: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन जारी रखने की बात कही है। CJP के सहसंयोजक सौरभ दास ने कहा है कि ज्ञानेश कुमार को लेकर अदालतों में दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जो भी फैसला दें, संगठन अपनी लोकतांत्रिक मांग को लेकर आंदोलन जारी रखेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब CJP ने 2 अक्टूबर से देशभर में प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान किया है।

अदालत के फैसले से आंदोलन प्रभावित नहीं होगा: CJP
CJP नेता सौरभ दास ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अदालतों में दायर याचिकाओं पर अदालतें अपनी प्रक्रिया के अनुसार सुनवाई करेंगी, लेकिन संगठन अपनी मांग को न्यायिक फैसलों से अलग मानता है। उन्होंने चुनाव आयोग और न्यायपालिका की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि उनकी नजर में चुनावी जवाबदेही का सवाल जनता से जुड़ा है।
CJP ने इससे पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की थी। संगठन ने 24 सितंबर को ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया था और ऐसा नहीं होने पर देशभर में आंदोलन की चेतावनी दी थी।
SIR को लेकर CJP ने उठाए सवाल
कॉकरोच जनता पार्टी का मुख्य विरोध यानी SIR को लेकर भी है। संगठन ने आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
CJP ने इसी मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग में सुधार और SIR प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर जवाबदेही की मांग की है। ये संगठन के आरोप और राजनीतिक दावे हैं; इनके संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर हैं।
2 अक्टूबर से आंदोलन का ऐलान
CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। संगठन के मुताबिक इसकी शुरुआत मुंबई से प्रस्तावित प्रदर्शन के साथ होगी और इसके बाद अन्य शहरों में भी कार्यक्रम किए जाएंगे।
27 सितंबर को कोच्चि में CJP के प्रतिनिधि ने भी मुंबई के बाद बेंगलुरु, हैदराबाद, प्रयागराज और दिल्ली में कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही थी।
देशभर में अभियान चलाने की तैयारी
CJP ने इससे पहले ‘’ अभियान शुरू करने की घोषणा की थी। संगठन का कहना है कि उसका आंदोलन चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित है। वहीं, CJP की मांगों और SIR को लेकर लगाए गए आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का आधिकारिक पक्ष अलग से महत्वपूर्ण रहेगा।