इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के फेल होने को लेकर नई जानकारी सामने आई है. अमेरिकी मीडिया एक्सियोस ने व्हाइट हाउस सूत्रों के हवाले से कहा है कि वार्ता के दौरान यूरेनियम संवर्धन के बदले ईरान ने अमेरिका से पैसे मांगे. का कहना था कि पहले अमेरिका उसके पैसे जारी करे. इसके बाद यूरेनियम को पतला करने का फैसला किया जाएगा. इस पर दोनों पक्षों में पेच फंस गया, जिसके बाद अमेरिकी उप राष्ट्रपति ने बैठक खत्म करने की बात कही. वेंस ने ही बातचीत फेल होने की पुष्टि की.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि समझौता लगभग फाइनल हो गया था, लेकिन हमारे प्रस्ताव को सुनने के बाद अमेरिका ने अपना लक्ष्य बदल लिया. आखिर में कोई समझौता नहीं हो पाया.
पैसों को लेकर ईरान की डिमांड
2015-16 में ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु को लेकर जो समझौता हुआ था, उसमें यूरेनियम को पतला करने के एवज में ईरान को 150 बिलियन डॉलर (12.5 लाख करोड़ रुपए) अमेरिका से मिलना था. इन पैसों का खर्च ईरान अपने मन मुताबिक कर सकता था, लेकिन जैसे ट्रंप राष्ट्रपति बने, उन्होंने इस समझौते को खारिज कर दिया.
इसके बाद ईरान को यह पैसा नहीं मिल पाया. ईरान की कोशिश इस बार समझौते के शुरुआत में ही पैसे लेने की है. हालांकि, इस बार ईरान की डिमांड कितने पैसों क है, इसका खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन माना जा रहा है कि यह राशि 150 बिलियन डॉलर से अधिक हो सकती है.
ईरान अमेरिका से पैसा क्यों मांग रहा है?
दरअसल, अमेरिका ने प्रतिबंध के तहत ईरान की संपत्तियों को जब्त कर रखा है. ईरान इन संपत्तियों के बदले अमेरिका से पैसा चाहता है. ईरान अपनी संपत्तियों के लिए ब्याज मूल्य भी चाहता है. यही वजह है कि इसकी रकम काफी ज्यादा है.
इसके अलावा अमेरिका पर ईरान के पुराने डील के कुछ पैसे भी बाकी हैं. इनमें कतर के पास ही 5 बिलियन डॉलर से ज्यादा पैसे होल्ड पर है. ईरान इन सभी पैसों को एकमुश्त चाहता है, जिसका इस्तेमाल वो क्राइसिस के समय कर सके.





