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Employee Benefits: फ्री जिम और थेरेपी पर चंद रुपये खर्च कर ऐसे लाखों बचा रही हैं कंपनियां​

Employee Benefits: कॉरपोरेट कल्चर तेजी से बदल रहा है. एक वक्त था जब कंपनियां अपने कर्मचारियों को सिर्फ बेसिक हेल्थ इंश्योरेंस थमा देती थीं. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. आज के समय में ऑफिस की तरफ से मेंटल हेल्थ सपोर्ट, टेलिहेल्थ कंसल्टेशन से लेकर जिम की मेंबरशिप तक दी जा रही है. बाहर से […]

Employee Benefits: कॉरपोरेट कल्चर तेजी से बदल रहा है. एक वक्त था जब कंपनियां अपने कर्मचारियों को सिर्फ बेसिक हेल्थ इंश्योरेंस थमा देती थीं. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. आज के समय में ऑफिस की तरफ से मेंटल हेल्थ सपोर्ट, टेलिहेल्थ कंसल्टेशन से लेकर जिम की मेंबरशिप तक दी जा रही है. बाहर से देखने पर भले ही लगे कि कंपनियां अपने स्टाफ को खुश करने के लिए पैसे लुटा रही हैं, लेकिन इसके पीछे एक तगड़ी वित्तीय प्लान काम कर रही है. एम्प्लॉई हेल्थ बेनिफिट प्लेटफॉर्म ‘प्लम’ की एक नई रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. ये रिपोर्ट बताती है कि कर्मचारियों की सेहत पर खर्च करना कोई खैरात नहीं, बल्कि एक ऐसा निवेश है जो कंपनियों का लंबा खर्च बचा रहा है.

हर कर्मचारी पर 480 रुपये की बचत

प्लम की ‘स्टैंडर्ड ऑफ एम्प्लॉई बेनिफिट्स 2026’ रिपोर्ट में चार सालों के दौरान करीब 10 लाख लोगों की 15,000 से ज्यादा पॉलिसियों का डेटा खंगाला गया. इसमें साफ हुआ कि कॉर्पोरेट हेल्थ का पुराना तरीका अब काम नहीं कर रहा है. अब कंपनियां कर्मचारी के बीमार पड़ने का इंतजार नहीं करतीं. जो कंपनियां टेलिहेल्थ, रूटीन चेकअप या शुरुआती जांच जैसी सुविधाओं पर पैसा लगा रही हैं, वहां पुरानी और गंभीर बीमारियों के क्लेम में 13 फीसदी की कमी देखी गई. इसका सीधा असर कंपनियों की जेब पर पड़ा है. उन्हें हर कर्मचारी पर प्रीमियम के रूप में करीब 480 रुपये की बचत हो रही है. यानी अगर किसी कंपनी में 1,000 कर्मचारी भी हैं, तो ये बचत सीधे 4,80,000 रुपये हो जाती है. ये कोई एक दिन का फायदा नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले तीन सालों में ये फायदा सालाना 6 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है.

बेहतर सुविधाएं देने की होड़

चार साल पहले तक ऐसे बेनिफिट प्लान बहुत कम दिखते थे जिनमें इंश्योरेंस के साथ हेल्थकेयर का पूरा सपोर्ट शामिल हो. लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. रिपोर्ट बताती है कि अच्छी हेल्थकेयर सुविधाएं देने वाले नियोक्ताओं का आंकड़ा 5 फीसदी से बढ़कर 23 फीसदी हो गया है. अब लगभग हर चौथी कंपनी अपने लोगों को एक बड़ा सेफ्टी नेट दे रही है. 5 लाख रुपये से ज्यादा का समइंस्योर्ड देने वाली कंपनियों में 53 फीसदी का उछाल आया है. वहीं, मैटरनिटी लिमिट 75,000 रुपये से ज्यादा करने वाली कंपनियां 155 फीसदी बढ़ गई हैं. टर्म लाइफ बीमा जोड़ने वाली कंपनियों की तादाद में 179 फीसदी का इजाफा हुआ है.

प्लम के कोफाउंडर और सीईओ अभिषेक पोद्दार का कहना है कि भारत में पहले एम्प्लॉई बेनिफिट की बात सिर्फ इंश्योरेंस पर खत्म हो जाती थी. अब बेहतरीन कंपनियां क्लेम आने से पहले ही हेल्थकेयर पर ध्यान दे रही हैं. ये कंपनियों की सोच में एक बड़ा बदलाव है.

पहली बार मिला सुविधाओं का लाभ

कंपनियों के इस कदम से वर्कफोर्स के एक बहुत बड़े हिस्से को पहली बार प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का फायदा मिला है. डेटा दिखाता है कि 61 फीसदी कर्मचारियों ने हेल्थ चेकअप बेनिफिट का इस्तेमाल किया. 74 फीसदी ने मेंटल हेल्थ सपोर्ट लिया. 31 फीसदी ने अपनी जिंदगी में पहली बार जिम मेंबरशिप का लाभ उठाया. ये सिर्फ इसलिए मुमकिन हुआ क्योंकि उनकी कंपनी ने ये सुविधाएं दीं. जिन लोगों ने दोबारा हेल्थ चेकअप कराया, उनमें से 70 फीसदी की न्यूट्रिशन और दिल की सेहत में बड़ा सुधार देखने को मिला. कर्मचारियों के परिवार वाले भी इन सुविधाओं का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं. डॉक्टर कंसल्टेशन में 37 फीसदी और ओपीडी क्लेम में 24 फीसदी हिस्सेदारी परिवार वालों की रही है.

आगे जाकर बढ़ सकता है कंपनियों का हेल्थकेयर खर्च

टेक्नोलॉजी की वजह से अब इन सुविधाओं तक पहुंचना बहुत आसान हो गया है. प्लम के सीटीओ सौरभ अरोड़ा के मुताबिक, कंपनियों के लिए अगली बड़ी चुनौती ये है कि लोग अपने पास मौजूद बेनिफिट्स का पूरा इस्तेमाल करें. जैसेजैसे सुविधाएं लेने का अनुभव बेहतर होगा, एम्प्लॉई हेल्थकेयर में ‘जेवन्स पैराडॉक्स’ देखने को मिलेगा. यानी जब लोग सुविधाओं का ज्यादा इस्तेमाल करेंगे, तो शुरुआत में कंपनियों का हेल्थकेयर खर्च बढ़ सकता है.

भारत में अभी 40 फीसदी से भी कम लोगों तक हेल्थ इंश्योरेंस की पहुंच है. अमेरिका जैसे बाजारों की तुलना में प्रीमियम का हिस्सा काफी कम है. इसके बावजूद, भारत में ग्रुप हेल्थ कवरेज हर साल 23 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. अंत में रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि वर्कफोर्स में किया गया ये निवेश कंपनियों के लिए घाटे का सौदा नहीं है. जब कर्मचारियों की सेहत अच्छी होती है, तो उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ती है, वे कंपनी में टिके रहते हैं और इससे अंततः कंपनी का ही पैसा बचता है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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