अब हेल्थ चेकअप कराने के लिए आपको हर मामले में लैब जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. अधिकतर कंपनियां घर बैठे सैंपल कलेक्शन की सुविधा दे रही हैं. इससे कई लोग लैब न जाकर घर पर ही ब्लड सैंपल दे देते हैं. लेकिन सवाल यह है कि होम सैंपल कलेक्शन बेहतर है या लैब जाकर टेस्ट करवाना? इस पर डॉक्टर क्या कहते हैं. इस बारे में समझते हैं.

घर से सैंपल देने का एक बड़ा फायदा यह है कि जिन लोगों के घर के आसपास में लैब नहीं हैं वह घर पर सैंपल दे देते हैं. इससे समय बचता है.
आपको ट्रैवल और लंबी लाइनों से राहत देता है, लेकिन ये जरूरी है कि सैंपल लेने वाला व्यक्ति अच्छी तरह ट्रेंड हो और लैब भी मान्यता प्राप्त हो, ताकि सैंपल लेने और उसको लैब तक ले जाने में कोई गलती न हो.
लैब विजिट के क्या हैं फायदे
दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. एल. एच घोटेकर बताते हैं कि होम सैंपल से ज्यादा बेहतर लैब में जाकर सैंपल देना माना जाता है. वहां पर पूरी मशीनरी और विशेषज्ञ मौजूद होते हैं, जिससे सैंपल की क्वालिटी और हैंडलिंग पर ज्यादा कंट्रोल रहता है. सैंपल अगर वहीं दिया जाता है तो लैब में ही प्रोसेस हो जाता है. घर से लैब जाने तक सैंपल की केयर और टैंप्रेचर मेंटेन करने जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है. लैब में मौजूद टेक्नीशियन तुरंत सैंपल को लैब में प्रोसेसिंग के लिए लगा देते है, जिससे सही परिणाम आने की संभावना ज्यादा होती है.
होम विजिट या लैब किसमें सैंपल के रिजल्ट अच्छे आते हैं??
डॉ. घोटेकर बताते हैं कि ज्यादा बेहतर तो यही है कि आप लैब जाकर सैंपल दे दें. लेकिन अगर लैब घर के आसपास नहीं है या आप बुजुर्ग हैं तो होम सैंपल भी ठीक है. सैंपल कहां देना ये इस बात पर निर्भर करता है कि आपको कौन-सा टेस्ट करवाना है. अगर रूटीन और बेसिक टेस्ट करा रहे हैं तो घर से सैंपल देना ठीक है. लेकिन कोई जरूरी टेस्ट जैसे एचआईवी, इंफेक्शन, थाइराइड हार्ट डिजीज के टेस्ट कराने हैं तो लैब जाना ज्यादा बेहतर है. इस बात का भी ध्यान रखें कि सैंपल सही तरीके से देना जरूरी होता है.
किन बातों का रखें ध्यान?
हमेशा किसी भरोसेमंद लैब से टेस्ट कराएं.
सैंपल लेने वाले टेक्नीशियन की हाइजीन पर ध्यान दें
फास्टिंग या अन्य निर्देशों का सही तरीके से पालन करें
सैंपल देने से पहले घबराएं नहीं





