उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है. इसी बीच योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व को लेकर निषाद पार्टी के अध्यक्ष और यूपी सरकार में मंत्री संजय निषाद ने बड़ा बयान दिया है. TV9 से खास बातचीत में संजय निषाद ने कहा कि वह चाहते हैं कि योगी आदित्यनाथ ही फिर से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनें. संजय निषाद ने कहा कि वह हमारे पीठाधीश्वर हैं.. मैं हमेशा से मुख्यमंत्री के तौर पर योगी आदित्यनाथ का समर्थन करता हूं.

बीजेपी दरवाजा बंद करेगी तो आगे देखेंगे
बीजेपी के साथ गठबंधन और समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठजोड़ की अटकलों पर संजय निषाद ने कहा कि जब सपा ने दरवाजे बंद किए थे, तब वह बीजेपी के साथ आ गए थे. उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी भी दरवाजा बंद करेगी तो आगे देखा जाएगा. उन्होंने कहा कि लोग यह सवाल पूछते हैं, मैं बस जवाब देता हूं, क्योंकि राजनीति में न कोई दुश्मन होता है और न ही कोई दोस्त… मेरी दोस्ती सिर्फ अपने वोटरों से है.
मैं नाराज नहीं, जनता की नाराजगी बता रहा हूं
बीजेपी से नाराजगी के सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि वह खुद नाराज नहीं हैं, बल्कि जनता की नाराजगी बीजेपी को बता रहे हैं. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में यूपी में बीजेपी के प्रदर्शन का हवाला देते हुए पार्टी के भीतर गुटबाजी और जमीनी स्तर पर नाराजगी का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि 2022 में जिन सीटों पर बीजेपी गठबंधन ने जीत हासिल की थी, उनमें से कुछ सीटें 2024 में हार गईं. संजय निषाद ने आरोप लगाया कि बीजेपी के कुछ लोग ही अपनी पार्टी को हराने में लगे थे. उन्होंने अपने अंदाज में कहा, ‘मैं तो मौसम वैज्ञानिक हूं और मैंने बता दिया है कि तूफान आ रहा है.’
बीजेपी को बिना अमित शाह और सुनील बंसल के मैदान में नहीं उतरना चाहिए
संजय निषाद ने बीजेपी के चुनावी प्रबंधन को लेकर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि बीजेपी एक समुद्र है और निषाद पार्टी नाव है. उनके मुताबिक, नाव में लोग इधरउधर होंगे तो नाव डूबने लगेगी. उन्होंने कहा कि बीजेपी को 2027 के चुनाव में गृह मंत्री अमित शाह और सुनील बंसल जैसे नेताओं को सक्रिय भूमिका में उतारना होगा. संजय निषाद ने 2024 के चुनाव में पार्टी के कोर वोटर की नाराजगी का भी जिक्र किया.
आरक्षण को लेकर क्या बोले संजय निषाद?
आरक्षण के मुद्दे पर संजय निषाद ने कहा कि यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व का सवाल है. उन्होंने निषाद समाज को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने की मांग को लेकर कहा कि यह उनके लिए मांग नहीं, ईनाम है. उन्होंने कहा कि संविधान ने गरीब और दबेकुचले वर्गों को अधिकार इसलिए दिया है ताकि उन्हें उनका प्रतिनिधित्व मिल सके. संजय निषाद के मुताबिक, यह सिर्फ प्रधान या बीडीसी बनने तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि लोकसभा और विधानसभा में प्रतिनिधित्व से जुड़ा मामला है.
परिवारवाद के आरोप पर भी दिया जवाब
संजय निषाद ने अपने परिवार पर लगने वाले परिवारवाद के आरोपों का भी जवाब दिया. उन्होंने कहा कि जब बीजेपी ने उन्हें लोकसभा की एक सीट दी तो पार्टी को यह तय करना था कि उस सीट पर कौन जीत सकता है. उन्होंने अपने बेटे के राजनीति में आने का जिक्र करते हुए कहा कि उनके बेटे ने नौकरी छोड़कर राजनीति में आने का त्याग किया है. संजय निषाद ने कहा कि उनका परिवार आंदोलन से जुड़ा रहा है और आंदोलन करने वालों का अधिकार सबसे पहले होता है.