJP में शामिल हुए। इसके अलावा NCPI को 20, कांग्रेस को 9, शिवसेना को 8, NPP को 6 और पीपल पार्टी ऑफ अरुणाचल को 4 जनप्रतिनिधि मिले।
कांग्रेस सहित अन्य दलों ने छोड़ी पार्टी
ADR के मुताबिक, BJP में शामिल होने वालों में 7 राज्यसभा सांसद और 22 विधायक शामिल हैं। इनमें कई कांग्रेस और अन्य दलों के विधायक शामिल रहे, जबकि राज्यसभा के कुछ सदस्य आम आदमी पार्टी के टिकट पर चुने गए थे।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि सबसे ज्यादा जनप्रतिनिधि NDPP से अलग हुए। इसके बाद TMC और कांग्रेस के नेता पार्टी बदलने वालों में शामिल रहे।
ADR ने दलबदल कानून में बदलाव की जरूरत बताते हुए सुझाव दिया कि सांसदों और विधायकों की अयोग्यता पर फैसला चुनाव आयोग की सलाह के आधार पर राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा किया जाना चाहिए।