Tuesday, February 24, 2026
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हरियाणा सरकार के खातों में, हुई 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी चार कर्मचारी निलंबित पढ़ें गड़बड़

हरियाणा सरकार के खातों में, हुई 590 करोड़ रुपये की हेराफेरी चार कर्मचारी निलंबित पढ़ें गड़बड़

चंडीगढ़: आइडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को निजी क्षेत्र के ऋणदाता के साथ हरियाणा सरकार के खातों में अपने कर्मचारियों और अन्य लोगों द्वारा की गई 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा किया। शेयर बाजार को दी जानकारी में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा कि उसने बैंकिंग नियामक को मामले की जानकारी दी है और पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। बैंक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायतें दर्ज कराने की तैयारी कर रहा

मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक ने चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। बैंक कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष अतिरिक्त शिकायतें दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है। बैंक ने बताया कि शुरुआती जांच में पाया गया कि चंडीगढ़ की एक विशेष शाखा में कुछ कर्मचारियों ने हरियाणा सरकार के खातों में बिना अनुमति और धोखाधड़ी की गतिविधियां कीं, जिसमें अन्य व्यक्ति/इकाइयां भी शामिल हो सकते हैं।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा कि वर्तमान में धोखाधड़ी की राशि 590 करोड़ अनुमानित है। बैंक ने बताया कि उक्त शाखा में पहचाने गए खातों में कुल राशि लगभग 590 करोड़ रुपए के आसपास है। बैंक ने स्पष्ट किया कि हरियाणा सरकार के एक विभाग से खाता बंद करने और धनराशि को दूसरे बैंक में स्थानांतरित करने का अनुरोध प्राप्त होने के बाद खाते में उल्लिखित राशि और वास्तविक शेष राशि में कुछ विसंगतियां देखी गईं। 18 फरवरी, 2026 से, हरियाणा सरकार की कुछ अन्य संस्थाओं ने बैंक में अपने खातों के संबंध में बैंक से संपर्क किया।

कुल राशि लगभग 590 करोड़ रुपए

इस प्रक्रिया के दौरान, खातों में मौजूद शेष राशि और बैंक में खाता रखने वाली हरियाणा सरकार की संस्थाओं द्वारा बताई गई शेष राशि में अंतर पाया गया। बैंक ने एनएसई को सूचित किया। बैंक के अनुसार, यह मामला हरियाणा सरकार के अंतर्गत आने वाले सरकारी खातों के एक विशिष्ट समूह तक ही सीमित है, जिनका संचालन चंडीगढ़ शाखा के माध्यम से किया जाता है और यह चंडीगढ़ शाखा के अन्य ग्राहकों तक विस्तारित नहीं होता है। बैंक ने आगे कहा कि उपरोक्त शाखा में चिन्हित खातों में मिलान के तहत कुल राशि लगभग 590 करोड़ रुपए है।

आगे की जानकारी प्राप्त होने, दावों के सत्यापन, अन्य बैंकों में रखे गए धोखाधड़ी वाले लाभार्थी खातों पर ग्रहणाधिकार लगाने की प्रक्रिया सहित किसी भी प्रकार की वसूली, धोखाधड़ी वाले लेनदेन में शामिल अन्य संस्थाओं की देनदारियों और कानूनी वसूली प्रक्रिया के आधार पर प्रभाव का निर्धारण किया जा सकता है।

इस घोटाले के खुलासे के बाद 20 और 21 फरवरी को बैंक की बोर्ड बैठक और ऑडिट कमेटी की आपात बैठकें हुईं। बैंक ने भरोसा दिलाया है कि वे जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं। बैंक नुकसान की भरपाई के लिए अन्य शामिल संस्थाओं की देनदारी और कानूनी रिकवरी प्रक्रिया पर काम कर रहा है। धोखाधड़ी का खुलासा 18 फरवरी को तब हुआ, जब सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद करने, पैसा दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने का अनुरोध किया।

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