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सैलरीड कर्मचारियों के लिए अलर्ट! ITR फाइलिंग की ये 7 गलतियां बुला सकती हैं टैक्स नोटिस​

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का सीजन चल रहा है और लाखों नौकरीपेशा लोग अपना रिटर्न भर रहे हैं. हालांकि, टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि ITR फाइल करते समय की गई छोटीसी गलती भी बाद में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. गलत जानकारी देने, किसी आय को छिपाने या दस्तावेजों का सही […]

इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने का सीजन चल रहा है और लाखों नौकरीपेशा लोग अपना रिटर्न भर रहे हैं. हालांकि, टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि ITR फाइल करते समय की गई छोटीसी गलती भी बाद में बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है. गलत जानकारी देने, किसी आय को छिपाने या दस्तावेजों का सही मिलान नहीं करने पर टैक्स नोटिस आने के साथ अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है.

सिर्फ Form16 पर निर्भर रहना सही नहीं

अधिकांश सैलरीड कर्मचारी ITR भरते समय केवल Form16 के आधार पर रिटर्न दाखिल कर देते हैं. लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह सबसे आम गलतियों में से एक है. रिटर्न भरने से पहले Annual Information Statement और Form 26AS में दर्ज जानकारी का मिलान जरूर करना चाहिए. कई बार इनमें बैंक ब्याज, टीडीएस या अन्य वित्तीय लेनदेन की ऐसी जानकारी होती है, जो Form16 में शामिल नहीं होती.

सभी आय के स्रोत जरूर बताएं

ITR भरते समय केवल वेतन की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है. बैंक एफडी और सेविंग अकाउंट का ब्याज, शेयर या म्यूचुअल फंड से कैपिटल गेन, किराये की आय, फ्रीलांस कमाई या अन्य किसी स्रोत से हुई आय भी रिटर्न में शामिल करनी चाहिए. किसी भी आय को छिपाने पर आयकर विभाग की ओर से नोटिस आ सकता है.

सही टैक्स रिजीम का करें चुनाव

पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में से सही विकल्प चुनना भी बेहद जरूरी है. कई कर्मचारी बिना गणना किए टैक्स रिजीम चुन लेते हैं, जिससे उन्हें ज्यादा टैक्स देना पड़ सकता है. रिटर्न दाखिल करने से पहले दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स देनदारी की तुलना करना बेहतर रहता है.

गलत कटौतियों का दावा न करें

विशेषज्ञों का कहना है कि बिना पर्याप्त दस्तावेजों के टैक्स छूट या कटौती का दावा नहीं करना चाहिए. धारा 80C, 80D, होम लोन ब्याज या अन्य छूट तभी क्लेम करें, जब आपके पास उसके वैध प्रमाण मौजूद हों. गलत दावा करने पर विभाग उसे अस्वीकार कर सकता है और अतिरिक्त टैक्स के साथ ब्याज भी देना पड़ सकता है.

बैंक डिटेल और ईवेरिफिकेशन भी है जरूरी

रिटर्न भरते समय बैंक खाते की जानकारी सही देना भी बेहद महत्वपूर्ण है. गलत बैंक खाता या IFSC कोड भरने से टैक्स रिफंड अटक सकता है. इसके अलावा ITR दाखिल करने के बाद समय पर ईवेरिफिकेशन करना भी जरूरी है. अगर तय समय सीमा में रिटर्न सत्यापित नहीं किया गया, तो ITR को मान्य नहीं माना जाएगा.

रिटर्न भरने से पहले करें अंतिम जांच

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ITR जमा करने से पहले सभी दस्तावेजों की एक बार फिर जांच जरूर करें. Form16, AIS, Form 26AS, बैंक स्टेटमेंट और निवेश के रिकॉर्ड का मिलान कर लें. यदि किसी प्रकार का संदेह हो, तो टैक्स विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा. थोड़ीसी सावधानी न केवल टैक्स नोटिस से बचा सकती है, बल्कि अनावश्यक वित्तीय नुकसान से भी बचाने में मदद करेगी.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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