उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से करीब तीन महीने पहले समाजवादी पार्टी ने अपनी सामाजिक राजनीति को नए तरीके से जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव गुरुवार को रायबरेली पहुंचे और यहां से समाजवादी पीडीए यात्रा की शुरुआत की, लेकिन इस यात्रा का सबसे बड़ा संदेश सिर्फ अखिलेश यादव के भाषण में नहीं, बल्कि उस बस पर लिखा दिखाई दे रहा है, जिसे इस अभियान के लिए तैयार किया गया है.

बस के सामने बड़े अक्षरों में लिखा है ‘जो पीड़ित, वही पीडीए है.’और बस के किनारे लिखा है पीड़ित, दलित, अल्पसंख्यक . बस के बाहरी हिस्से में नीले रंग की एक पट्टी भी बनाई गई है. बस पर डॉ. भीमराव आंबेडकर समेत कई समाज सुधारकों की तस्वीरें लगाई गई हैं. साथ ही लिखा है सामाजिक न्याय का परचम लहराएगा, पीडीए ही परिवर्तन लाएगा.
जो पीड़ित, वही पीडीए
सपा के मुताबिक, जिन जिलों में यह यात्रा जाएगी, वहां ऐसे पीड़ित परिवारों से मुलाकात की जाएगी जो पुलिस या प्रशासन की किसी कार्रवाई से नाराज हैं. इस तरह पीडीए को केवल सामाजिक पहचान नहीं, बल्कि पीड़ित होने की राजनीतिक पहचान से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है. बस के सामने और किनारे के हिस्से में नीले रंग का इस्तेमाल किया गया है. इसके साथ डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर और सामाजिक न्याय से जुड़े नारे हैं.
राजनीतिक प्रतीकों की भाषा में नीला रंग लंबे समय से दलित और आंबेडकरवादी आंदोलन से जोड़ा जाता रहा है. ऐसे में पीडीए बस पर नीले रंग का इस्तेमाल और आंबेडकर की तस्वीर एक साथ दिखना दलित समाज को स्पष्ट राजनीतिकसामाजिक संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है. सपा का पीडीए की राजनीति में दलित मतदाताओं को अपने सामाजिक गठजोड़ का मजबूत हिस्सा बनाना एक अहम लक्ष्य रहा है.
आंबेडकर से लेकर सामाजिक न्याय तक…
इस बस पर सिर्फ अखिलेश यादव या समाजवादी पार्टी के नेताओं की तस्वीरें नहीं हैं. डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित कई समाज सुधारकों को जगह दी गई है. इसके जरिए सपा अपने अभियान को केवल पार्टी कार्यक्रम की तरह नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों के अभियान के रूप में पेश करना चाहती है.
रायबरेली से ही क्यों शुरू हुई पीडीए यात्रा?
अब सवाल है कि अखिलेश यादव ने इस यात्रा की शुरुआत रायबरेली से ही क्यों की? रायबरेली कांग्रेस और गांधी परिवार की मजबूत राजनीतिक जमीन मानी जाती है. ऐसे क्षेत्र से समाजवादी पार्टी का अपना पीडीए अभियान शुरू करना राजनीतिक रूप से कई संदेश देता है. अखिलेश यादव रायबरेली में हरचंदपुर के सपा विधायक राहुल लोधी के घर पहुंचेंगे. राहुल लोधी ओबीसी समाज से आते हैं। इसके अलावा बछरावां के सपा विधायक श्याम सुंदर भारती के साथ भी उनकी मौजूदगी रहेगी, जो दलित समुदाय से आते हैं. यानी एक ही दौरे में ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व को सामने रखा गया.
यह भी ध्यान देने वाली बात है कि रायबरेली के फिरोज गांधी महाविद्यालय में समाजवादी छात्र सभा और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के बीच विवाद के बाद अखिलेश यादव ने इस पूरे मामले को पीडीए पर हमले से जोड़कर उठाया था. इसके बाद ही अखिलेश यादव ने सपा विधायक राहुल लोधी के घर जाने और वहां चाय पीने का कार्यक्रम घोषित किया था.
पीड़ित परिवारों तक पहुंचने की रणनीति
अखिलेश यादव की इस यात्रा की सबसे अहम बात यह है कि सपा इसे सिर्फ बड़ी जनसभा तक सीमित नहीं रखना चाहती. पार्टी के मुताबिक, यात्रा के दौरान अलगअलग विधानसभा क्षेत्रों में ऐसे पीड़ित परिवारों से संपर्क किया जाएगा, जो पुलिस या प्रशासन की कार्रवाई से नाराज हैं. यानी सपा की रणनीति में दो चीजें एक साथ दिखाई देती हैं पीड़ित की आवाज उठाना और उसे पीडीए की राजनीति से जोड़ना.
कांग्रेस के गढ़ में सपा का शक्ति प्रदर्शन?
रायबरेली का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आगामी विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावनाओं पर लगातार चर्चा हो रही है. ऐसे में कांग्रेस के मजबूत क्षेत्र माने जाने वाले रायबरेली से सपा का अपना पीडीए अभियान शुरू करना गठबंधन की राजनीति में प्रेशर के रूप देखा जा रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होने के बावजूद सपा ने जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर जीत दर्ज की थी.