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1515 रुपए में पूरा होगा 594 किमी. का सफर, गंगा एक्सप्रेसवे का इंतजार कब होगा खत्म? – Khabar Monkey

1515 रुपए में पूरा होगा 594 किमी. का सफर, गंगा एक्सप्रेसवे का इंतजार कब होगा खत्म? – Khabar Monkey
1515 रुपए में पूरा होगा 594 किमी. का सफर, गंगा एक्सप्रेसवे का इंतजार कब होगा खत्म?

गंगा एक्‍सप्रेसवे पर जल्‍द शुरू होगा सफर.

उत्तर प्रदेश जल्द ही अपने इतिहास के सबसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक को आम जनता के लिए खोलने जा रहा है. मेरठ से प्रयागराज तक बनने वाला 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अब लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है. यह सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक, सामाजिक और भौगोलिक दूरी को कम करने वाला एक नया अध्याय है. पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वी यूपी तक की यात्रा अब पहले से कहीं ज्यादा आसान, तेज और सुरक्षित होने जा रही है.

अब तक जहां मेरठ से प्रयागराज पहुंचने में कई घंटे लगते थे और रास्ते में ट्रैफिक, जाम और खराब सड़कों की परेशानी झेलनी पड़ती थी, वहीं गंगा एक्सप्रेसवे इस अनुभव को पूरी तरह बदलने वाला है. यह एक्सप्रेसवे यूपी के विकास की रीढ़ बनने की क्षमता रखता है.

गंगा एक्सप्रेसवे से आधी हो जाएगाी दूरी

गंगा एक्सप्रेसवे की कुल लंबाई करीब 594 किलोमीटर है, जो इसे देश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे बनाता है. ये एक्सप्रेसवे मेरठ से शुरू होकर प्रयागराज तक जाता है और रास्ते में कई प्रमुख जिलों को जोड़ता है. इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच की दूरी को केवल किलोमीटर में ही नहीं, बल्कि समय और अवसरों में भी कम कर देता है. यह एक्सप्रेसवे उन लोगों के लिए फायदेमंद साबित होगा जो व्यापार, शिक्षा, नौकरी, इलाज या धार्मिक यात्रा के लिए इन दोनों जगहों के बीच नियमित सफर करते हैं. खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर से प्रयागराज, वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में जाने वालों के लिए यह मार्ग सबसे पसंदीदा विकल्प बनने जा रहा है.

Ganga Expressway 2

एक्सप्रेस वे से जेब पर कितना पड़ेगा असर

सबसे ज्यादा चर्चा का विषय यही है कि इस एक्सप्रेसवे पर सफर करने के लिए टोल कितना देना होगा. जारी की गई प्रस्तावित सूची के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति कार या जीप से मेरठ से प्रयागराज तक जाता है, तो उसे लगभग 1515 रुपये टोल देना पड़ सकता है. यदि वही व्यक्ति आने-जाने यानी राउंड ट्रिप करता है, तो कुल टोल करीब 3030 रुपये हो सकता है.

टोल की राशि वाहन के प्रकार और तय दूरी के अनुसार अलग-अलग होगी. भारी वाहनों के लिए टोल अधिक होगा, जबकि दोपहिया और हल्के वाहनों के लिए कम. हालांकि सरकार का दावा है कि इस एक्सप्रेस वे से समय, ईंधन तो बचेगा ही, मानसिक थकान भी कम होगी. ऐसे में यह टोल काफी संतुलित माना जा रहा है.

गंगा एक्सप्रेसवे पर कब दौड़ेंगे वाहन

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे को अगले महीने आम जनता के लिए खोलने की तैयारी है. संभावना जताई जा रही है कि फरवरी के दूसरे सप्ताह में इसका उद्घाटन किया जा सकता है. हालांकि, अभी तक सरकार की ओर से आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं हुई है. लेकिन जिस तरह से ट्रायल रन, सुरक्षा परीक्षण और तकनीकी जांच पूरी हो चुकी है, उससे यह साफ है कि उद्घाटन अब ज्यादा दूर नहीं है. उद्घाटन के साथ ही यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश की सड़क व्यवस्था में एक नई क्रांति लेकर आएगा.

Ganga Expressway 3

अत्याधुनिक टोल सिस्टम और फास्टैग सुविधा

गंगा एक्सप्रेसवे को तकनीकी रूप से भी बेहद आधुनिक बनाया गया है. यहां पूरी तरह फास्टैग आधारित टोल सिस्टम लागू किया गया है. इसका मतलब यह है कि वाहन चालकों को टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कैमरे दूर से ही फास्टैग स्कैन कर लेंगे और टोल अपने आप कट जाएगा. ट्रायल के दौरान देखा गया कि टोल बैरियर सिर्फ 1 से 1.5 सेकंड में खुल जाता है और गाड़ी बिना ब्रेक लगाए आगे निकल जाती है. इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि जाम की समस्या भी लगभग खत्म हो जाएगी. यह सिस्टम खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत भरा होगा जो लंबी दूरी की यात्रा करते हैं और बार-बार रुकने से परेशान रहते हैं.

कहां-कहां बने हैं टोल प्लाजा

गंगा एक्सप्रेसवे पर कई महत्वपूर्ण स्थानों पर टोल प्लाजा बनाए गए हैं. इसमें मेरठ सर्किल में सिंभाली दिल्ली-मुरादाबाद रोड, सदरपुर-गढ़-बुलंदशहर रोड, संभल-अनूपशहर रोड और हसनपुर से अलीगढ़ रोड पर टोल प्लाजा स्थित हैं. इसके अलावा चंदौसी से अलीगढ़ रोड पर भी एक टोल प्लाजा बनाया गया है. इन सभी टोल प्लाजा पर फास्टैग सिस्टम पूरी तरह लागू रहेगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ट्रैफिक सुचारु रूप से चलता रहे और किसी भी स्थान पर लंबा जाम न लगे.

अभी 10 से 12 घंटे में पूरा होता था सफर

गंगा एक्सप्रेसवे शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज की यात्रा में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा. जहां पहले यह सफर 10 से 12 घंटे तक का हो सकता था, वहीं अब यह दूरी लगभग आधे समय में तय की जा सकेगी. इससे न केवल यात्रियों को राहत मिलेगी, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा. ट्रांसपोर्टर्स, व्यापारी, किसान और उद्योगपति सभी इस एक्सप्रेसवे से सीधे लाभान्वित होंगे.

गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ यात्रा को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि यह पूरे क्षेत्र के आर्थिक विकास को भी गति देगा. इसके आसपास नए औद्योगिक क्षेत्र, वेयरहाउस, लॉजिस्टिक हब, होटल, ढाबे और सर्विस सेंटर विकसित होंगे. इससे हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा. पर्यटन के लिहाज से भी यह एक्सप्रेसवे बेहद महत्वपूर्ण है. प्रयागराज, वाराणसी, काशी, संगम, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों तक पहुंच अब और सरल हो जाएगी. इससे देश-विदेश के पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.

सुरक्षा और मजबूती पर दिया गया खास ध्यान

गंगा एक्सप्रेसवे को केवल लंबा ही नहीं, बल्कि बेहद मजबूत और सुरक्षित भी बनाया गया है. इस एक्सप्रेसवे पर 7 रोड ओवरब्रिज, 17 इंटरचेंज, 14 बड़े पुल, 126 छोटे पुल, 28 फ्लाईओवर, 50 वाहन अंडरपास, 171 हल्के वाहन अंडरपास और 160 छोटे वाहन अंडरपास बनाए गए हैं. इन सभी संरचनाओं को इस तरह डिजाइन किया गया है कि भारी ट्रैफिक, बारिश, बाढ़ और समय की मार को आसानी से सहन कर सकें. इसके अलावा, एक्सप्रेसवे पर आधुनिक संकेतक, रिफ्लेक्टिव मार्किंग, इमरजेंसी लेन और सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं.

यह एक्सप्रेसवे 140 से ज्यादा जल स्रोतों के ऊपर से होकर गुजरता है. इन स्थानों पर विशेष तकनीक का इस्तेमाल कर पुल और संरचनाएं बनाई गई हैं ताकि पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचे और जल प्रवाह बाधित न हो. डिजाइन में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि बारिश या बाढ़ की स्थिति में भी एक्सप्रेसवे सुरक्षित रहे और यातायात बाधित न हो.

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