जून 2026 में लखनऊ के तीन मंजिला भवन में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है. कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से कहा है कि वह ऐसी घटनाओं में मुआवजा देने के लिए एक स्पष्ट और समान नीति बनाए, जहां कानून में पहले से मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है.

इस अग्निकांड में एक एनिमेशन सेंटर में आग लगने से 15 युवाओं की मौत हो गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए और कुछ लोग स्थायी रूप से दिव्यांग हुए. मामले की सुनवाई कर रही जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजिव शुक्ला की पीठ ने मुआवजे की मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए सरकार को नीति बनाने का निर्देश दिया है.
आग जैसी घटनाओं के लिए स्पष्ट नीति नहीं
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि फिलहाल मुआवजे की सरकारी नीति मुख्य रूप से प्राकृतिक आपदाओं के मामलों में लागू होती है. ऐसी घटनाएं, जिनमें कानून में मुआवजे की कोई निश्चित व्यवस्था नहीं है, उनमें मुआवजे की राशि तय करने का कोई स्पष्ट सरकारी पैमाना नहीं है.
कोर्ट ने कहा कि सरकार की नीति में यह स्पष्ट होना चाहिए कि किस तरह की घटना में कितना मुआवजा दिया जाएगा और मुआवजे की राशि तय करने का आधार क्या होगा. कोर्ट ने विशेष रूप से मृतक, घायल, गंभीर रूप से घायल और दिव्यांग हुए लोगों के लिए मुआवजे के अलगअलग मानक तय करने की जरूरत बताई.
मुआवजे में भेदभाव या मनमानी पर कोर्ट की चिंता
हाईकोर्ट ने कहा कि मुआवजा तय करने की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें भेदभाव या मनमानी की गुंजाइश न रहे. ऐसा नहीं होना चाहिए कि कम गंभीर घटना में ज्यादा मुआवजा मिल जाए और उससे ज्यादा गंभीर मामले में पीड़ितों को कम राशि मिले.
कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अलगअलग घटनाओं में सरकार की ओर से अलगअलग मुआवजा क्यों दिया जाता है. सुनवाई के दौरान कुछ मामलों में 50 लाख और 25 लाख रुपए तक मुआवजा दिए जाने का उल्लेख हुआ, जबकि लखनऊ अग्निकांड के पीड़ित परिवारों को इससे काफी कम राशि मिली है.
पीड़ित परिवारों को अब तक करीब 11 लाख रुपए
राज्य सरकार के मुताबिक, लखनऊ अग्निकांड के पीड़ित परिवारों को अलगअलग स्रोतों से करीब 11 लाख रुपए की सहायता मिली है.
- 5 लाख रुपए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से
- 4 लाख रुपए राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष यानी SDRF से
- 2 लाख रुपए प्रधानमंत्री राहत कोष से
हालांकि कुछ पीड़ित परिवारों ने कोर्ट को बताया कि प्रधानमंत्री राहत कोष से मिलने वाली 2 लाख रुपये की राशि उन्हें अभी तक प्राप्त नहीं हुई है. कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से इस संबंध में जानकारी लेने को कहा है.
दिव्यांग के इलाज का खर्च उठाएगी सरकार
सुनवाई के दौरान 25 वर्षीय जयंत गुप्ता का मामला भी सामने आया. अग्निकांड में गंभीर रूप से घायल होने के बाद जयंत दिव्यांग हो गए हैं. उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि उनका इलाज KGMU में चल रहा है और इलाज पर करीब 70 हजार रुपए प्रति माह खर्च हो रहा है.
कोर्ट को यह भी बताया गया कि जयंत को अब तक सिर्फ 50 हजार रुपए की सहायता मिली है. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जयंत के इलाज के बिल का खर्च उठाने का निर्देश दिया. साथ ही KGMU को निर्देश दिया गया कि जयंत से इलाज का कोई खर्च न लिया जाए और उन्हें उचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए.
क्या सिर्फ भवन मालिक की गलती थी?
हाईकोर्ट ने मामले में प्रथम दृष्टया यह भी कहा कि हादसे के लिए केवल भवन मालिक की लापरवाही जिम्मेदार नहीं हो सकती. कोर्ट ने सरकारी अधिकारियों और संबंधित विभागों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. विशेष रूप से लखनऊ विकास प्राधिकरण और अन्य सरकारी विभागों की भूमिका का उल्लेख करते हुए कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि भवन का निर्माण या उसका व्यावसायिक इस्तेमाल नियमों के विपरीत था, तो फिर उसे अनुमति कैसे मिली.
यानी कोर्ट अब इस पहलू की भी पड़ताल कर रहा है कि हादसे से पहले संबंधित सरकारी विभागों ने अपने स्तर पर नियमों का पालन सुनिश्चित किया था या नहीं. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पहले दिए गए मुआवजे का पूरा विवरण देने को कहा है. साथ ही सरकार को यह भी बताना होगा कि पीड़ित परिवारों को मुआवजे की राशि और क्यों न बढ़ाई जाए.