
यूपी-हरियाणा सीमा से जुड़ी यमुना खादर भूमि को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है. बागपत और हरियाणा के किसानों के बीच जमीन के नामांतरण को लेकर तनातनी बढ़ती जा रही है. इसी मुद्दे को लेकर बागपत के पाली गांव के सैकड़ों किसान शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताते हुए न्याय की गुहार लगाई.
किसानों का आरोप है कि हरियाणा प्रशासन बिना वैध दस्तावेजों के यूपी के किसानों की जमीन हरियाणा के किसानों के नाम दर्ज कर रहा है. जबकि विवादित भूमि बागपत के किसानों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है. किसानों ने जिला मजिस्ट्रेट अस्मिता लाल को ज्ञापन सौंपकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की है.
UP vs हरियाणा विवाद
दरअसल विवाद यमुना खादर क्षेत्र की भूमि को लेकर है. किसानों का कहना है कि उनके पास जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं, इसके बावजूद हरियाणा प्रशासन अवैध रूप से उनकी जमीन का नामांतरण कर रहा है. किसानों ने आरोप लगाया कि बिना समुचित जांच के जमीन को दूसरे राज्य के किसानों के नाम दर्ज किया जा रहा है, जिससे बागपत के किसानों का आर्थिक और सामाजिक शोषण हो रहा है. किसानों का कहना है कि प्रशासन उनकी शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं कर रहा.
किसानों का आरोप और प्रशासन पर सवाल
पाली गांव के किसान राकेश ने बताया कि यूपी-हरियाणा की सीमा को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है. उन्होंने कहा कि वर्ष 1974 में बनाए गए नियम, जिसे ‘दीक्षित अवार्ड’ कहा जाता है, के तहत यमुना नदी को यूपी और हरियाणा की सीमा माना गया है. साथ ही यह भी तय किया गया था कि जो जमीन जिस राज्य की है, वह उसी राज्य की मानी जाएगी, भले ही उसका राजस्व रिकॉर्ड दूसरे राज्य में दर्ज हो.
हरियाणा प्रशासन के फैसले का विरोध
किसान राकेश ने आरोप लगाया कि हरियाणा के किसानों की जमीन तो यूपी के दस्तावेजों में दर्ज हो गई, लेकिन यूपी के किसानों की जमीन न तो यूपी के दस्तावेजों में बची और न ही सही तरीके से हरियाणा के अभिलेखों में दर्ज की गई. उन्होंने बताया कि हाल ही में हरियाणा का पुलिस और प्रशासनिक अमला पाली गांव पहुंचा और यूपी के किसानों की जमीन हरियाणा के किसानों के नाम दर्ज करने की कोशिश की, जिसका ग्रामीणों ने विरोध किया.
किसानों ने दी आंदोलन की धमकी
किसानों ने मांग की है कि जिन मामलों में वे अदालत से जीत चुके हैं, उन जमीनों को नियमानुसार हरियाणा के दस्तावेजों में उनके नाम दर्ज किया जाए. अन्यथा, बागपत जिला प्रशासन यूपी के किसानों की जमीन को यूपी के राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराए. किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन को मजबूर होंगे.





