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पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट से आई नई मुसीबत, दाल-रोटी के पड़ सकते हैं लाले​

नई दिल्ली. देश में कम बारिश का असर खरीफ फसलों की बुआई पर हुआ है. मानसून की बेरुखी की वजह से धान, मक्‍का और दलहन फसलों का रकबा पिछले साल के मुकाबले घट गया है. खास बात यह है कि इस बार गन्‍ने की बुआई ज्‍यादा हुई है. गन्ने से ज्‍यादा कमाई की आस में […]

नई दिल्ली. देश में कम बारिश का असर खरीफ फसलों की बुआई पर हुआ है. मानसून की बेरुखी की वजह से धान, मक्‍का और दलहन फसलों का रकबा पिछले साल के मुकाबले घट गया है. खास बात यह है कि इस बार गन्‍ने की बुआई ज्‍यादा हुई है. गन्ने से ज्‍यादा कमाई की आस में किसान इसकी बुवाई ज्‍यादा कर रहे हैं.

टाइम्‍स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट में कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि देश में खरीफ फसलों का कुल बुआई क्षेत्र पिछले शुक्रवार तक 16% घट गया है. एक ओर जहां सभी फसलों का बुआई क्षेत्र घटा है, वहीं 10 जुलाई तक देश में गन्ने की बुआई 57.5 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है. यह आंकड़ा न केवल पिछले वर्ष के 56.7 लाख हेक्टेयर से अधिक है, बल्कि पिछले पांच वर्षों के औसत से भी कहीं ज्यादा है. गन्‍ने की फसल को पकाने में ज्‍यादा पानी की जरूरत होती है. कमजोर मानसून के बावजूद किसानों के गन्ने की ओर भागने का कारण एथेनॉल की मांग के कारण गन्‍ने से अच्‍छी कमाई होने की आस है.

कृषि मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज वाली फसलों के रकबे में भारी गिरावट दर्ज की गई है. इस बार खरीफ सीजन में सबसे बड़ी गिरावट दलहन के रकबे में आई है और यह 23% से ज्यादा घट गया है. मोटे अनाज का बुआई क्षेत्र 22%, तिलहन का 21%, कपास का 15% और चावल का 9% घट गया है. दलहन और तिलहन फसलों की कम बुआई चिंता का विषय है. अगर आगे हालत नहीं सुधरते हैं तो इससे आम आदमी की दालरोटी पर असर होना लाजिमी है.

बाजरा और मक्का जैसी फसलों में धान और गन्ने के मुकाबले बेहद कम पानी लगता है. इसके बावजूद इनके रकबे में गिरावट यह साबित करती है कि किसान फसल विविधीकरण के बजाय उस फसल को चुन रहे हैं जिसकी बाजार में खरीद और बेहतर कीमत की गारंटी हो.

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संपादकीय टीम

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