क्या आप जानते हैं कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम आखिर क्या होता है? लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं और इसका उन्हें अंदाजा भी नहीं होता. बिगड़े हुए लाइफस्टाइल या खराब खानपान इसका एक कारण हो सकते हैं. इस पर टीवी9 ने डॉक्टर मानसी निगम से बातचीत की. डॉक्टर का कहना है कि मेटाबॉलिक सिंड्रोम कोई एक बीमारी नहीं है. इसका मतलब है कि शरीर में कुछ ऐसी दिक्कतें एक साथ होने लगती हैं.

इसमें पेट के आसपास ज्यादा चर्बी, ब्लड शुगर बढ़ना, ब्लड प्रेशर बढ़ना, ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ना या अच्छे कोलेस्ट्रॉल का कम होना, जैसे दिक्कतें शामिल हैं. इनमें से कम से कम तीन चीजें साथ हों, तो इसे मेटाबॉलिक सिंड्रोम कहा जाता है. इससे आगे चलकर डायबिटीज, दिल की बीमारी और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है.
मेटाबॉलिक सिंड्रोम के संकेत
पेट और कमर का बढ़ना अगर वजन खासतौर पर पेट के आसपास बढ़ रहा है, तो यह शरीर में इंसुलिन के सही से काम न करने से जुड़ा हो सकता है.
बहुत ज्यादा प्यास लगना ब्लड शुगर बढ़ने पर शरीर ज्यादा पानी मांग सकता है.
बार बार यूरिन आना जब ब्लड में शुगर ज्यादा होती है, तो शरीर उसे पेशाब के रास्ते बाहर निकालने की कोशिश करता है.
लगातार थकान ब्लड शुगर बढ़ने पर शरीर शुगर को ठीक से इस्तेमाल नहीं कर पाता, इसलिए आपको बार बार कमजोरी या एनर्जी कम महसूस हो सकती है.
धुंधला दिखाई देना ब्लड शुगर बढ़ने पर नजर कुछ समय के लिए धुंधली हो सकती है.
स्किन के कलर में फर्क गर्दन या बगल की त्वचा का काला और मोटा होना. इसे एकैंथोसिस निग्रिकन्स कहते हैं. यह अक्सर इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा होता है, यानी शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर रहा.
ब्लड प्रेशर, ट्राइग्लिसराइड्स या गुड कोलेस्ट्रॉल में बदलाव यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि इन चीजों में बदलाव अक्सर कोई लक्षण नहीं देता. इसलिए आप बिल्कुल ठीक महसूस कर सकते हैं, फिर भी रिपोर्ट में समस्या हो सकती है.
इसलिए अगर इनमें से कोई संकेत दिख रहा है, या आपको पहले से हाई ब्लड प्रेशर, शुगर या पेट के आसपास ज्यादा चर्बी है, तो जांच करवाएं. ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स और कमर का माप डॉक्टर से चेक करवाना जरूरी है. समय पर पता चलने पर सही डाइट, एक्सरसाइज और जरूरत पड़ने पर इलाज से आगे की परेशानियों का खतरा कम किया जा सकता है.