12 तारीख शाम साढ़े पांच बजे से आईफोन 18 प्रो, प्रो मैक्स और आईफोन डुओ की बुकिंग शुरू हो जाएगी. प्रो 1 लाख 65 हजार, प्रो मैक्स 1 लाख 80 हजार और आईफोन डुओ की कीमत 3 लाख से शुरू है. सिद्धार्थ के पास वैसे तो एकदम ठीक फोन है, लेकिन उसने ईएमआई पर आईफोन डुओ लेने के लिए तैयारी कर ली है. जब ईएमआई पर लेटेस्ट ट्रेंड मिल रहा है तो भला क्यों पीछे रहा जाए?

बात सिर्फ फोन की नहीं है. मोबाइल, नया टीवी, फ्रिज, एयर फ्रायर या घर का फर्नीचर, यहां तक कि ऑनलाइन कपड़े खरीदते समय भी ईएमआई का ऑप्शन मिलता है. पहले ऐसी चीजों के लिए पैसे जोड़ने और जेब में पूरे पैसे होने का इंतजार करना पड़ता था. लेकिन अब ईएमआई यानी इक्वेटेड मंथली इंस्टॉलमेंट ने यह काम आसान कर दिया है. हर महीने थोड़ेथोड़े पैसे दीजिए और पसंद की चीज घर ले आइए. सुनने में फीलगुड है, लेकिन कहीं इससे हमारा खर्च ज्यादा तो नहीं हो रहा?
युवाओं में बढ़ रही क्रेडिट की आदत
सीनियर इकॉनमिस्ट आकाश जिंदल कहते हैं, यंग जनरेशन दूर का नहीं सोचती. छोटी ईएमआई देखकर उसका अट्रैक्शन बढ़ता है और वह बड़ी चीज खरीद लेती है. यही ईएमआई पर सामान बेचने वालों और फाइनेंस कंपनियों की स्ट्रेटजी है. नई पीढ़ी नए फोन, नए कपड़े, नए रेस्तरां में खाना खाने, नई जगह घूमने, ट्रैकिंग या वाइल्डलाइफ जैसे नए एक्सपीरियंस को बाद के लिए टालना नहीं चाहती. कमाई अभी शुरू हुई है या सैलरी इच्छाओं से कम है, तो डिजायर्स के लिए ईएमआई सबसे बढ़िया तरीका है. नई जनरेशन की कमाई बढ़ने की संभावना के चलते उन्हें लोन मिल भी जाता है.
ट्रांसयूनियन सिबिल की मार्च 2026 की रिपोर्ट बताती है कि दिसंबर 2025 की तिमाही में 35 साल से कम उम्र के नए कर्ज लेने वालों की गिनती 2024 के मुकाबले 17% बढ़ी. पहली बार कर्ज लेने वालों में 35 साल से कम उम्र के लोगों की गिनती 58% रही. इसी टाइम पीरियड में टीवी, फ्रिज और दूसरे सामान के लिए लिए जाने वाले कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में 22% की बढ़ोतरी हुई. यानी सामान खरीदने के लिए क्रेडिट का इस्तेमाल बढ़ रहा है.
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के हिसाब से मार्च 2025 में बैंकों का पर्सनल लोन क्रेडिट भी एक साल में 14% बढ़ा था. इसमें क्रेडिट कार्ड, व्हीकल और दूसरे पर्सनल लोन शामिल हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि अब लोग लाइफस्टाइल मेंटेन करने या जरूरी सामान के लिए पूरा पैसा जमा होने का इंतजार करने की बजाय किस्त और लोन को चुन रहे हैं. यंग जनरेशन में यह ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है.
एक EMI से कई EMI
फोन की ईएमआई शुरू हुई, फिर लैपटॉप या टीवी की जरूरत पड़ गई. उसके बाद बाइक या घर का कोई सामान भी किस्त पर ले लिया. अलगअलग हर ईएमआई छोटी लगती है, लेकिन महीने के आखिर में सबको जोड़कर रकम बड़ी हो सकती है.
सैलरी में EMI का कितना हिस्सा?
एक्सपर्ट कहते हैं अपनी कमाई का मैक्सिमम 30 फीसदी हिस्सा ही ईएमआई रखना चाहिए, चाहे वह प्रेजेंट ईएमआई हो या पहले से चली आ रही हो. क्योंकि लाइफ में अनएक्सपेक्टेड खर्चे आ जाते हैं. जॉब अनसर्टेनिटी है. शादी के बाद खर्चे बढ़ते हैं, बच्चे के बाद खर्चे बढ़ते हैं. इनकम अनसर्टेनिटी, मेडिकल खर्चे और प्राकृतिक आपदाओं को ध्यान में रखकर 7030 का रेशियो रखना चाहिए.
EMI लेने पर क्या है एक्सपर्ट की राय
आकाश जिंदल कहते हैं, कोई मोबाइल 90 हजार का है. एक साथ 90 हजार रुपये देने में आप दो बार सोचेंगे, लेकिन वही फोन अगर 34 हजार रुपये महीने की ईएमआई पर मिल जाए तो खरीदना आसान है. इसलिए ईएमआई मददगार हो सकती है. दिक्कत तब होती है जब जरूरत से ज्यादा खरीदारी सिर्फ इसलिए होने लगे क्योंकि सामान आसानी से किस्तों पर मिल रहा है. किसी भी ईएमआई को लेने से पहले देखना जरूरी है कि आखिर में कुल कितने पैसे देने होंगे, कितने समय तक किस्त चलेगी और इंटरेस्ट व अदर चार्जेज कितने हैं.
क्योंकि ईएमआई से खर्च कम नहीं होता, बस बड़ी रकम छोटीछोटी किस्तों में बंट जाती है. इसलिए कुछ खरीदते वक्त सिर्फ ईएमआई नहीं, यह भी देखना चाहिए कि उसकी जरूरत सच में है या नहीं. सीनियर इकॉनमिस्ट आकाश जिंदल कहते हैं, यंगस्टर्स की ईएमआई टेंडेंसी मार्केट और ग्रोथ के लिए अच्छी है.
यह डिमांड और सप्लाई का खेल है. भारत पहले सेवर का नेशन था. हमारे मातापिता या दादादादी बचत में यकीन रखते थे. आज भारत कंज्यूमर और स्पेंडर्स का नेशन है, इच्छा पूर्ति का बाजार है. थोड़ा अमेरिकन कल्चर आया है. लेकिन यंग जनरेशन के लिए बैलेंस जरूरी है, ताकि बाद में ईएमआई बोझ न बन जाए. इच्छाएं और शौक पूरे करें, लेकिन ईएमआई कमाई के 30 फीसदी से ऊपर न जाने दें.