सोमवार को तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही. जिसके पीछे एक अहम कारण माना जा रहा है. करीब 21 देशों के ग्रुप ओपेक प्लस ने लगातार 5वें महीने प्रोडक्शन बढ़ाने का फैसला लिया है. वहीं दूसरी ओर होर्मुज स्ट्रेट से निर्यात में सुधार जारी है. जिससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण एनर्जी कोरिडोर्स में से एक में लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट की आशंका कम हो गई. बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 72 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 68 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था. ट्रेडर्स का मानना है कि आने वाले महीनों में ग्लोबल वैश्विक ऑयल की सप्लाई मांग से अधिक हो जाएगी. जिसकी वजह से कच्चे तेल की कीमतों में और गिरावट देखने को मिल सकती है.

वहीं दूसरी ओर भारत में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है. 25 मई के दिन आखिरी बार पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव देखने को मिला था. उसके बाद से कोई इनकी कीमतों में कोई हरकत देखने को नहीं मिली है. हाल ही में ऑयल मिनिस्टर हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि जब तक देश की ऑयल रिफाइनरीज में सस्ता तेल नहीं पहुंच जाता तब तक कोई संभावना नहीं है. उन्होंने संकेत दिया कि अगस्त के अंत या सितंबर के शुरुआत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी देखने को नहीं मिल सकती है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर मौजूदा समय में कच्चे तेल की कीमतें कितनी हो गई हैं. साथ ही देश के महानगरों में पेट्रोल और डीजल के दाम कितने हो गए हैं…
OPEC+ ने फिर से उत्पादन बढ़ाया
रविवार को OPEC+ अगस्त से प्रोडक्शन टारगेट को 1,88,000 बैरल प्रति दिन बढ़ाने पर सहमत हुआ. यह कदम जून और जुलाई के लिए घोषित इसी तरह के कोटा में बढ़ोतरी के बाद उठाया गया है, क्योंकि उत्पादक देशों का समूह तेल की कीमतों को सहारा देने के लिए 2023 में लागू की गई स्वैच्छिक उत्पादन कटौती को धीरेधीरे वापस ले रहा है. उत्पादन बढ़ाने में अगुवाई करने वाले सात देशों — सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, अल्जीरिया, कजाकिस्तान और ओमान — ने अब अप्रैल से जुलाई के बीच लगभग 8,00,000 bpd उत्पादन बहाल कर दिया है. अगर अगस्त में समूह की अगली बैठक में इसी तरह की और बढ़ोतरी को मंज़ूरी मिलती है, तो 2023 में तय की गई ज्यादातर उत्पादन कटौती वापस ले ली जाएगी.
होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिति सामान्य हुई
कच्चे तेल की कीमतों में हालिया गिरावट की एक और वजह होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही में सुधार है. इस अहम शिपिंग रूट पर तब रुकावटें आई थीं जब इलाके में सैन्य तनाव के कारण कई टैंकरों को अपना रास्ता बदलना पड़ा या अपनी यात्रा में देरी करनी पड़ी. तनाव कम करने के लिए युद्धविराम और कूटनीतिक कोशिशों के बाद, अमेरिका की सुरक्षा वाले समुद्री रास्ते से तेल और गैस की शिपिंग धीरेधीरे फिर से शुरू हो गई है.
यह बात इसलिए भी बहुत अहम है क्योंकि सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल निर्यातक देश ग्लोबल मार्केट में कच्चा तेल भेजने के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर हैं. जैसेजैसे लंबे समय तक सप्लाई में रुकावट का खतरा कम हुआ है, वैसेवैसे तेल की कीमतों में शामिल जियोपॉलिटिकल प्रीमियम भी कम हो गया है.
कम प्रोडक्शन के बावजूद कीमतें क्यों गिर रही हैं?
पहली नजर में, कीमतों में गिरावट हैरानी की बात लग सकती है क्योंकि OPEC का अपना डेटा दिखाता है कि प्रोडक्शन लड़ाई से पहले देखे गए लेवल से नीचे बना हुआ है. ग्रुप का आउटपुट मई में गिरकर 33.13 मिलियन बैरल प्रति दिन हो गया, जबकि फरवरी में यह 42.77 मिलियन प्रति बैरल , जो इलाके में लड़ाई की वजह से हुई रुकावटों का असर दिखाता है. हालांकि, कमोडिटी मार्केट भविष्य की उम्मीदों को मौजूदा सप्लाई जितना ही महत्व देते हैं.
इन्वेस्टर्स को तेजी से यकीन हो रहा है कि आने वाले महीनों में प्रोडक्शन में सुधार जारी रहेगा क्योंकि एक्सपोर्ट नॉर्मल हो रहा है और OPEC+ लगातार प्रोडक्शन बढ़ा रहा है. लड़ाई खत्म करने के मकसद से वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग ने इस उम्मीद को और मजबूत किया है कि तेल की सप्लाई आखिरकार नॉर्मल हो जाएगी.
कमजोर मांग से दबाव बढ़ रहा है
सप्लाई की कहानी इस समीकरण का सिर्फ एक पहलू है. मांग भी कई ट्रेडर्स की उम्मीद से कमजोर रही है. दुनिया के सबसे बड़े क्रूड इंपोर्टर, चीन में हाल के महीनों में तेल का इंपोर्ट कम हुआ है, क्योंकि आर्थिक विकास में उतारचढ़ाव बना हुआ है और इंडस्ट्रियल एक्टिविटी धीमी हो गई है.
साथ ही, OPEC+ के बाहर तेल का प्रोडक्शन, खासकर अमेरिका के देशों से, मजबूत बना हुआ है, जिससे ग्लोबल मार्केट में कॉम्पिटिशन बढ़ गया है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने भी स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व से रिकॉर्ड मात्रा में तेल जारी किया है, जिससे उपलब्ध सप्लाई और बढ़ गई है. इन सभी बातों को मिलाकर देखें तो, वेस्ट एशिया में जियोपॉलिटिकल रिस्क की चिंताओं पर ये बातें भारी पड़ी हैं.
प्री वॉर लेवल पर आया तेल
संघर्ष के चरम पर, ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई थी क्योंकि ट्रेडर्स को डर था कि होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय के लिए बंद हो सकता है. अब वे डर कम हो गए हैं. कीमतें अब मोटे तौर पर संघर्ष बढ़ने से पहले के स्तर पर वापस आ गई हैं, जो इस उम्मीद को दिखाता है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद ग्लोबल सप्लाई पर्याप्त बनी रहेगी. जानकारों का कहना है कि मार्केट का तुरंत ध्यान जियोपॉलिटिक्स से हटकर सप्लाई और मांग के बीच संतुलन पर आ गया है.
OPEC+ के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं
हालांकि यह संगठन लगातार प्रोडक्शन बढ़ा रहा है, लेकिन इसे अंदरूनी दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है. संयुक्त अरब अमीरात ने इस साल की शुरुआत में प्रोडक्शन समझौते से खुद को अलग कर लिया था, ताकि वह अपनी प्रोडक्शन क्षमता के हिसाब से प्रोडक्शन लेवल बनाए रख सके. वहीं, इराक ने संकेत दिया है कि वह ज़्यादा प्रोडक्शन कोटा चाहता है, जिससे भविष्य की सप्लाई पॉलिसी को लेकर सदस्यों के बीच मतभेद सामने आए हैं.
इसके बावजूद, OPEC+ ने अब तक मार्केट की स्थितियों पर नज़र रखते हुए धीरेधीरे प्रोडक्शन बहाल करने की अपनी रणनीति बनाए रखी है. अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो कंज्यूमर्स के लिए कच्चे तेल की कम कीमतों का मतलब आखिरकार ईंधन की कम लागत हो सकता है. हालांकि, तेल उत्पादक देशों के लिए कीमतों में लगातार कमजोरी सरकारी रेवेन्यू पर दबाव डाल सकती है, खासकर तब जब मांग उम्मीद के मुताबिक न बढ़े.
इसलिए आने वाले कुछ हफ्ते अहम होंगे. अगर होर्मुज स्ट्रेट से तेल का एक्सपोर्ट सामान्य होता रहता है और OPEC+ मांग कम होने के बावजूद प्रोडक्शन बढ़ाना जारी रखता है, तो गर्मियों के बाकी समय में कच्चे तेल की कीमतें दबाव में रह सकती हैं.
भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम
भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम में 43 दिनों से कोई बदलाव देखने को नहीं मिला है. आखिरी बार 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आखिरी बार तेजी देखने को मिली थी. जानकारों की मानें तो जिस तरह से कच्चे तेल की कीमतों में कमी देखने को मिल रही है अनुमान यही है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फ्रीज बटन दबा रहेगा. दिल्ली में पेट्रोल और डीजल की कीमत क्रमश: 102.12 रुपए 95.20 रुपए प्रति लीटर हैं.
कोलकाता में पेट्रोल के दाम 113.51 रुपए और डीजल की कीमत 99.82 रुपए प्रति लीटर है. मुंबई में पेट्रोल और डीजल के दाम क्रमश: 111.21 रुपए और 97.83 रुपए प्रति लीटर देखने को मिल रहे हैं. जबकि चेन्नई में पेट्रोल की कीमत 107.77 रुपए और डीजल 99.55 रुपए प्रति लीटर पर आ गए हैं. वैसे मई के महीने में फ्यूल की कीमतों में 7 से 8 फीसदी का इजाफा देखने को मिला था.




