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मंदी की आहट के बीच भारत की छलांग! दुनिया की 4 दिग्गज रेटिंग एजेंसियों ने बढ़ाई भारत की आर्थिक रफ्तार​

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एसएंडपी और फिच, एशियाई विकास बैंक तथा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन ने बुधवार को भारत की वित्त वर्ष 202627 की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर करीब सात प्रतिशत कर दिया है. एजेंसियों ने अप्रैलजून तिमाही में इकोनॉमी के मजबूत प्रदर्शन और घरेलू मांग में मजबूती को इसका आधार बताया. इसके अलावा, […]

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एसएंडपी और फिच, एशियाई विकास बैंक तथा आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन ने बुधवार को भारत की वित्त वर्ष 202627 की जीडीपी वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर करीब सात प्रतिशत कर दिया है. एजेंसियों ने अप्रैलजून तिमाही में इकोनॉमी के मजबूत प्रदर्शन और घरेलू मांग में मजबूती को इसका आधार बताया. इसके अलावा, एसएंडपी और फिच ने कहा कि महंगाई का दबाव भारतीय रिजर्व बैंक को चालू साल में नीतिगत दर रेपो को कमसेकम 0.25 प्रतिशत बढ़ाने के लिए प्रेरित कर सकता है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर चारों रेटिंग एजेंसी की ओर से क्या कहा गया है…

एसएंडपी का अनुमान

  1. एसएंडपी ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है.उसने मजबूत आर्थिक गतिविधियों को इसका कारण बताया और वित्त वर्ष 202627 में आरबीआई द्वारा ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान जताया.
  2. एसएंडपी ने कहा कि मजबूत औद्योगिक गतिविधियों, स्वस्थ खपत, वस्तुओं के मजबूत निर्यात और सरकारी निवेश में तेजी जैसे कारकों ने आर्थिक वृद्धि को गति दी है.
  3. एसएंडपी ने कहा कि इसी कारण हमने 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान पहले के 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत किया गया है.
  4. हालांकि, उसने कहा कि वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में वृद्धि की रफ्तार कम हो सकती है, क्योंकि माल एवं सेवा कर को युक्तिसंगत बनाये जाने और आयकर में कटौती से मिलने वाला लाभ कम हो जाएगा.
  5. एसएंडपी ने कहा कि हमारा अनुमान है कि परिस्थितियां ऊंची ब्याज दरों के पक्ष में जाएंगी. इसके समर्थन में मजबूत वृद्धि, लगातार मुद्रास्फीति का दबाव, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और मौसम संबंधी जोखिम शामिल हैं.
  6. एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष में खुदरा महंगाई औसतन 5.1 प्रतिशत रहने और आरबीआई द्वारा नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान जताया.

फिच ने कुछ इस तरह लगाया अनुमान

फिच रेटिंग्स ने भी बुधवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान 6.4 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.9 प्रतिशत कर दिया. फिच ने कहा कि अप्रैलजून तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है कि 2026 की पहली छमाही में अमेरिकीईरान युद्ध से लगे झटके के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है.

फिच के अनुसार, शेष वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि की गति धीमी पड़ने की संभावना है. इसके कारण भारतीय रिजर्व बैंक अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है.

फिच ने इस साल दिसंबर में मुद्रास्फीति 5.5 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया है. फिच ने अपनी ‘वैश्विक आर्थिक परिदृश्य रिपोर्ट’ में कहा कि ऊर्जा कीमतों में झटके के बावजूद वैश्विक वृद्धि मजबूत बनी हुई है, लेकिन वास्तविक ब्याज दरें बढ़ रही हैं. एजेंसी ने वैश्विक जीडीपी वृद्धि का अनुमान 0.20 प्रतिशत बढ़ाकर 2.6 प्रतिशत कर दिया है.

ओईसीडी ने भी बढ़ाई भारत की रफ्तार

आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन ने मजबूत घरेलू मांग और सरकारी नीतियों को देखते हुए वित्त वर्ष 202627 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 0.80 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है. इसके पहले जून में ओईसीडी ने चालू वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था.

पेरिस स्थित ओईसीडी ने बुधवार को जारी अपने अंतरिम आर्थिक परिदृश्य में कहा कि जी20 में शामिल भारत जैसी कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में वृद्धि मजबूत घरेलू मांग और सरकार की उन नीतियों से समर्थित रही, जिन्होंने ऊंची ऊर्जा कीमतों के असर से परिवारों और कंपनियों को राहत दी. ओईसीडी ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि वित्त वर्ष 202526 के 7.8 प्रतिशत से घटकर 202627 में 7.1 प्रतिशत और 202728 में 6.5 प्रतिशत रह सकती है. इसके साथ ही, ओईसीडी ने कहा कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं में भारत महंगाई के बढ़ते दबाव को कम करने के लिए अस्थायी रूप से नीतिगत दर बढ़ा सकता है.

एडीबी के अनुमान में भी इजाफा

वहीं एशियाई विकास बैंक ने भी बुधवार को चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान जुलाई में लगाए गए 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया. एडीबी ने कहा कि वृद्धि को मजबूत निवेश मांग, लचीले उपभोग और विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्रों में ठोस वृद्धि से समर्थन मिल रहा है.

एशियन डेवलपमेंट आउटलुक में कहा गया कि अर्थव्यवस्था को उम्मीद से कम आपूर्ति व्यवधान, पूंजी के लगातार प्रवाह और बढ़ी हुई कच्चे माल की लागत का उपभोक्ता कीमतों पर सीमित असर से भी फायदा हुआ है. इससे पश्चिम एशिया में संघर्ष के प्रभाव को कम करने में मदद मिली.

भारत के लिए एडीबी के कंट्री निदेशक मियो ओका ने कहा कि आपूर्ति संबंधी व्यवधानों और जिंसों की ऊंची कीमतों के बावजूद मजबूत बुनियादी ढांचा खर्च तथा वृद्धि को समर्थन देने वाली राजकोषीय और मौद्रिक नीतियों से भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती दिखा रही है.

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संपादकीय टीम

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