इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उन वकीलों का कड़ा संज्ञान लिया है, जिन्होंने अदालत परिसर के भीतर नारेबाजी की और न्यायिक कार्यवाही में बाधा डाली. कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए इन लोगों की पहचान करने का आदेश दिया है और निर्देश दिया है कि उनके खिलाफ अवमानना और अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की जाए.

इलाहाबाद हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया कि जस्टिस अजय भनोट ने एक वकील से पुलिस अधीक्षक से माफी मांगने को कहा और उसे जेल भेजने की चेतावनी दी. इससे नाराज होकर वकीलों ने बुधवार को जस्टिस भनोट की अदालत का बहिष्कार किया और वहां भारी हंगामा किया. कुछ वकीलों पर अदालत के भीतर फर्नीचर फेंकने और तोड़फोड़ करने का आरोप है.
‘पूरी तरह से कोर्ट की अवमानना’
इस हंगामे का असर बगल वाले कोर्ट रूम जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच की कार्यवाही पर भी पड़ा. जस्टिस देशवाल ने इस व्यवहार को ‘पूरी तरह से अदालत की अवमानना’ करार दिया. कोर्ट ने रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वे CCTV फुटेज के जरिए नारेबाजी और तोड़फोड़ में शामिल वकीलों की पहचान करें और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक और अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की तैयारी करें.
वकीलों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
अदालत ने स्पष्ट किया कि पहचान हो जाने के बाद, संबंधित वकीलों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए मामला उत्तर प्रदेश बार काउंसिल को भेज दिया जाएगा. इसके अलावा, उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की जा सकती है. इस मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर, 2026 को तय की गई है.
कौन हैं न्यायमूर्ति अजय भनोट?
न्यायमूर्ति अजय भनोट इलाहाबाद हाई कोर्ट के स्थायी न्यायाधीश हैं और वर्तमान में गौतम बुद्ध नगर जिले के प्रशासनिक न्यायाधीश के रूप में कार्यरत हैं. 4 अगस्त 1969 को जन्मे न्यायमूर्ति भनोट ने 1994 में लखनऊ विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री पूरी की और 15 जनवरी 1995 को एक अधिवक्ता के रूप में अपना पंजीकरण कराया.
उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में व्यापक रूप से वकालत की, जहां उन्होंने दीवानी , संवैधानिक, कर, सेवा, कंपनी और आपराधिक कानून से जुड़े मामलों के साथसाथ पर्यावरण और औद्योगिक विवादों से संबंधित मामलों को संभाला. अपने लंबे करियर के दौरान, उन्होंने कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं, जिनमें भारत सरकार के वकील, उत्तर प्रदेश सरकार के लिए स्थायी और अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता, और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के वकील के रूप में कार्य करना शामिल है.
3 अगस्त 2031 को सेवानिवृत्त होंगे अजय भनोट?
उनके विशिष्ट कानूनी अनुभव को देखते हुए, 23 मई 2015 को उन्हें ‘वरिष्ठ अधिवक्ता’ के रूप में नामित किया गया. इसके बाद, 22 सितंबर 2017 को उन्हें इलाहाबाद उच्च न्यायालय का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 6 सितंबर 2019 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। वे 3 अगस्त 2031 को सेवानिवृत्त होंगे.