
US Tariff: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पूरी दुनिया को अपने इशारों पर घुमा रहे हैं. पहले टैरिफ के नाम पर ग्लोबल मार्केट में हाहाकार मचाया, फिर ऑयल मार्केट में खेल खेल रहे हैं. कभी वेनेजुएला तो अब ईरान. वैश्विक अर्थव्यवस्था ट्रंप के फैसलों से प्रभावित हो रही है. ईरान जंग और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के बाद तेल और गैस की सप्लाई चेन टूट गई है. कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं. सप्लाई अटकने की वजह से कई देशों में गैस और तेल की दिक्कत देखी जा रही है. अभी दुनिया इस संकट से जूझ ही रही है कि ट्रंप ने एक और नया विस्फोट कर दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ का नया राग अलापना शुरू कर दिया है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका स्टील और एल्युमीनियम से बने प्रोडक्ट्स पर 25% की टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहे हैं. वहीं दवाओं पर 100 फीसदी तक टैरिफ लग सकता है. माना जा रहा है कि अगले हफ्ते इस टैरिफ का ऐलान हो सकता है.
ट्रंप फोड़ेंगे नया टैरिफ का बम
अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ पर पाबंदी लगा दी है. कोर्ट ने टैरिफ को अमान्य घोषित तक दिया. कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका की ओर से तमाम देशों पर लगाए गए टैरिफ रद्द हो गए, लेकिन अब उन्होंने टैरिफ की नई तैयारी की जा रही है. अमेरिका की ओर से स्टील, एल्युमीनियम पर 25 फीसदी, जबकि कुछ फार्मा कंपनियों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने की तैयारी की जा रही है. डोनाल्ड ट्रंप उन दवा कंपनियों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा सकते हैं.
किन कंपनियों पर लगेगा टैरिफ
ब्लूमबर्ग के मुताबिक जिन कंपनियों ने अमेरिका में दवाओं की कम प्राइसिंग को लेकर कोई गारंटी डील साइन नहीं की है, उन्हें इस टैरिफ का सामना करना पड़ सकता है.इस फैसले से उन सभी दवा कंपनियों पर असर होगा, जो अमेरिका में ऊंची कीमत पर दवा बेचती है. हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा फिलहाल नहीं की गई है. अमेरिका फर्स्ट पर जोर देने वाले ट्रंप का कहना है कि अगर विदेशी दवा कंपनियां अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग नहीं करतीं और उनके बाजार में महंगी दवाएं बेचती हैं तो उनकी दवाओं पर भारी टैक्स लगाया जाएगा.
भारत पर क्या होगा असर ?
ट्रंप के इस फैसले का असर भारत पर भी होगा. भारतीय दवा कंपनियां अमेरिका को भारी निर्यात करती है. अमेरिका के इस ऐलान ने भारतीय फार्मा कंपनियों के लिए अमेरिकी बाजार में दवा बेचना आसान नहीं होगा. हालांकि, भारत मुख्य से जेनेरिक दवाएं अमेरिका को निर्यात करता है, जिनपर टैरिफ की छूट मिलती है. ये दवाए पहले से ही सस्ती होती है. ऐसे में इनपर कोई बड़ा खतरा नहीं है. अगर ट्रंप ने कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया तो भारतीय दवा कंपनियों के लिए ये फैसला मौका भी बन सकती है.





