पीरियड साइकिल के दौरान महिलाओं के शरीर में कई हार्मोनल उतारचढ़ाव होते हैं, जिनका असर मूड और एनर्जी लेवल पर भी पड़ता है।

पीरियड साइकिल सिर्फ पीरियड्स के 3 या 5 दिन नहीं होते, बल्कि पीरियड्स शुरू होने से लेकर अगले पीरियड्स आने तक की पूरी साइकिल को पीरियड साइकिल कहा जाता है। आमतौर पर यह 28 दिनों का होता है और इस दौरान फीमेल रिप्रोडक्टिव हार्मोन एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर बदलता रहता है।
हार्मोन्स में होने वाले इस बदलाव की वजह से महिलाओं के शरीर, मूड और एनर्जी में भी बदलाव आते हैं। इन बदलावों को समझने के लिए आपको पीरियड साइकिल के 4 स्टेजेस के बारे में जानना होगा।
मेंस्ट्रुअल फेज
यह आपके पीरियड का पहला दिन होता है। हर महीने महिलाओं के यूटेरस में एंटोमेट्रियम टिश्यू की परत बनती है। जब प्रेग्नेंसी नहीं होती, तो शरीर इस परत को बाहर निकाल देता है। इस फेज में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दोनों का ही स्तर कम हो जाता है। इसके कारण इस दौरान शरीर थका हुआ महसूस करता है और मूड भी चिड़चिड़ा हो सकता है। पीरियड्स के दौरान पेट के निचले हिस्से में दर्द, पीठ दर्द, हैवीनेस और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
फॉलिकुलर फेज
ये फेज पीरियड्स शुरू होने से साथ ही शुरू हो जाता है और ओव्यूलेशन फेज शुरू होने पर खत्म होता है। इसलिए यह मेंस्ट्रुअल फेज से ओवरलैप करता है। इस फेज में ओवरीज में मौजूद फॉलिकल्स विकसित होने लगते हैं, जिसके लिए फॉलिकुलर स्टिमुलेटिंग हार्मोन रिलीज करता है। इस दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर भी बढ़ता है और पीरियड्स खत्म होती ही यूटेरस की लाइनिंग फिर से बनने लगती है। एस्ट्रोजन बढ़ने से आपका मूड अच्छा होता है और आप एनर्जेटिक महसूस करते हैं। साथ ही, स्किन में भी ग्लो आने लगता है, ब्लोटिंग और हैवीनेस जैसी परेशानियां भी दूर हो जाती हैं।
ओव्यूलेशन फेज
ये पीरियड साइकिल का सबसे छोटा फेज होता है। इस फेज में ओवरी से ऐग रिलीज होता है। ऐग रिलीज करने के लिए ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन रिलीज होता है। साथ ही, एस्ट्रोजन हार्मोन भी अपने पीक पर होता है और टेस्टोस्टेरोन हार्मोन भी थोड़ा बढ़ जाता है।
इन हार्मोन्स की वजह से आप खुद को ज्यादा एनर्जेटिक, सोशल और खूबसूरत महसूस करती हैं। साथ ही, इस दौरान व्हाइट डिसचार्ज भी थोड़ा गाढ़ा और चिपचिपा हो जाता है।
ल्यूटियल फेज
ऐग रिलीज होने के बाद शरीर खुद को प्रेग्नेंसी के लिए तैयार करता है। इस दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन गिर जाता है और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन तेजी से बढ़ता है। इस हार्मोन के बढ़ने की वजह से आपको सुस्ती महसूस होती है। अगर प्रेग्नेंसी नहीं होती, तो साइकिल के आखिरी हफ्ते में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन, दोनों हार्मोन का स्तर गिर जाता है और PMS शुरू होता है। इससे मूड स्विंग्स, बिना बात रोना आना, गुस्सा और एंग्जायटी जैसे लक्षण नजर आते हैं। इस फेज में ब्रेस्ट में भारीपन, शरीर में वॉटर रिटेंशन, एक्ने और फास्ट फूड की क्रेविंग्स भी बढ़ जाती हैं।




