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शेयर बाजार में 25 साल का सबसे बड़ा झटका! लगातार 8वें हफ्ते गिरावट की कगार पर निफ्टी​

भारतीय शेयर बाजार इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे गहरे और चुनौतीपूर्ण मंदी के दौर से गुजर रहा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 लगातार 8वें हफ्ते साप्ताहिक गिरावट का सामना कर रहा है, जो पिछले 25 वर्षों में इसकी सबसे लंबी गिरावट की बनने के बेहद करीब पहुंच गई है. […]

भारतीय शेयर बाजार इस समय अपने हालिया इतिहास के सबसे गहरे और चुनौतीपूर्ण मंदी के दौर से गुजर रहा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 लगातार 8वें हफ्ते साप्ताहिक गिरावट का सामना कर रहा है, जो पिछले 25 वर्षों में इसकी सबसे लंबी गिरावट की बनने के बेहद करीब पहुंच गई है. विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली, सुस्त कॉर्पोरेट इनकम, और ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक प्रेशर के कारण बेंचमार्क इंडेक्स अपने हालिया हाई लेवल्स से लगातार नीचे खिसका है. बाजार जानकार और ट्रेडर्स अब इस बात पर टकटकी लगाए हैं कि क्या प्रमुख सपोर्ट लेवल्स पर ‘बुल्स’ वापसी करके बिकवाली के इस ऐतिहासिक सिलसिले को रोक पाएंगे या बाजार और गहरे लाल निशान में समा जाएगा. आइए इसे विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं…

25 साल का टूट सकता है रिकॉर्ड

  1. निफ्टी 50 एक हफ़्ते की क्लोजिंग के साथ ही एक ऐसे माइलस्टोन के करीब है जो आखिरी बार 25 साल पहले देखा गया था.
  2. लगातार सातवें हफ्ते गिरावट के साथ बंद होने के बाद, अगर इस हफ़्ते बाज़ार में तेज़ी नहीं आती है, तो बेंचमार्क इंडेक्स लगातार आठवें हफ्ते भी नुकसान दर्ज करेगा.
  3. यह 2001 के बाद से लगातार गिरावट का सबसे लंबा दौर होगा, जब Nifty लगातार नौ हफ्तों तक गिरा था. फिर भी, मौजूदा गिरावट पहले के लंबे समय तक चली गिरावट के मुकाबले काफी कम गंभीर है.
  4. 25 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते के आखिर में Nifty50 23,140.5 पर था, और सात हफ्तों में कुल गिरावट 5.8 फीसदी रही.
  5. इसकी तुलना 21 सितंबर, 2001 को खत्म हुए सात हफ्तों के गिरावट के दौर में 20.5 फीसदी के नुकसान, 4 जुलाई, 2008 को खत्म हुए दौर में 22.1 फीसदी और 3 अप्रैल, 2020 को खत्म हुए सात हफ्तों के दौर में 33.3 फीसदी के नुकसान से की जा सकती है.
  6. इंडेक्स में लगातार गिरावट का सबसे लंबा दौर 23 अप्रैल, 1993 को खत्म हुई अवधि में 10 हफ्तों का था, जब यह 22.9 फीसदी गिरा था.
  7. निफ्टी 13 अप्रैल, 2001 को खत्म हुई अवधि में भी नौ हफ्तों तक गिरा था और 27.1 फीसदी का नुकसान हुआ था. निफ्टी50 को आधिकारिक तौर पर 22 अप्रैल, 1996 को लॉन्च किया गया था, जबकि पहले की अवधि के लिए कैलकुलेशन बाद में किए गए थे.
  8. इस हफ्ते से पहले, बेंचमार्क ने पिछले 25 सालों में केवल चार बार लगातार सात या उससे ज्यादा हफ्तों तक गिरावट दर्ज की थी—2020 में, 2008 में और दो बार 2001 में.
  9. लगातार आठवें हफ्ते गिरावट की संभावना ने अब बाजार की आम गिरावट को एक रिकॉर्ड बनने की घटना में बदल दिया है.

टेक्निकल स्ट्रक्चर अभी भी कमज़ोर है

टेक्निकल एनालिस्ट्स का कहना है कि बेंचमार्क डेली टाइमफ्रेम पर लगातार ‘लोअर टॉप’ और ‘लोअर बॉटम’ बना रहा है. निफ्टी अभी एक नया ‘लोअर बॉटम’ बनाने के प्रोसेस में है और लोअर लेवल्स से किसी बड़ी रिकवरी की अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है.

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि निफ्टी का अंडरलाइंग ट्रेंड कमज़ोर बना हुआ है. 22,90023,000 के लेवल तक कोई भी उछाल थोड़े समय के लिए हो सकता है, और इसे ‘सेलऑनराइज’ का मौका माना जा रहा है. 22,550 के नीचे और कमज़ोरी आने पर निकट भविष्य में 22,200 के स्तर तक गिरावट आ सकती है. SBI सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह ने मीडिया रिपोर्ट में कहर कि मोमेंटम इंडिकेटर्स लगातार कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं.

शाह ने कहा कि टेक्निकल नजरिए से देखें तो RSI 40 से नीचे बना हुआ है, जबकि MACD जीरो लाइन के नीचे लगातार नीचे की ओर झुका हुआ है, जिससे मोमेंटम कमजोर बना हुआ है. ADX लगातार बढ़ रहा है, जो बताता है कि बेयरिश ट्रेंड की मजबूती बनी हुई है. निफ्टी अपने 20दिन और 50दिन के EMA से नीचे ट्रेड कर रहा है. उन्होंने कहा कि किसी बड़े बदलाव के लिए शॉर्ट कवरिंग के साथसाथ लगातार फॉलोअप बाइंग की जरूरत होगी. तब तक, ब्रॉडर स्ट्रक्चर स्ट्रक्चर बेयरिश बना रहेगा.

ग्लोबल मैक्रो प्रेशर

तकनीकी कमजोरी खराब ग्लोबल मैक्रोइकोनॉमिक माहौल के बीच आई है. ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल से ऊपर ट्रेड कर रहा है, जबकि US 10साल की ट्रेजरी यील्ड 5% से ऊपर है. विदेशी निवेशकों ने इस महीने भारतीय बाजारों से लगभग 26,000 करोड़ रुपए निकाले हैं, जिससे उनकी कुल विकवाली लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए हो गई है. सख्त मॉनेटरी पॉलिसी की संभावना इक्विटी के लिए जोखिम का एक और कारण बन गई है.

बोफा सिक्योरिटीज को अब उम्मीद है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया अक्टूबर की मॉनेटरी पॉलिसी मीटिंग में अपनी पॉलिसी रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी करेगा, जो लगभग दो साल की आसान मॉनेटरी पॉलिसी के बाद होगा. ब्रोकरेज ने रेट बढ़ोतरी की कुल मात्रा के अपने अनुमान को भी दोगुना कर 50 बेसिस पॉइंट से बढ़ाकर 100 बेसिस पॉइंट कर दिया है.

ब्रोकरेज ने एनर्जी की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी और फ्यूल की कीमतें बढ़ने की संभावना के बीच सप्लाईसाइड महंगाई के बढ़ते जोखिमों का हवाला दिया. इसने यह भी कहा कि मजबूत ग्रोथ महंगाई की उम्मीदों को ऊंचा रख सकती है, जिससे जोखिम का संतुलन ग्रोथ को बचाने के बजाय महंगाई को कंट्रोल करने की ओर शिफ्ट हो सकता है.

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि क्रूड की कीमतों में उतारचढ़ाव, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और लगातार FII की निकासी घरेलू इक्विटी और रुपए पर दबाव डाल रही है. नायर ने कहा कि घरेलू इक्विटी को क्रूड की कीमतों में उतारचढ़ाव, US ट्रेजरी यील्ड के दो दशक के उच्चतम स्तर के करीब रहने और रुपए पर दबाव डालने वाली लगातार FII निकासी के बीच करेक्शनजनित चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने IPO फंडरेजिंग की रफ्तार को भी लिक्विडिटी कम होने का एक और कारण बताया.

Nifty 50

किस ओर इशारा कर रही है निफ्टी की वैल्यूएशन

बाजार के सभी जानकार ये मानकर चल रहे है कि अब इससे ज्यादा गिरावट नहीं आएगी. मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में वेल्थ मैनेजमेंट के रिसर्च हेड, सिद्धार्थ खेमका ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि डीआईआई और डॉमेस्टिक डाटा ग्लोबल कमजोरी की भरपाई कर रही हैं. उन्होंने अगस्त में IIP ग्रोथ के 8 फीसदी रहने, शहरी इलाकों में गैरजरूरी चीजों की मांग में सुधार और मजबूत जीडीपी ग्रोथ का जिक्र किया.

खेमका ने कहा कि 6.8 फीसदी की गिरावट के बाद, वैल्यूएशन अब काफी सही लेवल पर आ गए हैं, और मौजूदा लेवल्स से और गिरावट सीमित होनी चाहिए. एल्केमी कैपिटल मैनेजमेंट के डिप्टी CIO आलोक अग्रवाल ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि कम रिटर्न और धीमी कमाई ग्रोथ के दौर के बाद निफ्टी अपेक्षाकृत सस्ता हो गया है. उन्होंने बताया कि निफ्टी 50 सितंबर 2024 में 21.5x के मुकाबले सितंबर 2026 के लिए 17.4x के ‘वनईयर फॉरवर्ड प्राइसटूअर्निंग्स मल्टीपल’ पर ट्रेड कर रहा था. इसी दौरान, इंडेक्स में 11 फीसदी की गिरावट आई, जबकि कमाई बढ़ती रही, भले ही उसकी रफ्तार धीमी थी.

लार्जकैप और मिडकैप में उनके हाई लेवल्स से क्रमशः 29 फीसदी और 27 फीसदी की सबसे ज्यादा वैल्यूएशन गिरावट देखी गई, जबकि स्मॉलकैप में 12महीने के फॉरवर्ड P/E आधार पर उनके पीक से 4 फीसदी की गिरावट आई. ब्रोकरेज ने बताया कि निफ्टी 50 अपने LPA से 16 फीसदी नीचे ट्रेड कर रहा था, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप अपनेअपने LPA से क्रमशः 4 फीसदी और 27 फीसदी ऊपर ट्रेड कर रहे थे. इसकी तुलना सितंबर 2024 में क्रमशः 20 फीसदी, 50 फीसदी और 47 फीसदी के प्रीमियम से की गई. मोतीलाल ओसवाल ने कहा कि वैल्यूएशन अब अपने पीक से काफी नीचे हैं, कमाई में अच्छी बढ़ोतरी हो रही है और मैक्रो माहौल मजबूत बना हुआ है, इसलिए हमारा मानना ​​है कि भारतीय इक्विटी के लिए रिस्करिवॉर्ड और बेहतर हुआ है.

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संपादकीय टीम

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