सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मेरठ में जोनए के तहत चिन्हित 16,726 अवैध और अनधिकृत निर्माणों को सील करने और गिराने का सख्त आदेश दिया है. जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की बेंच ने एक न्यायिक आयोग भी बनाया है, जिसके प्रमुख सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज सुधांशु धूलिया होंगे. यह आयोग मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में जमीन की प्रकृति की विस्तृत जांच करेगा, जहां ये अवैध रिहायशी कॉलोनियां बनी हैं.

उत्तर प्रदेश हाउसिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड के चेयरमैन पी. गुरुप्रसाद की रिपोर्ट देखने के बाद बेंच ने कहा, “स्टेटस रिपोर्ट पढ़ने के बाद हमें यह जानकर हैरानी और चिंता हुई कि उल्देपुर में सैकड़ों अवैध रिहायशी कॉलोनियां बन गई हैं.” बेंच ने गौर किया कि विभाग ने मेरठ के कई हिस्सों का निरीक्षण और सर्वे किया था. रिपोर्ट के अनुसार, शहर को चार जोन में बांटा गया है: जोन A, जोन B, ज़ोन C और जोन D.
21 सितंबर के अपने आदेश में बेंच ने कहा, “जोन A में निरीक्षण और सर्वे के लिए तैनात 16 टीमों को 16,726 निर्माण पूरी तरह से अवैध या अनधिकृत मिले. इनमें 12,907 रिहायशी, 874 रिहायशी और गैररिहायशी और 2,945 गैररिहायशी निर्माण शामिल हैं.”
अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द हो एक्शन
सुप्रीम कोर्ट अवैध निर्माण गतिविधियों से जुड़े पहले के निर्देशों का पालन न करने के मामले में अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रहा है. अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जोन A में पहचाने गए सभी 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करें. बेंच ने कहा, “इस प्रक्रिया का पहला कदम कब्जा करने वालों को हटाना और इन सभी 16,726 अवैध निर्माणों को सील करना है.
SCने कहा, हम इसके लिए निर्देश जारी करते हैं. हो सकता है कि इनमें से कुछ इमारतें जर्जर हालत में हों और उनके गिरने से जानमाल का नुकसान हो सकता है. हम किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं होने देना चाहते, इसलिए तुरंत कार्रवाई जरूरी है. हम निर्देश देते हैं कि सभी चार जोन के संबंध में तुरंत कार्रवाई की जाए.”
अगली सुनवाई में तीनों जोन की विस्तृत रिपोर्ट मांगी
बेंच ने कहा कि अगर दुर्भाग्य से कोई ऐसी घटना होती है जिसमें बेगुनाह लोगों की जान जाती है, तो संबंधित सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा. कोर्ट ने गौर किया कि रिपोर्ट में जोनB, जोनC और जोनD की स्थिति का ज़िक्र नहीं था, नतीजतन इन तीनों इलाकों में अवैध निर्माणों की संख्या के बारे में जानकारी नहीं थी. बेंच ने संबंधित अथॉरिटी को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई में जोनB, जोनC और जोनD के बारे में विस्तृत रिपोर्ट पेश करे. कोर्ट ने निर्देश दिया कि गिराने का अभियान जारी रहे और अगली सुनवाई तक अपडेटेड स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए.
5 साल से ज्यादा समय तक निष्क्रिय क्यों रही MDA?
उल्देपुर के संबंध में, बेंच ने गौर किया कि रिपोर्ट से पता चलता है कि शुरू में सील की गई 44 संपत्तियों के मालिकों को नोटिस जारी किए गए थे. बेंच ने कहा कि इन 44 संपत्तियों में से 20 को पहले ही गिरा दिया गया है और उनके अनधिकृत कमर्शियल इस्तेमाल को रोक दिया गया है. बेंच ने कहा, “हम अथॉरिटी को निर्देश देते हैं कि वे सील की गई 44 संपत्तियों में से बाकी 24 को भी जल्द से जल्द गिरा दें.”
बेंच ने आगे कहा कि जस्टिस धूलिया की अध्यक्षता वाला न्यायिक आयोग इस बात की भी जांच करेगा कि मेरठ डेवलपमेंट अथॉरिटी पांच साल से ज्यादा समय तक निष्क्रिय क्यों रही, जिससे इन अवैध रिहायशी कॉलोनियों को विकसित होने का मौका मिला.
जिम्मेदार लोगों की होगी पहचान
आयोग यह भी पता लगाएगा कि क्या ये अवैध रिहायशी कॉलोनियां मेरठ डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिकारियों की मिलीभगत से बनाई गई थीं और इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा. अदालत ने मामले को दिसंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया और अपने निर्देशों के अनुपालन में की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत स्थिति रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया.