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मकान मालिक नहीं लौटा रहा सिक्योरिटी डिपॉजिट? जानिए आपके अधिकार

किराए का घर छोड़ने के बाद अक्सर कई लोगों को एक बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है. मकान मालिक बिना किसी ठोस वजह के सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने से मना कर देता है या फिर रकम का बड़ा हिस्सा काट लेता है. ऐसे मामलों में ज्यादातर किरायेदार अपने अधिकारों की पूरी जानकारी नहीं होने की वजह से नुकसान उठा लेते हैं.

मकान मालिक नहीं लौटा रहा सिक्योरिटी डिपॉजिट? जानिए आपके अधिकार
मकान मालिक नहीं लौटा रहा सिक्योरिटी डिपॉजिट? जानिए आपके अधिकार

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किरायेदार ने समय पर किराया चुकाया है, बिजली-पानी के बिल जमा किए हैं और घर को सामान्य स्थिति में छोड़ा है, तो मकान मालिक मनमाने तरीके से सिक्योरिटी डिपॉजिट रोक नहीं सकता.

क्या होता है सिक्योरिटी डिपॉजिट?

सिक्योरिटी डिपॉजिट वह रकम होती है, जो किरायेदार घर में शिफ्ट होने से पहले मकान मालिक को देता है. इसका मकसद भविष्य में किसी नुकसान, बकाया किराए या अनुबंध उल्लंघन की स्थिति में सुरक्षा देना होता है. आमतौर पर किरायेदारी खत्म होने के बाद यह रकम वापस कर दी जाती है.

हालांकि, कई बार मकान मालिक पेंटिंग, सफाई या मामूली टूट-फूट के नाम पर बड़ी कटौती कर देते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्य इस्तेमाल से होने वाली खराबी को नुकसान नहीं माना जाता.

किन मामलों में कट सकता है पैसा?

मकान मालिक कुछ खास परिस्थितियों में सिक्योरिटी डिपॉजिट से रकम काट सकता है. इसमें बकाया किराया, बिजली या मेंटेनेंस बिल, फर्नीचर या घर को गंभीर नुकसान और एग्रीमेंट में तय मरम्मत खर्च शामिल हो सकते हैं.

लेकिन बिना सबूत या लिखित जानकारी के मनमानी कटौती करना गलत माना जाता है. अगर मकान मालिक कोई रकम काटता है तो उसे उसका स्पष्ट हिसाब देना चाहिए.

किरायेदार सबसे पहले क्या करें?

अगर डिपॉजिट वापस नहीं मिल रहा है तो सबसे पहले रेंट एग्रीमेंट को ध्यान से पढ़ना जरूरी है. इसमें सिक्योरिटी डिपॉजिट, रिफंड की समय सीमा और कटौती से जुड़े नियम लिखे होते हैं. कई एग्रीमेंट में 15 से 60 दिन के भीतर डिपॉजिट लौटाने का प्रावधान रहता है.

इसके अलावा किरायेदारों को सभी जरूरी सबूत संभालकर रखने चाहिए. इनमें किराया रसीद, बैंक ट्रांजैक्शन, बिजली-पानी के बिल, व्हाट्सऐप चैट, ईमेल और घर खाली करते समय की फोटो-वीडियो शामिल हैं.

कानूनी कार्रवाई का भी है विकल्प

अगर बातचीत से मामला नहीं सुलझता तो किरायेदार लिखित में डिपॉजिट वापसी की मांग कर सकते हैं. जरूरत पड़ने पर वकील के जरिए लीगल नोटिस भी भेजा जा सकता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि कई मामलों में सोसाइटी या RWA की मदद से भी विवाद सुलझ जाता है. लेकिन अगर मकान मालिक जानबूझकर पैसा रोक रहा हो या धमकी दे रहा हो, तो पुलिस शिकायत या कंज्यूमर फोरम और सिविल कोर्ट का रास्ता भी अपनाया जा सकता है.

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इन गलतियों से बचना जरूरी

किरायेदारों को हमेशा लिखित रेंट एग्रीमेंट करना चाहिए और कैश भुगतान से बचना चाहिए. बिना रसीद पैसा देना बाद में मुश्किल पैदा कर सकता है. साथ ही घर खाली करते समय उसकी हालत की फोटो और वीडियो जरूर रखनी चाहिए. जानकारों का कहना है कि थोड़ी सावधानी और सही दस्तावेज होने पर किरायेदार आसानी से अपना सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस पा सकते हैं.

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