Reliance Share History: शेयर बाजार में अगर सही कंपनी में पैसा लगाकर छोड़ दिया जाए, तो वो वक्त के साथ कितनी बड़ी दौलत बना सकता है, रिलायंस इंडस्ट्रीज इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. आज जब रिलायंस ग्रुप की टेलीकॉम कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों ने बाजार में धमाकेदार एंट्री की है, तो एक बार फिर 49 साल पुराने इतिहास की चर्चा शुरू हो गई है. साल 1977 में जब रिलायंस का पहला IPO आया था, तब उसमें लगाए गए महज 1,000 रुपये आज बढ़कर करीब 53 लाख रुपये बन चुके हैं. बुधवार को जियो की शानदार लिस्टिंग ने निवेशकों के बीच उसी पुरानी कामयाबी की यादें ताजा कर दी हैं.

जियो की धमाकेदार लिस्टिंग, 100 मिनट में भरा था इश्यू
बुधवार को जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों ने स्टॉक एक्सचेंज पर अपनी पारी की शुरुआत की. कंपनी ने 30,188 करोड़ रुपये के इस मेगा IPO के लिए 1119 रुपये का अपर प्राइस बैंड तय किया था. बाजार खुलते ही शेयर 21.35 फीसदी के प्रीमियम के साथ 1358 रुपये पर लिस्ट हुआ. यानी निवेशकों को हर शेयर पर सीधे 239 रुपये का फायदा मिला.
जियो के इस इश्यू को लेकर बाजार में ऐसा जोश था कि पहले ही दिन महज 100 मिनट के भीतर ये पूरा सब्सक्राइब हो गया था. कंपनी ने बिक्री के लिए 19.75 करोड़ शेयर रखे थे, जिसके मुकाबले 438.26 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां आईं. इसमें कुल 7.4 लाख करोड़ रुपये की बोलियां लगीं, जिसमें 4.9 लाख करोड़ पब्लिक इश्यू से आए जबकि 2.5 लाख करोड़ रुपये एंकर निवेशकों ने लगाए. वारी एनर्जीज के 97 लाख आवेदनों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए जियो को 1 करोड़ से ज्यादा आवेदन मिले. इसमें रिटेल कैटेगरी में 1.02 करोड़, NII में 9.66 लाख तो QIB में 3,143 आवेदन आए.
1977 का वो IPO, जब 1000 रुपये बन गए 53 लाख
रिलायंस ग्रुप के लिए निवेशकों का ये भरोसा नया नहीं है. नवंबर 1977 में जब बहुत कम लोग शेयर बाजार को समझते थे, तब ‘रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज’ का IPO आया था. वो इश्यू सात गुना भरा था. कंपनी ने तब 10 रुपये के भाव पर 28.2 लाख शेयर जारी करके 2.82 करोड़ रुपये जुटाए थे. लिस्टिंग के दिन ये शेयर 17 से 18 रुपये पर लिस्ट हुआ, जिससे निवेशकों को पहले ही दिन 70 से 80 फीसदी का मुनाफा मिला. बाद में यही कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड बनी, जिसने कपड़े के कारोबार से निकलकर ऑयल रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल, रिटेल से लेकर टेलीकॉम तक अपना साम्राज्य फैलाया.
कंपनी बढ़ने के साथ निवेशकों पर भी पैसों की बारिश हुई. 1977 के उस IPO में अगर किसी ने 1,000 रुपये लगाकर 100 शेयर खरीदे थे, तो 2026 में उसकी वैल्यू करीब 53 लाख रुपये हो गई है. दरअसल, कंपनी ने लिस्टिंग के बाद से 6 बार बोनस शेयर दिए हैं. आखिरी बार अगस्त 2024 में 1:1 का बोनस दिया गया था. इन बोनस शेयरों की वजह से वो शुरुआती 100 शेयर बढ़कर 4,096 शेयर हो गए. 28 अक्टूबर 2026 के भाव के हिसाब से सिर्फ इन शेयरों की कीमत ही 48.74 लाख रुपये है.
जियो फाइनेंशियल के शेयरों ने अलग से कराया फायदा
निवेशकों की कमाई में एक बड़ा इजाफा साल 2023 में भी हुआ. तब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ‘जियो फाइनेंशियल सर्विसेज’ को अलग करके बाजार में लिस्ट कराया था. उस वक्त रिलायंस के हर एक शेयर के बदले जियो फाइनेंशियल का एक शेयर मुफ्त मिला था. यानी 2024 के बोनस से पहले जिन निवेशकों के पास रिलायंस के 2,048 शेयर थे, उन्हें जियो फाइनेंशियल के भी 2,048 शेयर मिल गए. 23 अक्टूबर तक इन शेयरों की कीमत 4.19 लाख रुपये हो चुकी है. इस तरह 48 साल 11 महीने में 19.56 फीसदी के सालाना रिटर्न के साथ 1,000 रुपये का वो छोटा सा निवेश कुल 52.93 लाख रुपये बन गया. इसके अलावा कंपनी ने हर साल हजारों रुपये का डिविडेंड भी दिया है.
आसान नहीं रहा ये सफर, आए कई बड़े उतारचढ़ाव
रिलायंस में पैसा बनाने का ये सफर हमेशा सीधा या आसान नहीं रहा. साल 2006 में अंबानी परिवार में बड़ा बंटवारा हुआ. इसमें मुकेश अंबानी के पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ तेल, गैस व पेट्रोकेमिकल का कारोबार रहा, जबकि अनिल अंबानी के हिस्से में पावर, टेलीकॉम व फाइनेंशियल बिजनेस गए. इसके बाद 2008 की वैश्विक मंदी में विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रिलायंस का शेयर एक ही साल में 57 फीसदी से ज्यादा टूट गया था. 2010 से 2016 के बीच भी शेयर एक ही दायरे में अटका रहा.
सितंबर 2016 में जियो की लॉन्चिंग के बाद शेयर में फिर से तेजी लौटी. 2017 में शेयर 70 फीसदी से ज्यादा भागा. पिछले 10 सालों में इसने 17 फीसदी के CAGR से रिटर्न दिया है. हालांकि, साल 2026 में शेयर फिर से दबाव में है. जियो के IPO के बावजूद इस साल रिलायंस का शेयर करीब 24 फीसदी गिर चुका है. 13 अक्टूबर 2026 को इसने 1,152.2 रुपये का अपना 52 हफ्तों का निचला स्तर छुआ. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से कंपनी के एनर्जी बिजनेस के मार्जिन पर दबाव है. वहीं, विंडफॉल टैक्स के फिर से लागू होने से कंपनी के एक्सपोर्ट मुनाफे पर भी असर पड़ा है.