
जयपुर। राजस्थान में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध अब कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। हर साल हजारों लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार हो रहे हैं और कई मामलों में समय पर कार्रवाई नहीं होने से पीड़ितों का पैसा भी वापस नहीं मिल पाता। इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए राज्य सरकार अब आक्रामक एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश में ‘राजस्थान साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर’ (R4C) स्थापित करने की घोषणा की है, जो साइबर अपराधियों के खिलाफ निर्णायक हथियार साबित होगा। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर करीब 100 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
हर साल बढ़ रहे ठगी के मामले, सिस्टम पर बढ़ा दबाव
राजस्थान में साइबर ठगी के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में जहां करीब 80 हजार मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2025 तक यह संख्या बढ़कर करीब सवा लाख (1.25 लाख) तक पहुंच गई है। यानी हर साल औसतन 25 हजार नए मामले जुड़ रहे हैं। यह बढ़ोतरी न सिर्फ पुलिस के लिए चुनौती है, बल्कि आम जनता की आर्थिक सुरक्षा पर भी बड़ा खतरा बन चुकी है।
धीमी प्रक्रिया बन रही थी सबसे बड़ी बाधा
अब तक साइबर ठगी से जुड़ी सूचनाएं केंद्र के I4C से स्टेट नोडल एजेंसी और फिर जिलों के माध्यम से थानों तक पहुंचती थीं। इस लंबी प्रक्रिया के कारण कार्रवाई में देरी होती थी। कई मामलों में FIR दर्ज होने में समय लग जाता था और तब तक ठग पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकाल लेते थे। यही वजह थी कि रिकवरी रेट बेहद कम रहा।
R4C से बदलेगा पूरा गेम, रियल-टाइम में होगी कार्रवाई
नए प्रस्तावित R4C सेंटर के जरिए इस पूरी प्रक्रिया को तेज और प्रभावी बनाया जाएगा। यह सेंटर सीधे थानों को रियल-टाइम इनपुट देगा, जिससे ठगी की सूचना मिलते ही तुरंत कार्रवाई शुरू हो सकेगी। इससे न सिर्फ अपराधियों तक जल्दी पहुंच बनाई जा सकेगी, बल्कि पीड़ितों के पैसे को भी समय रहते रोका जा सकेगा।
275 एक्सपर्ट्स की टीम, 24 घंटे निगरानी
इस हाईटेक सेंटर की कमान आईजी रैंक के अधिकारी के हाथ में होगी। उनके नेतृत्व में 275 कार्मिकों की एक मजबूत टीम तैनात की जाएगी, जिसमें डीआईजी, एसपी, एएसपी, डीएसपी स्तर के अधिकारी शामिल होंगे। इसके अलावा इंस्पेक्टर और तकनीकी विशेषज्ञ भी इस टीम का हिस्सा होंगे। यह पूरी टीम 24 घंटे सक्रिय रहकर साइबर अपराधों पर नजर रखेगी।
एक ही छत के नीचे पुलिस, टेक्निकल टीम और बैंक अधिकारी
R4C की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टी-एजेंसी मॉडल होगा। यहां पुलिस अधिकारियों के साथ तकनीकी विशेषज्ञ और बैंकों के नोडल अधिकारी एक ही जगह बैठेंगे। जैसे ही ठगी की सूचना मिलेगी, तकनीकी टीम तुरंत ठगों की लोकेशन और डिजिटल फुटप्रिंट ट्रेस करेगी। वहीं बैंक अधिकारी संदिग्ध ट्रांजेक्शन को तुरंत ट्रैक कर खातों को फ्रीज करेंगे, ताकि पैसा आगे ट्रांसफर न हो सके। पुलिस टीम संबंधित थाने को तुरंत सूचना देकर FIR और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।
स्पेशल ट्रेनिंग से लैस होगी टीम
इस सेंटर में तैनात स्टाफ को I4C और देश के अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में विशेष तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए सरकार ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) भी तैयार कर ली है। प्रशिक्षण के बाद यह टीम आधुनिक तकनीकों के जरिए साइबर अपराधियों से निपटने में सक्षम होगी।
देश में मॉडल बनेगा राजस्थान का R4C
सरकार का दावा है कि इस स्तर का समर्पित साइबर को-ऑर्डिनेशन सेंटर स्थापित करने वाला राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। अगर यह मॉडल सफल होता है, तो अन्य राज्य भी इसे अपनाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं।





