शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है. हर कोई अपनी बचत को इक्विटी स्कीम में लगाकर शानदार मुनाफा कमाना चाहता है. लेकिन, क्या आपको पता है कि आपके मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा टैक्स के रूप में कट सकता है? अगर आप शेयर या म्यूचुअल फंड की इक्विटी स्कीम बेचने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के नियमों को समझना बेहद जरूरी है. बिना नियम जाने जल्दबाजी में की गई बिकवाली आपके गाढ़े पसीने की कमाई से मिलने वाले ‘रियल रिटर्न’ को काफी कम कर सकती है.

म्यूचुअल फंड की तरफ क्यों भाग रहे निवेशक

आजकल इक्विटी म्यूचुअल फंड आम निवेशकों की पहली पसंद बने हुए हैं. जो लोग सीधे शेयर बाजार के उतारचढ़ाव से घबराते हैं, वे म्यूचुअल फंड का सुरक्षित रास्ता चुनते हैं. इन स्कीमों के जरिए भी निवेशकों का पैसा शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों में ही लगाया जाता है. शेयर बाजार शानदार रिटर्न तो देता है, लेकिन जब आप उस मुनाफे को अपने बैंक खाते में लाने के लिए यूनिट्स बेचते हैं, तो टैक्स की वजह से असली कमाई घट जाती है.

समय से तय होता है मुनाफे का गणित

मुनाफा वसूली से पहले आपको यह देखना होगा कि आपने निवेश कितने समय तक बनाए रखा है. किसी भी एसेट से मिलने वाला असल रिटर्न इस बात पर निर्भर करता है कि टैक्स कटने के बाद आपके हाथ में कितने पैसे आए. टैक्स के नियम पूरी तरह से इस बात पर टिके हैं कि आपने शेयर या म्यूचुअल फंड यूनिट्स को कितने समय तक अपने पोर्टफोलियो में रखा है. बाजार की भाषा में इसे होल्डिंग पीरियड कहा जाता है. इसी अवधि के आधार पर तय होता है कि आप पर शॉर्ट टर्म टैक्स लगेगा या लॉन्ग टर्म टैक्स.

एक साल से पहले बेचने पर भारी नुकसान

अगर आप शेयर बाजार में किसी कंपनी के शेयर या म्यूचुअल फंड की यूनिट्स खरीदते हैं और उसे 12 महीने पूरे होने से पहले ही बेच देते हैं, तो होने वाले मुनाफे पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेंस टैक्स लगता है. मौजूदा नियमों के अनुसार, यह टैक्स 20 फीसदी की दर से वसूला जाता है. इसे एक सीधे उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए, आपने कुछ शेयर खरीदे और साल भर के भीतर उन्हें बेचकर 1000 रुपये का मुनाफा कमाया. अब इस 1000 रुपये पर 20 फीसदी के हिसाब से 200 रुपये का टैक्स बन जाएगा. यानी, आपका असली मुनाफा घटकर सिर्फ 800 रुपये ही रह जाएगा.

लॉन्ग टर्म निवेश पर मिलती है बड़ी राहत

वहीं, अगर आप 12 महीने तक धैर्य रखते हैं और उसके बाद बिकवाली करते हैं, तो आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स के दायरे में रखा जाता है. लॉन्ग टर्म निवेश में टैक्स की दर घटकर 12.5 फीसदी हो जाती है. यानी उसी 1000 रुपये के मुनाफे पर आपको सिर्फ 125 रुपये टैक्स देना होगा, जिससे आपके हाथ में 875 रुपये आएंगे.

इसके साथ ही निवेशकों के लिए एक बहुत बड़ी राहत भी शामिल है. आयकर नियमों के तहत एक वित्तीय वर्ष में 1.25 लाख रुपये तक का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पूरी तरह से टैक्सफ्री होता है. अगर आप एक साल बाद अपने शेयर या म्यूचुअल फंड बेचते हैं, और उस पर होने वाला कुल सालाना मुनाफा 1.25 लाख रुपये तक ही है, तो आपको सरकार को एक भी रुपया टैक्स नहीं देना होगा.