Tuesday, February 24, 2026
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सचिन से लेकर विराट कोहली, रोहित या धोनी… इन दिग्गजों के घर ही क्यों जन्म लेती हैं बेटियां? एक्सपर्ट्स ने बताया वजह

सचिन से लेकर विराट कोहली, रोहित या धोनी… इन दिग्गजों के घर ही क्यों जन्म लेती हैं बेटियां? एक्सपर्ट्स ने बताया वजह

Why Indian Cricket Kings Have Princesses: भारतीय क्रिकेट के दिग्गजों के घर बेटियों के जन्म को लेकर चर्चा तेज है. एक मेडिकल एक्सपर्ट ने हाई प्रेशर और तनाव को संभावित कारण बताया है. हालांकि यह सिद्धांत पूरी तरह साबित नहीं है और इस पर सोशल मीडिया पर बहस जारी है.

भारतीय क्रिकेट के बड़े नाम मैदान पर रिकॉर्ड बनाते रहे हैं, लेकिन उनकी निजी जिंदगी में एक और दिलचस्प बात लोगों का ध्यान खींच रही है. विराट कोहली, रोहित शर्मा और महेंद्र सिंह धोनी जैसे दिग्गजों के घर बेटियों का जन्म हुआ है. यही नहीं, इस लिस्ट में अजिंक्य रहाणे, आर अश्विन और सचिन तेंदुलकर जैसे नाम भी शामिल हैं. अब सवाल उठ रहा है कि क्या यह सिर्फ एक संयोग है या इसके पीछे कोई वैज्ञानिक वजह छिपी है? एक मेडिकल एक्सपर्ट ने इस पैटर्न पर ऐसा संकेत दिया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर आम लोगों तक को सोचने पर मजबूर कर दिया है.

हाई प्रेशर को लेकर डॉक्टर ने बताया
आमतौर पर तनाव को सेहत के लिए नुकसानदायक माना जाता है, लेकिन डॉक्टर सिद्धांत भार्गव इसे थोड़ा अलग नजरिए से देखते हैं. उनका कहना है कि जो खिलाड़ी सालों तक अत्यधिक दबाव में खेलते हैं, उनके जीवन में यह तनाव कुछ जैविक बदलाव ला सकता है. भारतीय क्रिकेटर्स लगातार मैच जीतने, प्रदर्शन बनाए रखने और उम्मीदों के बोझ के नीचे खेलते रहे हैं. डॉक्टर के मुताबिक, यही लगातार बना रहने वाला दबाव एक खास पैटर्न की ओर इशारा करता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

बेटियों का पैटर्न और क्रिकेट सितारे
विराट कोहली, रोहित शर्मा और एमएस धोनी तीनों ही दिग्गज क्रिकेटर्स बेटियों के पिता हैं. डॉक्टर भार्गव के अनुसार, यह सिर्फ इत्तेफाक नहीं हो सकता. कुछ अध्ययनों में इशारा किया गया है कि जो पुरुष लंबे समय तक हाई-स्ट्रेस माहौल में रहते हैं, उनमें बेटियों के जन्म की संभावना थोड़ी बढ़ सकती है. एलिट एथलीट्स पर लगातार शारीरिक और मानसिक दबाव रहता है, जो उनके शरीर में हार्मोनल बदलाव ला सकता है.

क्रोमोसोम, हार्मोन और अधूरा विज्ञान
डॉक्टर सिद्धांत भार्गव का कहना है कि ज्यादा तनाव से कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं. इससे स्पर्म में X और Y क्रोमोसोम के संतुलन पर असर पड़ सकता है. उनका मानना है कि हाई प्रेशर और अत्यधिक शारीरिक मेहनत महिला शिशु के जन्म की संभावना को बढ़ा सकती है. हालांकि, उन्होंने साफ कहा कि यह सिद्धांत अभी पूरी तरह वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं हुआ है, लेकिन जो पैटर्न सामने आ रहा है, वह काफी दिलचस्प है.

सोशल मीडिया पर छिडी बहस
डॉक्टर की इस बात पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ यूजर्स ने इसे मजेदार नजरिए से लिया, तो कुछ ने इसे खतरनाक सोच बताया. एक यूजर ने चेतावनी दी कि भारत जैसे देश में, जहां अब भी बेटियों को लेकर भेदभाव मौजूद है, ऐसी बातें गलत संदेश दे सकती हैं. आलोचकों का कहना है कि इसे संयोग से ज्यादा कुछ मानना ठीक नहीं और ऐसे विषयों पर संवेदनशीलता बेहद जरूरी है.

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