Viral

दूसरा स्टेज, फास्ट ब्रीडर… देर रात PM मोदी की बधाई, आखिर भारत ने कौन-सी परमाणु ताकत हासिल कर ली?


6 अप्रैल, रात 9.41 बजे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक ट्वीट आता है. वह सोशल मीडिया पर भारत के असैन्य परमाणु सफर के बारे में देशवासियों को जानकारी देते हैं. आखिर में, वह लिखते हैं, ‘भारत के लिए गर्व का पल. हमारे वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को बधाई.’ इससे पहले उन्होंने भारत के तीन चरणों वाले परमाणु कार्यक्रम में दूसरे चरण की तरफ बढ़ने की बात कही. कई घंटों से यह चर्चा है कि तमिलनाडु के कलपक्कम में स्वदेशी तरीके से बने प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली है. इसमें साइंस के कई शब्द हैं, जिसके अर्थ गहरे हैं. आखिर में भारत ने कौन सी ‘धुरंधर पावर’ हासिल कर ली है? फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्या होते हैं? क्रिटिकैलिटी हासिल करने का मतलब क्या है? सबसे पहले जानिए, परमाणु कार्यक्रम के दूसरे चरण का क्या मतलब है?

जब भारत आजाद हुआ, तो 1954 में ही तीन चरणों वाले परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार हुई. दरअसल, भारत में यूरेनियम भंडार बहुत कम थे और थोरियम काफी ज्यादा इसीलिए ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए थोरियम भंडार का इस्तेमाल करने की योजना बनी. इस प्लान को भारत में परमाणु कार्यक्रम के जनक होमी जहांगीर भाभा ने तैयार किया था. एक रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे पास दुनिया के यूरेनियम भंडार का केवल 2 प्रतिशत है, लेकिन थोरियम भंडार का 25 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है.

आजादी के फौरन बाद हमारी लीडरशिप ने देश की बढ़ती जनसंख्या और अर्थव्यवस्था के कारण बढ़ने वाली ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए आत्मनिर्भर बनने का खाका खींचा. इसके लिए तीन स्टेज वाला परमाणु कार्यक्रम तैयार किया गया. अब यह समझना जरूरी है कि तीन चरण कौन से हैं और थोरियम से क्या कमाल किया जा सकता है?

भारत के थोरियम की खासियत क्या है?
अपने देश में करीब 4 लाख टन थोरियम का भंडार हो सकता है. यह ऐसा पदार्थ होता है, जो विखंडनीय नहीं होता है, मतलब न्यूट्रॉन के टकराने से परमाणु विखंडन नहीं होता है. सरल शब्दों में यह विभाजित नहीं होता है, बल्कि यह यूरेनियम-233 में बदल जाता है. यूरेनियम का विखंडन करके ऊर्जा पैदा की जा सकती है.

परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के तीन चरण
स्टेज 1. प्रेशराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर के ईंधन के लिए प्राकृतिक यूरेनियम का उपयोग होता है.
स्टेज 2. बाई-प्रोडक्ट प्लूटोनियम (Pu)-239 का उपयोग दूसरे चरण में किया जाता है. अतिरिक्त प्लूटोनियम का प्रोडक्शन करने के लिए फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (FBR) विकसित करने की जरूरत होती है, जिससे थोरियम (Th-232) का विखंडनीय यूरेनियम (U-233) में रूपांतरण हो सके. इसमें थोरियम का इस्तेमाल कवरिंग में होता है.
स्टेज 3. ऐसे ब्रीडर रिएक्टर की जरूरत होती है, जो थोरियम-आधारित न्यूक्लियर रिएक्टर होते हैं.

भारत में कहां-कहां न्यूक्लियर रिएक्टर हैं?
1. राजस्थान- रावतभाटा
2. तमिलनाडु- कुडनकुलम, कलपक्कम
3. गुजरात- काकरापार
4. यूपी- नरौरा
5. कर्नाटक- कैगा
6. महाराष्ट्र- तारापुर

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्या होते हैं?
प्रधानमंत्री ने खुद बताया है कि यह उन्नत रिएक्टर अपनी खपत से ज्यादा ईंधन पैदा करने में सक्षम है. पीएम ने इसे परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण में भारत के विशाल थोरियम भंडार का उपयोग करने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी बताया. दरअसल, 500 मेगावाट इलेक्ट्रिक (MWe) का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) तमिलनाडु के कल्पक्कम में स्थित है. इसे भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) संचालित करता है, जो देश की दीर्घकालिक परमाणु रणनीति का एक प्रमुख घटक है. एक बार पूरी तरह से चालू हो जाने पर, भारत रूस के बाद दूसरा ऐसा देश बन जाएगा, जिसके पास एक वाणिज्यिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर होगा.

क्रिटिकैलिटी हासिल करने का क्या मतलब है?
असल में, यह उस प्वाइंट की तरफ इशारा करता है जब कोई परमाणु रिएक्टर एक स्थिर, स्व-संचालित परमाणु विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया हासिल कर लेता है. स्व-संचालित यानी रिएक्टर को अब बाहरी न्यूट्रॉन स्रोत की जरूरत नहीं होगी. वह उसके बगैर एक नियंत्रित और स्थिर विखंडन दर बनाए रख सकता है. सरल भाषा में समझें तो परमाणुओं के विखंडन से पैदा होने वाले न्यूट्रॉनों की संख्या, नष्ट हुए न्यूट्रॉनों की संख्या के साथ पूर्ण रूप से संतुलित बनी रहती है. इससे ऊर्जा का स्तर हमेशा स्थिर बना रहता है. यह उन्नत परमाणु तकनीक स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में भारत की स्थिति को मजबूत करता है. यह परियोजना पूरी तरह से स्वदेशी है. इसमें 200 से ज्यादा भारतीय उद्योगों (कई MSME सहित) का योगदान रहा है.

फास्ट के आगे क्या?
फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों को अपनी खपत से ज्यादा विखंडनीय सामग्री उत्पन्न करने के लिए डिजाइन किया जाता है. प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर में यूरेनियम-प्लूटोनियम मिश्रित ऑक्साइड ईंधन का उपयोग किया जाता है, जबकि इसके चारों ओर मौजूद यूरेनियम-238 की परत में ट्रांसम्यूटेशन (रूपांतरण) की प्रक्रिया होती है. इससे अतिरिक्त ईंधन का उत्पादन होता है. बाद के चरणों में, यूरेनियम-233 का उत्पादन करने के लिए थोरियम-232 का उपयोग किया जाएगा. यह भारत के परमाणु कार्यक्रम के तीसरे चरण का मार्ग प्रशस्त करेगा और देश के विशाल थोरियम भंडार के उपयोग को संभव बनाएगा. यह रिएक्टर जबर्दस्त सिक्योरिटी से भी लैस है, जैसे किसी भी इमरजेंसी में यह अपने आप बंद हो जाएगा.

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply