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सोना हुआ सस्ता तो टूट पड़े खरीदार! क्या अब फिर आएगी रिकॉर्ड तेजी?​

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखने को मिली है. यह पिछले छह सप्ताह की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है. हालांकि, कीमतों में आई इस नरमी ने निवेशकों को फिर से सोने की ओर आकर्षित किया है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय […]

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में हाल के दिनों में तेज गिरावट देखने को मिली है. यह पिछले छह सप्ताह की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट मानी जा रही है. हालांकि, कीमतों में आई इस नरमी ने निवेशकों को फिर से सोने की ओर आकर्षित किया है. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय के निवेशक इस गिरावट को खरीदारी के अच्छे अवसर के रूप में देख रहे हैं.

मिडिल ईस्ट संकट ने बढ़ाई सुरक्षित निवेश की अहमियत

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और भूराजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बनी हुई है. ऐसे समय में निवेशक आमतौर पर सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं. हालांकि, इस बार युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका भी गहरी हुई है. इसी वजह से सोने की कीमतों पर एक तरफ सुरक्षित निवेश की मांग का असर है, तो दूसरी ओर ऊंची ब्याज दरों की संभावना दबाव बना रही है.

अमेरिकी ब्याज दरें भी बनीं बड़ी वजह

विशेषज्ञों के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है. उल्टा, बाजार में यह संभावना बढ़ी है कि महंगाई पर काबू पाने के लिए फेड ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है या फिर एक और बढ़ोतरी कर सकता है. ऊंची ब्याज दरों से सोने की मांग पर असर पड़ता है, क्योंकि सोना ब्याज देने वाली संपत्ति नहीं है. इसके साथ ही मजबूत अमेरिकी डॉलर भी सोने की कीमतों पर दबाव डाल रहा है.

ज्वेलरी बाजार में भी बढ़ी हलचल

कीमतों में आई गिरावट का असर सर्राफा बाजार में भी देखने को मिल रहा है. ऊंचे दाम के कारण खरीदारी टाल रहे ग्राहक अब फिर से बाजार का रुख कर रहे हैं. कारोबारियों का कहना है कि त्योहारों और शादीब्याह के सीजन से पहले सोने की मांग में और तेजी आ सकती है. वहीं, चांदी की तुलना में निवेशकों की दिलचस्पी फिलहाल सोने में अधिक बनी हुई है.

आगे कैसी रह सकती है सोने की चाल?

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने की कीमतों की दिशा कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी. यदि मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग मजबूत हो सकती है. वहीं, यदि अमेरिकी फेड ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखता है या डॉलर और मजबूत होता है, तो सोने पर दबाव बना रह सकता है. ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम, महंगाई के आंकड़ों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर रखनी चाहिए. फिलहाल बाजार में उतारचढ़ाव जारी रहने की संभावना है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अब भी पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा माना जा रहा है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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