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न्यूक्लियर साइट्स पर अटैक से लेकर ग्राउंड ऑपरेशन तक… अमेरिका-ईरान वार्ता फेल, आगे क्या क्या होगा?

आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका जताई जा रही थी. इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई वार्ता पूरी तरह से फ्लॉप साबित हुई और बातचीत फेल हो गई. अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई और बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाई . जिसके बाद दोनों देशों के बीच एक बार फिर से जंग शुरू होने के आसार बन गए हैं. सवाल उठता है कि महज चंद दिनों पहले हुए दो हफ्ते के सीजफायर का क्या होगा, दुनियाभर की नजर अब इसी बात पर है.

न्यूक्लियर साइट्स पर अटैक से लेकर ग्राउंड ऑपरेशन तक… अमेरिका-ईरान वार्ता फेल, आगे क्या क्या होगा?
न्यूक्लियर साइट्स पर अटैक से लेकर ग्राउंड ऑपरेशन तक… अमेरिका-ईरान वार्ता फेल, आगे क्या क्या होगा?

अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता खत्म होने के बाद अब किसी भी समय सीजफायर खत्म हो सकता है. जिससे एक बार फिर से तेहरान में तबाही मच सकती है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप लगातार कहते आ रहे हैं कि अगर ईरान वाशिंगटन के साथ समझौता नहीं करता तो इसका अंजाम बहुत बुरा होगा. अब जब दोनों देशों के बीच बात नहीं बन पाई तो जाहिर है कि अमेरिका सीजफायर तोड़ने में देर नहीं लगाएगा.

न्यूक्लियर साइट्स पर अटैक

इस बार अमेरिका अपने हमले और तेज और भीषण कर सकता है. न्यूक्लियर साइट्स पर अटैक से लेकर ग्राउंड ऑपरेशन तक अमेरिका हर मोर्चे पर ईरान को घेरने की कोशिश करेगा. उसकरी नजर पहले से ही ईरान के पावर प्लांट्स पर है और अब उसे मौका भी मिल गया है. हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि अगर इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत फेल हो जाती है, तो अमेरिका हमला करने के लिए पूरी तरह तैयार है.

ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को फोन पर दिए इंटरव्यू में कहा था कि अमेरिकी युद्धपोतों में तेजी से नए और सबसे आधुनिक हथियार भरे जा रहे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर ईरान पर हवाई हमले किए जा सकें. उन्होंने कहा था कि इन हथियारों का इस्तेमाल बहुत प्रभावी तरीके से किया जाएगा और ईरान भारी नुकसान हो सकता है. इसके साथ ही उन्होंने ईरानी सभ्यता को मिटाने की धमकी दी थी. उन्होंने कहा था कि अमेरिका पावर प्लांट, पुल और दूसरे ढांचे को नष्ट कर देगा.

होर्मुज खोलने के लिए सैन्य अभियान

वहीं अब होर्मुज को लेकर भा लड़ाई तेज हो सकती है, जिसका असर दुनियाभर में पड़ेगा. ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी सैनिकों ने अपने गोला-बारूद को फिर से भर लिया है और वे हमले और विजय की प्रतीक्षा में हैं. सभी सैनिक तब तक ईरान के आसपास रहेंगे, जब तक वास्तविक समझौता लागू नहीं हो जाता है. इधर ईरान ने होर्मुज खोलने से साफ इनकार कर दिया था.

लेबनान में तबाही

इधर इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले से ही नहीं चाहते थे कि सीजफायर हो, यही वजह है कि उन्होंने लेबलान में हमले जारी रखे, वहीं ईरान क शर्त थी कि लेबलान में भी हमले रोके जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. बीते शनिवार को दक्षिणी लेबनान में इजराइली हमलों में कम से कम 18 लोग मारे गए हैं. इजराइल और लेबनानी समूह हिजबुल्लाह के बीच पिछले महीने शुरू हुए युद्ध में मरने वालों की कुल संख्या 2,000 से अधिक हो गई है. वहीं अब ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता फेल होने के बाद लेबलान में और भी तबाही मच सकती है.

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