
धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश में पेट्रोल और डीजल की कीमत बढ़ाने के फैसले को लेकर लोगों में नाराज़गी देखने को मिल रही है. सुक्खू सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी को ‘वेलफेयर सेस’ बताया है, जिसका उद्देश्य विधवाओं और अनाथ बच्चों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के लिए नियमित आय का स्रोत तैयार करना है.
धर्मशाला के एक पेट्रोल पंप मैनेजर देवेंद्र पठानिया ने कहा कि कीमत बढ़ने से हिमाचल के पेट्रोल पंप कारोबार पर बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि यहां ईंधन के दाम पंजाब और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों से ज्यादा हो जाएंगे. उन्होंने कहा कि सीमा सिर्फ 70–80 किलोमीटर दूर है, इसलिए लोग दूसरे राज्यों से पेट्रोल-डीजल खरीदना पसंद करेंगे. इससे कारोबार प्रभावित होगा और महंगाई भी बढ़ेगी.
बीजेपी के हिमाचल प्रदेश प्रवक्ता राकेश शर्मा ने कहा कि सरकार का उद्देश्य भले ही विधवाओं और विशेष बच्चों की मदद करना हो, लेकिन 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी बहुत ज्यादा है और इसका असर गरीब लोगों पर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि राज्य में रेलवे सुविधा सीमित है और आम लोग बसों पर निर्भर हैं, इसलिए किराए बढ़ने की संभावना है.
सेवानिवृत्त कर्मचारी बीसी बरवाल ने कहा कि यह फैसला आम जनता के हित में नहीं है और सरकार को अन्य संसाधनों से आय बढ़ाने के उपाय करने चाहिए. टैक्सी मालिक नवीन गुलेरिया ने कहा कि 20 या 50 पैसे की बढ़ोतरी समझ में आती, लेकिन 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ज्यादा है, इसलिए सरकार को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए.
पर्यटन क्षेत्र से जुड़े चंदर ने कहा कि ईंधन की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से टैंक भराने पर लगभग 500 रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा. उन्होंने कहा कि टैक्सी चालक अक्सर दूसरे राज्यों में जाते हैं और कम कीमत होने पर वहां से पेट्रोल-डीजल खरीदना पसंद करेंगे, जिससे राज्य के कारोबार पर असर पड़ेगा.





