Sunday, February 22, 2026
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रंगों के बीच ग्रहण की छाया, होली पर लगेगा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं, सूतक काल कब से लगेगा, जानिए सबकुछ

रंगों के बीच ग्रहण की छाया, होली पर लगेगा चंद्र ग्रहण, भारत में दिखेगा या नहीं, सूतक काल कब से लगेगा, जानिए सबकुछ

Chandra Grahan 2026 on Holi: रंग, गुलाल और उत्साह से भरे होली के पर्व पर इस बार एक खगोलीय घटना भी लोगों का ध्यान खींचने वाली है। पंचांग के अनुसार होली के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जिसे लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं, जैसे कि क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा, क्या इस दिन सूतक काल मान्य होगा और धार्मिक कार्यों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। चूंकि यह ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर पड़ रहा है, ऐसे में इसका धार्मिक महत्व भी खास माना जा रहा है। तो आइए जानते हैं होली पर लगने वाले चंद्र ग्रहण से जुड़ी पूरी जानकारी और सूतक काल का समय।

साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को पड़ने जा रहा है। पंचांग के अनुसार, यह ग्रहण दोपहर 2 बजकर 16 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। खास बात यह है कि यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे एशिया के कई देशों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया में भी देखा जा सकेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, पूर्ण चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना होती है। यह तब घटित होती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिसके कारण सूर्य की किरणें सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पातीं और चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाता है।

क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा

साल का पहला चंद्र ग्रहण इस बार भारत में देखा जा सकेगा। खासतौर पर पूर्वी भारत में इसका नजारा सबसे स्पष्ट होगा। अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम में यह चंद्र ग्रहण पूर्ण या अधिक स्पष्ट रूप में दिखाई देगा। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल के पूर्वी हिस्सों में भी लोग इस खगोलीय घटना का अद्भुत दृश्य देख सकेंगे। वहीं कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर और आइजोल जैसे शहरों में यह ग्रहण बेहद आकर्षक रूप में नजर आएगा। इसके अलावा दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ और जयपुर सहित देश के कई अन्य हिस्सों में यह आंशिक चंद्र ग्रहण के रूप में दिखाई देगा।

चंद्र ग्रहण 2026 सूतक काल

साल का पहला चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई देने वाला है, ऐसे में इस बार सूतक काल के नियम भी लागू माने जाएंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्र ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल की शुरुआत हो जाती है। इस गणना के मुताबिक 3 मार्च को सुबह 09:39 बजे से सूतक काल शुरू हो जाएगा, जो ग्रहण की समाप्ति के साथ ही समाप्त माना जाएगा।

इस बार होलिका दहन पर चंद्र ग्रहण का साया

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा और इसी दिन चंद्र ग्रहण का प्रभाव भी रहेगा। ऐसे में होलिका दहन को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। विद्वानों का मानना है कि चंद्र ग्रहण के कारण होलिका दहन सूतक काल शुरू होने से पहले या फिर शास्त्रों में बताए गए विशेष मुहूर्त में ही संपन्न किया जाएगा।

सूतक काल में क्या करें और किन बातों से बचें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल के दौरान कुछ कार्यों को करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। इस समय भगवान की प्रतिमा को स्पर्श नहीं करना चाहिए और न ही कोई नया या शुभ कार्य शुरू करना उचित माना जाता है। विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों को भी टालना चाहिए। इसके अलावा सूतक काल में भोजन पकाने और ग्रहण करने से बचने की परंपरा है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को इस अवधि में विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।

चंद्र ग्रहण 2026 के दौरान चंद्रमा की स्थिति

साल का पहला चंद्र ग्रहण होली के पावन दिन पड़ रहा है। इस दौरान चंद्रमा सिंह राशि में स्थित रहेगा और केतु के साथ युति बनाएगा। ज्योतिषीय दृष्टि से इस ग्रह स्थिति के कारण कुछ राशियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे उनके जीवन में मानसिक तनाव या अन्य चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

चंद्र ग्रहण के प्रकार

चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं।

  1. आंशिक चंद्र ग्रहण

जब चंद्रमा का केवल कुछ हिस्सा ही पृथ्वी की छाया में आता है, तब इसे आंशिक चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इस स्थिति में चंद्रमा पूरी तरह ढकता नहीं है, बल्कि उसका एक भाग ही प्रभावित होता है।

  1. पूर्ण चंद्र ग्रहण

जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है और सूर्य की किरणें उस तक नहीं पहुंच पातीं, तब पूर्ण चंद्र ग्रहण लगता है। इस दौरान चंद्रमा का रंग हल्का लाल या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है।

  1. उपछाया चंद्र ग्रहण

जब चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया से होकर गुजरता है, तब इसे उपछाया चंद्र ग्रहण कहा जाता है। इसमें चंद्रमा पर हल्का-सा प्रभाव दिखता है, जिसे सामान्य रूप से पहचानना थोड़ा कठिन होता है।

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