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भारत ईरान से तेल खरीदना फिर शुरू करेगा! अमेरिकी छूट के बाद फिलहाल कैसी है, देश के तेल-गैस के भंडार की स्थिति?


Will India resume buying Iranian oil: 100 घंटे पहले ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण नियंत्रण का दावा किया. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने तब कहा कि स्ट्रेट उन देशों के लिए नहीं खुली है जो इसका इस्तेमाल ईरान को नुकसान पहुंचाने के लिए कर सकते हैं. इसका फायदा केवल उन्हें मिलेगा जो ईरान के लिए खतरा नहीं हैं. बीते चार दिन से होर्मुज में ईरान की कड़ी नाकेबंदी के चलते कई देशों में तेल-गैस का संकट गहरा गया है. पानी के जहाजों की आवाजाही बंद होने से दुन‍िया भर में ईंधन कीमतों में इजाफा हो रहा है. लिहाजा अमेरिका ने ईरान का तेल खरीदने की इजाजत कुछ देशों को दी है, ताकि वैश्विक संकट का असर कुछ कम हो सके.

भारत क्या करेगा?
ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या इस राहत से इतर भारत अपने हितों के सुरक्षा के लिए ईरान से तेल की खरीददारी जारी रखेगा या अमेरिकी छूट की मियाद खत्म होने के बाद ईरान से तेल खरीदना बंद कर देगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जैसे ही ये खबर आई कि अमेरिका, ईरानी तेल इंपोर्ट पर कुछ समय के लिए बैन हटा रहा है, लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी. इस बीच भारतीय रिफाइनर्स तेहरान से क्रूड ऑयल की खरीद की स्थिति की समीक्षा करने के लिए लगातार वैश्विक हालातों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कई भारतीय रिफाइनिंग कंपनियां अगली शिपमेंट को फाइनल करने से पहले पेमेंट की शर्तों पर भारत सरकार के स्पष्ट निर्देश और अमेरिकी क्लैरिफिकेशन का इंतजार कर रही हैं.

ग्लोबल दबाव में झुके ट्रंप!
भारतीय रिफाइनर, अमेरिका की ओर से ईरानी तेल खरीदने की छूट दिए जाने के बाद अपनी सप्लाई चेन में ईरानी क्रूड ऑयल को शामिल करने के ऑप्शन तलाश रहे हैं. दरअसल अमेरिक छूट 30 दिनों के लिए वैलिड है. क्रूड ऑयल या गैस मंगाने में जहाज को समय और परिस्थितियों के हिसाब से चार से पांच दिन लग जाते हैं.

भारत के लिए तेल और गैस का बड़ा हिस्सा फारस की खाड़ी से आता है. सारे टैंकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के संकरे समुद्री रास्ते से गुजरते हैं. अगर कोई तेल टैंकर या भारतीय जहाज इस स्ट्रेट से गुजरकर गुजरात के कांडला बंदरगाह या मुंबई पहुंचना चाहे तो पांच दिन लगना संभव है. ऐसे में अगर ट्रंप का मूड बदल गया और वो अपनी कथित छूट खत्म कर दें तो नया ऑर्डर देने पर नुकसान हो सकता है. इसलिए भारतीय रिफाइनल फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं. हालांकि इस काम के लिए भारत सरकार ईरान और अमेरिका दोनों के साथ लगातार संपर्क में है. फिर भी मिडिल ईस्ट के हालातों को ध्यान में रखते हुए किसी भी तरह की अनहोनी यानी जान-माल के नुकसान से बचने के लिए भारत सरकार लगातार मुहिम में जुटी है. अ बतक चार जहाज भारत आ चुके हैं, जिनमें शिवालिक और नंदा देवी से गैस आई तो तेल से लदा जहाज जग लाडकी भारत पहुंच गया है. अब आगे क्या होगा, ये भारत सरकार की परमिशन और अमेरिका के क्लियरिफिकेशन पर ही निर्भर करेगा.

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