
बिहार के सियासी गलियारों में इस वक्त जबरदस्त हलचल है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कभी बेहद करीबी रहे बांका सांसद गिरधारी यादव पर अब उनकी अपनी ही पार्टी, जनता दल यूनाइटेड ने गाज गिराने की तैयारी कर ली है. पार्टी विरोधी गतिविधियों के गंभीर आरोपों के चलते जदयू ने गिरधारी यादव की लोकसभा सदस्यता समाप्त करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है.
लोकसभा स्पीकर को भेजा गया नोटिस
इस पूरे मामले में जदयू ने सख्त रुख अपनाते हुए अनुशासन का चाबुक चलाया है. जदयू संसदीय दल के नेता और सुपौल सांसद दिलेश्वर कामत ने लोकसभा स्पीकर को औपचारिक नोटिस भेजकर गिरधारी यादव की सदस्यता खत्म करने की मांग की है. पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अनुशासन बनाए रखने के लिए यह कड़ा कदम उठाना अनिवार्य हो गया था.
‘तुगलकी फरमान’ वाले बयान पर फंसा पेंच
सांसद गिरधारी यादव और पार्टी के बीच तल्खी तब चरम पर पहुंच गई जब उन्होंने एसआईआर (SIR) से जुड़े एक अहम फैसले पर पार्टी की आधिकारिक लाइन से हटकर टिप्पणी कर दी. गिरधारी यादव ने इस फैसले को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए इसे जल्दबाजी में लिया गया गलत कदम करार दिया था. पार्टी ने इसे खुलेआम अनुशासनहीनता माना. इसके अलावा, पिछले विधानसभा चुनाव में उनके बेटे चाणक प्रकाश रंजन के राजद (RJD) के टिकट पर चुनाव लड़ने और सांसद द्वारा उनके पक्ष में प्रचार करने के आरोपों ने आग में घी डालने का काम किया.
नीतीश की यात्रा से भी रहे नदारद
सियासी दूरियां तब और साफ हो गईं जब 17 मार्च को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ बांका पहुंची. इस भव्य कार्यक्रम के मंच पर तमाम बड़े दिग्गज मौजूद थे, लेकिन स्थानीय सांसद गिरधारी यादव गायब रहे. हालांकि, उन्होंने सफाई दी कि उन्हें कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला था, लेकिन पार्टी इसे उनकी सोची-समझी बेरुखी मान रही है.
पार्टी ने इससे पहले उन्हें ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर 15 दिनों में जवाब मांगा था. लेकिन अब मामला केवल स्पष्टीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सीधे उनकी सांसदी पर संकट मंडराने लगा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार के इस कड़े फैसले के बाद बिहार की सियासत में आने वाले दिनों में नए समीकरण देखने को मिल सकते हैं. बांका सहित पूरे प्रदेश की नज़रें अब लोकसभा स्पीकर के अगले कदम पर टिकी हैं.





