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60 में रिटायरमेंट, 70 में इलाज का हक? आयुष्मान कार्ड पर हाई कोर्ट ने खींच दी लक्ष्मण रेखा


झारखंड हाई कोर्ट के एक अहम फैसले ने राज्य के बुजुर्गों की उम्मीदों को झटका दिया है. शनिवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि यह सरकार का नीतिगत मामला है और इसमें न्यायपालिका दखल नहीं दे सकती. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ के सामने एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी. इसमें मांग की गई थी कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ पाने की उम्र सीमा 70 साल से घटाकर 60 साल कर दी जाए, ताकि ज्यादा बुजुर्गों को इस योजना का फायदा मिल सके. इस याचिका को लेकर हाई कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया.

हालांकि, कोर्ट ने इस मांग पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका को निष्पादित कर दिया. अदालत का कहना था कि इस तरह के फैसले लेना सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि न्यायपालिका के. इस फैसले के बाद कई बुजुर्गों में निराशा देखी जा रही है, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि उम्र सीमा कम होने से उन्हें भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल पाएगा. अब इस मुद्दे पर आगे क्या फैसला होता है, यह पूरी तरह सरकार की नीति और प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा.

नीतिगत फैसलों में कोर्ट नहीं देगी दखल
अदालत ने इस मामले में साफ कर दिया कि वह सरकार के नीतिगत फैसलों में दखल नहीं देगी. खंडपीठ ने कहा कि 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को पांच लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर देने का निर्णय पूरी तरह से सरकार की नीति का हिस्सा है, और इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की जरूरत नहीं बनती. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी गौर किया कि याचिका में कहीं भी इस योजना के लागू होने में भेदभाव का ठोस आरोप नहीं लगाया गया है. ऐसे में हस्तक्षेप करने का कोई ठोस आधार नहीं बनता.

नीति-निर्माताओं के सामने रखे अपना पक्ष
हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को यह छूट जरूर दी कि वह अपने पक्ष को मजबूत आंकड़ों और तथ्यों के साथ नीति-निर्माताओं के सामने रख सकता है. इसके लिए संबंधित अधिकारियों को एक विस्तृत ज्ञापन देने की अनुमति दी गई है, ताकि सरकार इस पर विचार कर सके. 60 साल की उम्र पार करते ही जिंदगी का एक नया दौर शुरू होता है. रिटायरमेंट के बाद जहां आमदनी सीमित हो जाती है, वहीं स्वास्थ्य संबंधी जरूरतें बढ़ने लगती हैं. इसी चिंता को लेकर अदालत में एक जनहित याचिका दायर की गई थी.

कोर्ट ने याचिका स्वीकार करने से किया इनकार
हालांकि, अदालत ने इस जनहित याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और इसे निष्पादित कर दिया. इसके साथ ही यह स्पष्ट हो गया कि फिलहाल इस मांग पर कोई न्यायिक हस्तक्षेप नहीं होगा. इस फैसले के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या देश के वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा और मजबूत करने की जरूरत है, खासकर उन लोगों के लिए जो रिटायरमेंट के बाद आर्थिक रूप से सीमित हो जाते हैं.

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